सावधान ! छोटी असावधानियां बढ़ा रही हैं कोरोना का संक्रमण

कोलकाता : राज्य में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। चाहे लोग घरों में हो या फिर बाहर निकल रहे हो, कोरोना अपनी चपेट में लोगों को तेजी से ले रहा है। बहुमंजिली इमारतों में रहने वाले हो या फिर बस्तियों में रहने वाले, स्वास्थ्य कर्मी हो या पुलिस कर्मी, कोरोना के डंक से लोगों का बचना मुश्किल होता जा रहा है। आखिर क्या कारण है कि कोरोना का संक्रमण इतनी तेज गति से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। लोग तो मास्क लगाने लगे हैं, सैनिटाइज भी कर रहे हैं। काफी सुरक्षा अपनाये जाने के बावजूद यह संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। हालांकि इस बारे में डॉक्टरों की राय है कि लोगों की छोटी – छोटी लापरवाही के कारण ही संक्रमण फैल रहा है।
पीपीई नहीं, टीपीई की आवश्यकता है
वरिष्ठ फीजिशियन डॉ. एस. के. अग्रवाल ने सन्मार्ग से कहा, ‘चाहे बहुमंजिली इमारतों में रहने वाले लोग हों या फिर कोई अन्य, पूरी तरह सुरक्षा कोई नहीं अपनाता है। हमें अब पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) नहीं बल्कि टीपीई (ट्रांसमिशन प्रोटेक्टेड इक्विपमेंट) की आवश्यकता है। डॉक्टरों को हर मरीज को कोरोना संभावित ही समझना चाहिए। कोरोना अब एयर बोर्न डिजीज भी घोषित हो चुका है। ऐसे में केवल मास्क से कुछ नहीं होगा। हमें फुल प्रोटेक्टेड होना होगा और इसके लिए पूरी तरह कवर किया गया मास्क, कैप, गाउन, शू कवर पहनना आवश्यक है। मास्क कभी नाक के नीचे चला जाता है तो कभी लोग उसे दाढ़ी की तरह लगा लेते हैं। इससे भला संक्रमण फैलने से कैसे रोका जा सकता है। लोगों को और अधिक सतर्क होने की जरूरत है।’
छोटी गलतियां बन रही बड़ा खतरा
लोगों की छोटी-छाेटी गलतियां ही बड़ा खतरा बन रही हैं। यह कहना है एम आर बांगुर अस्पताल के सुपर डॉ. शिशिर नस्कर का। उन्होंने कहा कि केवल मास्क पहनने से कुछ नहीं होगा क्योंकि हम दिन भर में कई गलतियां करते हैं। चाहे कभी सड़क किनारे मास्क हटाकर चाय पी लेना हो या फिर कहीं बाहर किसी दुकान की केटली से पानी पीना। मास्क हटाकर हम ये सब करते हैं और उसी दौरान कभी नाक तो कभी चेहरे के अन्य हिस्सों को भी छू लेते हैं। कभी हम बाहर कहीं से खाना खाते हैं और वह खाना हमें कागज के प्लेट में देता है, यह भी लापरवाही है। हर एक व्यक्ति को इन छाेटी – छोटी गलतियों के प्रति सतर्क होना होगा, नहीं तो कोरोना की चपेट में जाने से नहीं बचा जा सकता है।
टेस्टिंग की संख्या बढ़ना भी है अहम कारण
टेस्टिंग की संख्या बढ़ना भी संक्रमितों की संख्या बढ़ने का कारण है। यह कहना है डॉक्टर अभिषेक तिवारी का। उन्होंने कहा कि टेस्टिंग बढ़ने के अलावा अनलॉक के बाद से लोग अधिक संख्या में बाहर निकल रहे हैं। इसके अलावा काफी लोग बगैर लक्षण वाले भी निकल रहे हैं जिस कारण संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कम्युनिटी ट्रांसमिशन और एयरबोर्न डिजीज होने का खतरा भी है। इन सबके अलावा लोग पहले से अधिक लापरवाह हो गये हैं और सोच रहे हैं कि उन्हें कुछ नहीं हो सकता।
नियमाें का पालन पूरी तरह नहीं कर रहे हैं लोग
डॉक्टर ए. के. सिंह का कहना है कि लोग कोरोना से बचने के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। अगर स्वास्थ्य कर्मियों व पुलिस की बात करें तो इन लोगों को ग्रास रूट लेवल पर काम करना पड़ रहा है जिस कारण इनमें संक्रमण फैला है। हालांकि आम लोग अगर नियमों का सही ढंग से पालन करें तो काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में जनसंख्या के हिसाब से मार्केट की संख्या कम है। ऐसे में बाजारों में लोगों की काफी भीड़ उमड़ रही है और लोग सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान नहीं रख पा रहे हैं।
विशेषज्ञों की सलाह, वॉल्व वाले एन95 सुरक्षित नहीं
सभी चीजों के बीच चौंकाने वाली बात यह सामने आयी है कि वॉल्व वाले एन95 मास्क सुर​क्षित नहीं होते क्योंकि इससे बाहर की हवा अंदर प्रवेश करती है। हालांकि यह बात सामने आने में काफी समय बीत चुका है और अब तक ना जाने कितने लोगों को संक्रमण ने अपनी चपेट में ले लिया होगा।

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