सीबीएसई व आईसीएसई व आईएससी की बची परीक्षाएं रद्द होने पर क्या कहा छात्रों ने आइये जानें

बोर्ड के निर्णय से कंफ्यूज हैं छात्र, कैसे होगा कटऑफ

सोनू ओझा ,कोलकाता : कॉलेजों में दाखिले को लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहीं से शुरू होती है कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया जिसके आधार पर देश भर के कॉलेजों में छात्र अपनी इच्छा अनुसार या कहें कि काबिलियत के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है मगर समस्या सीबीएसई और आईसीएसई के छात्रों को झेलनी पड़ेगी। डीयू के कट ऑफ मार्क्स के आधार पर ही इन छात्रों ने भी अपने दाखिले को लेकर काफी योजनाएं बनाई थी मगर कोरोना के कारण सीबीएसई और आईसीएसई की परीक्षाएं रद्द कर दी गयी। परीक्षाएं रद्द होने की खबर ने कुछ छात्रों को शायद राहत दी हो मगर बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसकी दो वजहें हैं, पहली दाखिले को लेकर कटऑफ मार्क्स और दूसरी उनके खुद की मार्किंग जो अब किस आधार पर होगी यह उनके लिए पहेली बनी हुई है।

 

दाखिले की प्रक्रिया पर परेशान
द हेरिटेज के छात्र राहुल सराफ के सभी पेपर पूरे हो गए हैं मगर अब दाखिले की प्रक्रिया को लेकर वे काफी परेशान हैं। राहुल ने बताया कि वह कॉमर्स के छात्र हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले की चाह रखते हैं। मगर बीच में ही बाकी पेपर रद्द कर दिए गए जिसे लेकर अब यह समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर कटऑफ मार्क्स किस आधार पर तय किया जाएगा। इसके साथ ही इस बात पर भी कंफ्यूजन है कि बाकी स्टूडेंट को किस आधार पर मार्किंग दी जाएगी। इन सभी चीजों की जानकारी सटीक रूप से नहीं मिलने के कारण उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि उनका भविष्य किस तरफ जाने वाला है।

नंबर की चिंता है
अनुभा बारिक केवी साल्टलेक में कॉमर्स की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि उनके इंटरनल एग्जाम्स में नंबर कुछ अच्छे नहीं आए थे। इसलिए इन परीक्षाओं पर ही उनकी पूरी उम्मीद टिकी थी। मगर अब परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं तो उनकी मुश्किलें भी उतनी ही बढ़ गई हैं, क्योंकि मार्क्स किस आधार पर मिलेंगे यह उन्हें पता नहीं। उम्मीद यही है कि इंप्रूवमेंट एग्जाम में भरपूर कोशिश करके नंबर जुगाड़ सकें।

मार्किंग को लेकर उलझन में
डीपीएस मेगासिटी में साइंस स्ट्रीम के छात्र केशव कुमार कवटिया की मुश्किल मार्किंग हैं। उन्होंने कहा कि अब चिंता इसी बात की है कि फाइनल मार्किंग कैसी होगी। वह किस आधार पर मिलेगी, क्योंकि इसी मार्किंग पर तय किया जाएगा कि दाखिला कहां हो पाएगा। ठीक उसी तरह कट ऑफमार्क्स भी काफी प्रभावित करने वाले हो सकते है क्योंकि उनका आधार अब तक समझ नहीं आ पा रहा है।

 

नंबरों को लेकर कंफ्यूजन है
हावड़ा सेंट थॉमस चर्च के स्टूडेंट प्रथम शर्मा की चिता भी कुछ इसी तरह है। उन्होंने बताया कि मार्क्स को लेकर सबसे अधिक कंफ्यूजन हो रही है। सोचा था कि बची परीक्षाओं में और बेहतर नंबर लाने की कोशिश करूंगा मगर अब परीक्षाएं ही रद्द हो चुकी है। कुल मिलाकर इन स्टूडेंट्स ने जो सोचा था उस पर कोरोना के वायरस ने पानी फेर दिया। अब तो उन्हें नतीजों की ही नहीं उसके बाद एडमिशन, रैंक अौर कटऑफ मार्क्स की चिंता सता रही हैं।

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