स्कूल खुलने के नाम से ही सहम जा रहे हैं छोटे बच्चों के अभिभावक

92% अभिभावक बच्चों को तुरंत स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं, 56% कम से कम एक माह तक देख कर तय करेंगे, डरा रहा है कोरोना का डर

प्रीति यादव,कोलकाता : एक समय वह था जब अभिभावक जबरन बच्चों को स्कूल भेजा करते थे। अब वह भी समय है जब अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के नाम से ही सहम जा रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों का स्कूली बच्चों के परिजनों पर काफी असर पड़ा रहा है। असर ऐसा है कि अगर स्कूल खुलते हैं तो भी ये परिजन अपने बच्चों को तुरंत पढ़ने नहीं भेजेंगे। एक आंकड़े के मुताबिक स्कूल खुलने के बाद बच्चों को तुरंत पढ़ने नहीं भेजने वाले परिजनों की संख्या 92 प्रतिशत है, वहीं 56 प्रतिशत कम से कम एक महीने तक हालात का जायजा लेने के बाद फैसला करेंगे। उनका कहना है कि अगर एक साल उनके बच्चा स्कूल नहीं जायेगा तो वह अनपढ़ नहीं रह जायेगा। अगर जिन्दगी रही तो पढ़ाई भी होगी। बता दें कि इजरायल के एक स्कूल में कोरोना के फैलने की खबर इन दिनों खूब वायरल हो रही है तथा पैरंट्स ग्रुप में भी इसको काफी लाइक मिल रहे हैं। यानी यहां भी अभिभवक नहीं चाहते कि तुरंत स्कूल खुले, और अगर खुले भी तो छोटे बच्चों के क्लासंज कम से कम एक माह बाद ही शुरू हों। बच्चों को स्कूल भेजने से पहले वे आश्वस्त होना चाहते हैं कि कोविड को लेकर स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में हो। उनका कहना है कि कौन बच्चा रेड जोन से आ रहा है और कौन बच्चा केटंनमेंट जोन से, यह तो वे नहीं जानते, हां कक्षाओं में सारे बच्चे एक साथ बैठेंगे, इसलिए खतरा अधिक रहेगा।
क्या कहना है अ​भिभावकों का
बागुईआटी की रहने वाली प्रीति सिंह की बेटी वीआईपी रोड के एक निजी स्कूल में पढ़ती है। उन्होंने कहा कि जुलाई में अगर स्कूल खुल भी जाता है तो वह अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगी। जिन्दगी रहेगी तो पढ़ाई होती रहेगी। मैं कम से रिस्क नहीं उठा सकती हूं।  लिलुआ की रहने वाली संगीता शर्मा ने कहा कि उनका बेटा हावड़ा के एमसीकेवी विद्यापीठ का छात्र है। उनका घर और स्कूल दोनों ही रेड जोन के अंतर्गत आता है ऐसे में जब तक कोरोना का प्रभाव कम नहीं हो जाता है तब तक वह अपने बच्चे को स्कूल भेजने से परहेज करेंगी। हिंन्दमोटर की रहने वाली रचना शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी अग्रसेन बालिका शिक्षा की कक्षा 3 की छात्रा है। उन्होंने कहा कि उनकी बच्ची का स्कूल रेड जोन में है जब तक वह ग्रीन जोन में तब्दील नहीं हो जाता है तब तक वह बच्चे को स्कूल नहीं भेंजेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रशसान से आग्रह कर रही हैं कि जब तक संक्रमण का खतरा कम ना हो जाये वह स्कूलों को खोलने की अनुमति ही न दे। लिलुआ की रहने वाली किरण मिश्रा ने कहा कि उनका बेटा अभी नर्सरी में पढ़ता है। बच्चों को तो संक्रमण का मतलब ही नहीं पता होता है ऐसे में वह कैसे खुद की सुरक्षा करेगा। ऐसे में जब तक हावड़ा पूरी तरह खतरे से सुरक्षित नहीं हो जाता है वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेंजेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बच्चा कोई टेस्टिंग किट नहीं है जो वह उसे स्कूल भेजकर यह टेस्ट करें कि संक्रमण फैलता है या ना। टीटागढ़ की रहने वाली प्रियंका गुप्ता ने कहा कि उनकी बेटी कक्षा 1 में पढ़ती है। वह भी अपने बच्चे को स्कूल भेजने के खिलाफ हैं। स्कूल में एक साथ कितने बच्चे रहेंगे उसमें कौन सुरक्षित है इसका पता लगा पाना मुश्किल है। इसलिए वह उसे स्कूल नहीं भेंजेगी। कुछ इसी तरह की राय अन्य अभिभावकों की है। अब देखना है कि सरकार किस तरह का फैसला लेती है।
क्या कहना है स्कूल के प्रिंसिपलों का
महादेवी बिरला वर्ल्ड एकेडमी की प्रिंसिपल अंजना साहा ने कहा कि पहले तो बोर्ड परीक्षा है। उसके बाद स्कूल खोलने के बारे में विचार किया जायेगा। माहौल को देखते हुए ही कोई भी निर्णय लिया जायेगा। इसके साथ ही हम सभी अभिभावक और बच्चाें की सुरक्षा को भी ध्यान में रखेंगे। जूलियन डे स्कूल की प्रिंसिपल कोलिन स्मिथ का कहना है कि कोरोना के कारण अभिभावकों का आत्मविश्वास थोड़ा डगमगा गया है, जिससे अगर स्कूल खुलता भी है तो 50 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेंजेगे। ऑनलाइन पढ़ाई एक मात्र जरिया है, संक्रमण को रोकते हुए बच्चे को सुरक्षित रख पढ़ाई करने का।
अभिभावकों ने लगायी पीएम से गुहार,स्कूल अभी नहीं खोलने की अपील
संक्रमण के लगातार बढ़ते मामले को देखते हुए अभिभावकों ने जुलाई में स्कूल ना खोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगायी है। इसके तहत उन्होंने ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान चलाया है। इस अभियान से लगभग 2 लाख 13 हजार अभिभावक जुड़े हैं। बता दें कि पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा जुलाई में होगी। उसके बाद फिर से स्कूल खोले जा सकते हैं, लेकिन माता-पिता सहमत नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि जुलाई में स्कूल खोलना आग से खेलने के बराबर होगा।
महानगर में बड़ी रैली करना चाहते हैं अभिभावक
मुद्दा-नो स्कूल, नो फीस केपी के मंजूरी का है इंतजारकोलकाता : फीस के मुद्दे पर कुछ निजी स्कूलों के रैवये से परेशान अभिभावक अब सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। उनका कहना है कि इससे पहले वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्यपाल जगदीप धनखड़, शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी व आला अधिकारियों को नो स्कूल, नो फीस के संदर्भ में पत्र भेज चुके हैं जिसका कोई लाभ नहीं हुआ। अंतत: रैली कर प्रदर्शन करने के निष्कर्ष पर पहुंचे है। इस बाबत कोलकाता पुलिस से मंजूरी मांगी गयी है। अभिभावकों का यह संगठन अगामी 15 जून को महानगर की सड़कों पर वृहद रैली करने को तैयार है।
‘खुल रहे हैं स्कूल दीजिए फीस’
अभिभावकों का कहना है कि अब स्कूलों ने फीस लेने का नया तरिका ढूंढा है। अब स्कूल कह रहे हैं कि हम स्कूल चालू करने जा रहे हैं, आप फीस दीजिए। कब से स्कूल चालू करेंगे, यह नहीं बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सरकार ने इस माह के अंत तक स्कूल नहीं खोलने का फरमान जारी किया है। बता दें कि लगातार अभिभावकों द्वारा ‘नो स्कूल, नो फीस’ के मुद्दे पर प्रतिवाद किया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि अब स्कूलों कि ओर यह कहा जा रहा है कि स्कूल खुलने को तैयार हैं आप फीस दीजिए। अभिभावक किसी भी हालत में लॉकडाउन के दौरान फीस देने को तैयार नहीं हैं।

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