सीएम के निर्देश के बावजूद कोरोना संक्रमित शवों को जलाने में लग रहे हैं कई दिन

कोलकाता : कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेजी से पूरे राज्य में फैलता जा रहा है। जब कोरोना वायरस ने पश्चिम बंगाल में अपने पांव जमाने शुरू ही किये थे तो उस समय पूरी तरह अव्यवस्था की स्थिति नजर आ रही थी। कोरोना से संक्रमित व्यक्ति की अगर मौत हो जाए तो उसका दाह संस्कार भी परिवार की जानकारी के बगैर ही कर दिया जाता था। ऐसे में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस ओर कदम उठाते हुए निर्देश दिया था कि मौत होती है तो पहले परिवार को जानकारी देनी होगी। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद कोरोना संक्रमितों के शवों के दाह संस्कार में कई दिनों का समय लग जा रहा है।
लोगों की आ रही हैं शिकायतें
कई लाेगों की शिकायतें मिल रही हैं कि कोरोना संक्रमितों के शवों के दाह संस्कार में काफी दिनों का समय लग रहा है। एक व्यक्ति ने सन्मार्ग को फोन कर बताया कि उनके किसी दूर के रिश्तेदार की मौत कोरोना से हो गयी है, लेकिन शव का दाह संस्कार होने में 4 दिनों का समय लग गया। रक्षाबंधन के दिन शव का दाह संस्कार किया गया जिस कारण सबसे बड़ी समस्या अब यह हो गयी कि प्रत्येक वर्ष अब रक्षाबंधन के दिन ही उनकी बरसी मनायी जा सकती है। वहीं मारवाड़ी समाज में यह नियम है कि शव के जलने से पहले तक परिवार के बुजुर्ग अन्न – जल ग्रहण नहीं करते हैं, ऐसे में लोगों को काफी मुश्किलें हो रही हैं। अगर कोरोना संक्रमित शव का अंतिम संस्कार करने में इतने दिनों का समय लग जा रहा है तो राज्य सरकार की ओर से क्या व्यवस्था अपनायी जा रही है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्या हैं दाह संस्कार के नियम
– अगर किसी की मौत कोरोना से होती है तो अस्पताल द्वारा स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया जाता है। इसके बाद मृतक के परिवार वालों को भी इस संबंध में सूचना देने का नियम है।
– अंतिम संस्कार के आधे घण्टे पहले शव को परिवार के सदस्यों को दूर से दिखाने का नियम है। इससे पहले परिवार के सदस्यों को सूचित नहीं किया जाता था।
एक साथ 7 कोरोना संक्रमितों के शव रखे जा सकेंगे वाहन में
कोरोना से मृतकों के लिए कोलकाता नगर निगम एक वाहन ला रहा है जिसमें एक साथ 7 मृतकों के शव रखे जा सकते हैं। इस बारे में कोलकाता नगर निगम के पूर्व एमएमआईसी व बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के सदस्य अतिन घोष ने बताया कि फिलहाल निगम ने निमतला सार्वजनीन दुर्गोत्सव कमेटी के साथ मिलकर एक वाहन लाया है। इसमें एक साथ 7 शव रखे जा सकते हैं। इससे कोरोना संक्रमितों के शवों के दाह संस्कार का समय कम होगा। उन्होंने बताया कि ऐसे वाहनों की संख्या और बढ़ायी जाएगी जिससे सुविधा हो।
देरी को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर
शव के अंतिम संस्कार में देरी को लेकर कोलकाता मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के सुपर डॉ. इंद्रनील विश्वास ने सन्मार्ग से कहा, ‘हमारे अस्पताल में कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार करने में एक दिन का ही समय लगता है। मृतकों के परिजनों को सूचित करने के बाद उनसे कंसेंट फाॅर्म भरवाये जाते हैं। इन सबमें कुछ समय लग जाता है, लेकिन इसके बावजूद हमारे अस्पताल द्वारा एक दिन में अंतिम संस्कार करवाया जा रहा है।’
क्या कहते हैं समाज के लोग
अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष व समाजसेवी सीताराम शर्मा ने कहा, ‘कोरोना जैसी बीमारी अब तक नहीं हुई होगी, लेकिन इसके बावजूद पार्थिव शरीर के साथ जिस तरह के व्यवहार की खबरें आती हैं, वह उचित नहीं है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में आग लगाने से लोग कोरोना संक्रमित होते हैं या नहीं, इस पर भी वितर्क है। समाज में मृत व्यक्ति काे पूरा सम्मान दिया जाता है, परिवार की तरफ से दुशाला भी ओढ़ाया जाता है। इन चीजाें में अगर थोड़ा सुधार लाया जा सके तो बेहतर होगा। वहीं अस्पताल से जब निगम को मृतक के बारे में सूचित किया जाता है तो निगम कर्मी पार्थिव शरीर लेने कब आयेंगे, इसका कोई ठिकाना नहीं होता। इस कारण शवों के अंतिम संस्कार में काफी समय लग जा रहा है।’

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