हावड़ा निगम के कोष पर भी लॉकडाउन की मार

हावड़ा : पिछले दो वर्षों में राजस्व संग्रह में गिरावट आयी है। राज्य सरकार से मिलने वाली राशि का हिसाब भी गड़बड़ होने के आरोप लग रहे हैं, इस पर पिछले तीन महीनों से, हावड़ा नगर निगम के तहत चलनेवाले तमाम विकास रुके हैं। कथित तौर पर, स्थिति ऐसी अवस्था में पहुंच गयी है जहां, कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी नहीं कर पा रहे थे। हालांकि निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कोरोना काल में करीब दो महीने तक निगम के कार्यालय बंद थे। इसके कारण आर्थिक संकट था, लेकिन अभी उसे रिकवर कर लिया गया है। गौरतलब है कि 10 दिसंबर, 2016 को तृणमूल द्वारा संचालित निगम बोर्ड की अवधि समाप्त होने के एक दिन बाद, निगम को चलाने की जिम्मेदारी प्रशासक को सौंप दी गई थी। 66 वार्डों की यह नगर निगम कमिश्नर को एडमिस्ट्रेटर की जिम्मेदारी सौंपकर चलायी जा रही है।
विभिन्न विभागों के राजस्व में गिरावट
निगम कर्मियों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि निर्वाचित प्रबंधन बोर्ड की अनुपस्थिति के कारण विभिन्न विभागों के राजस्व में गिरावट और लागत में बढ़ोत्तरी हुई है। परिणामस्वरूप, सड़क की मरम्मत, पेयजल आपूर्ति, सीवरेज प्रणाली का विकास जैसी न्यूनतम काम भी नहीं किए गए। आरोप है कि राजस्व इकट्ठा करने में निगम के विभागों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता की वजह से वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। नगर निगम के वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगम का औसत खर्च प्रति वर्ष लगभग 200 करोड़ रुपये और आय 180 करोड़ रुपये था। हर साल निगम को लगभग 20 करोड़ का घाटा होता था। लेकिन पिछले तीन महीने में घाटा 40 करोड़ रुपये को पार कर गया था।
निगम के खर्च की सूची
नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, उनकी खर्च की सूची में स्थायी और ठेका श्रमिकों का वेतन, 100 दिन के श्रमिकों का वेतन और दैनिक आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने की लागत शामिल हैं। निगम के अनुमानों के अनुसार, कुल 4,500 श्रमिकों को ­भुगतान करने में एक साल में लगभग 40 करोड़ की लागत आती है। इसमें समझौता के अनुसार रखे गये 2400 कर्मचारी, 1000 सीवेज कर्मचारी और 1000 दैनिक वेतन कर्मचारी हैं जिनमें 419 अस्थायी कर्मचारी भी शामिल हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो हर महीने इसमें निगम के लगभग साढ़े 3 करोड़ रु खर्च होते हैं।
बीच में ही रूकी कई परियोजनाएं
निगम के कोष पर असर पड़ने से मानसून से पहले होनेवाले सड़क मरम्मत या जल निकासी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को रोकना पड़ा है। इसके कारण कई परियोजनाओं को बीच में रोकना पड़ा है तो कई परियोजनाएं शुरू ही नहीं हो पा रही है। इसके कारण हावड़ा में जगह जगह रोड खराब है और नालियां उबाल पर है। इस बारे में निगम की ओर से कहा गया है कि मानसून के साथ ही रोड का काम भी शुरू कर दिया जायेगा।

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