सीबीएसई व आईसीएसई व आईएससी की बची परीक्षाएं रद्द होने पर शहर के प्रिंसिपल व ​शिक्षकों ने क्या कहा

हालातों को देखते हुए लिया गया निर्णय सही

सन्मार्ग संवाददाता, कोलकाता : सीबीएसई और आईसीएसई व आईएससी की बची परीक्षाएं रद्द हो गयी हैं। ऐसे में छात्रों से लेकर शिक्षकों तक के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। साथ ही छात्रों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर महानगर के शिक्षकों की अलग – अलग राय है। कई शिक्षकों का कहना है कि जो हुआ वह उचित हुआ तो कइयों ने कहा कि यह उन छात्रों के साथ गलत हुआ जो 90% अंक के हकदार हैं। सन्मार्ग ने इस संबंध में कई शिक्षाविदों और वरिष्ठ शिक्षकों की राय जानी। पेश है उनकी राय…

द हेरिटेज की प्रिंसिपल सीमा सप्रु ने कहा कि बहुत दिनों तक परीक्षा लटका हुआ था इसलिए जो भी निर्णय आया है वह अच्छा है और बच्चों के हित में है। जान है तो जहान है अगर बच्चा 90% अंक ही लाये और कोरोना का शिकार हो जाए तो इससे अच्छा है यह निर्णय।

इंडस वैली वर्ल्ड स्कूल की निदेशक अमिता प्रसाद ने कहा कि  यह अधिकांश माता-पिता के लिए एक बड़ी राहत होगी क्योंकि वे स्वाभाविक रूप से महामारी के बीच में अपने बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर भेजने से बेहद चिंतित थे। छात्र जबरदस्त तनाव से गुजर रहे थे – न जाने क्या फैसला होगा। इस अनिश्चितता के कारण वे अपनी तैयारी में अपना 100% नहीं लगा पा रहे थे। मुझे विश्वास है कि अच्छे कॉलेज इन विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।

अशोक हाल गर्ल्स हायर सेकेंडरी की प्रिंसिपल सोनाली सरकार ने कहा कि छात्रों के लिए यह मिश्रित फैसला है, कुछ ने राहत व्यक्त की है और कुछ ने कड़ी तैयारी की है, वे निराश हैं। लेकिन उनमें से अधिकांश इस तथ्य से खुश हैं कि रिजल्ट उम्मीद से बहुत पहले घोषित किए जाएंगे ताकि वे कॉलेज में प्रवेश के साथ आगे बढ़ सकें।

बिरला हाई स्कूल की डायरेक्टर मुक्ता नैन ने कहा कि  यह बहुत ही अच्छा हुआ है क्यों​कि एक तो कोराेना काल, ऐसे में बच्चों की परीक्षा कैसे होती, कहां होती, जहां होती वहां सुरक्षा का ध्यान रखा जाता या नहीं। बहुत सी दिक्कतें हो सकती हैं। ही परीक्षा में पहले ही काफी देरी हो चुकी है और अगर अभी परीक्षा होती भी तो कॉपी चेक करने में काफी समय लगता। इन सबके कारण कॉलेज में एडमिशन भी नहीं हो रहा और उसमें भी समय लगता। ऐसे में सारी चीजें देरी से होती। अभी सिर्फ इंटरनल नम्बर भेजना है।

 

केंद्रीय विद्यालय सांतरागाछी के प्रिंसिपल आर.सी. पांडेय ने कहा कि  सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कुछ बच्चे तो खुश होंगे मगर कॉम्पीटिटिव एग्जाम की तैयारी करने वाले बच्चों को मायूसी होगी। हालांकि सीबीएसई की ओर से विकल्प दिया गया है कि भविष्य में छात्र इम्प्रूवमेंट एग्जाम देकर अपने आप को बेहतर साबित कर सकते हैं।

कलकत्ता पब्लिक स्कूल की वरिष्ठ शिक्षिका शोभा सिंह ने कहा किकाेरोना को देखते हुए जो निर्णय लिया गया है, वह उचित है। हालांकि भविष्य में परीक्षा होनी चा​हिए क्योंकि यह बच्चों की भविष्य का सवाल है। इस बारे में एडुकेशन डिपार्टमेंट को सोचना चाहिए और जब सिचुएशन कंट्रोल में हो तो बच्चों की परीक्षा जरूर कराएं।

जूलियन डे स्कूल के शिक्षक माे. सहाबुद्दीन ने कहा कि परिस्थिति के अनुसार जो निर्णय लिया गया है वो फायदेमंद है पर ऐसे नहीं होना चाहिए था। भविष्य में परीक्षा होनी चहिए, क्योंकि बहुत से ऐसे छात्र हैं जो 90 प्रतिशत के हकदार हैं पर अभी क्राइटेरिया के हिसाब से नम्बर दिया जाएगा। ऐसे में अगर 75% अंक ही मिलते हैं तो यह उनके साथ नाइंसाफी है।

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