सर्वदलीय बैठक का अधिकांश पार्टियों ने किया बहिष्कार

सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग में गरमाये हालातों को सामान्य करने के लिए आयोजित की गयी  सर्वदलीय बैठक का अधिकांश पार्टियों ने बहिष्कार किया। गुरुवार को  सिलीगुड़ी में की गयी सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस और पहाड़ के 2  बोर्डों के प्रतिनिधि ही उपस्थित थे जबकि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा,  कांग्रेस, वाममोर्चा और भाजपा ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बैठक के बाद  राज्य के गृह सचिव मलय दे ने कहा कि दार्जिलिंग के हालात सामान्य  करने के लिए आमने-सामने बैठकर बात की जा सकती है मगर जीजेएम की शर्तों के  सामने सरकार किसी भी हाल में अपना सिर नहीं झुकायेगी। ना ही सुरक्षा  व्यवस्था को लेकर कोई समझौता किया जाएगा। मलय दे ने कहा कि राज्य सरकार  द्वारा पहाड़ की स्थिति सामान्य करने के लिए सभी दलों के प्रतिनिधियों को  बुलाया गया था ताकि उनके सुझावों को सुन कर पहाड़ की स्थिति सामान्य करने  पर विचार किया जा सके। मलय दे ने कहा कि सभी लोग पहाड़ पर शांति चाहते हैं,  मगर शांति यहां तब तक बहाल नहीं हो सकती जब तक कि जीजेएम और अन्य  पार्टियां अपना अड़ियल रवैया बंद नहीं करतीं। उन्होंने कहा ​कि राज्य सरकार  का दायित्व बनता है कि वह राज्य में शांति बनाये रखे, इसके लिए पहाड़ पर  तब तक सुरक्षा बल तैनात रहेगी जब तक यहां हड़ताल वापस नहीं ली जाती। सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए शिक्षा मंत्री व तृणमूल के महासचिव पार्थ चटर्जी  ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर हाल में पहाड़ पर शांति स्थापित करना है।  पहाड़ पर शांति ही यहां के विकास का आधार है। सभी दलों को एक साथ बैठकर ही  अपनी समस्याएं एक दूसरे के सामने रखनी होंगी तभी इसका समाधान निकल सकता है।  उन्होंने कहा कि अगर सभी पार्टियां इसी तरह बैठक का बहिष्कार करती हैं तो  समस्या जस की तस बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ पर शांति के लिए पहाड़  के नेताओं को ज्यादा सचेष्ट होना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं  हुआ। पहाड़ पर अगर आंदोलन के नाम पर लोग अपने साथियों की हत्या कर राजनीति  करेंगे तो वहां हालात और बिगड़ेंगे। पहाड़ पर यही हो रहा है। पार्थ चटर्जी ने कहा कि जीजेएम आम जनता को खतरे में डाल रहा है। वह  ऐसा क्यों कर रहा है? जबकि बैठकर इस पर बात की जा सकती है। राज्य सरकार का  उद्देश्य पहाड़ का विकास करना है मगर जीजेएम यहां आंतक का माहौल बना रहा है  जिससे स्थितियां असामान्य हो रही हैं।
इधर सिलीगुड़ी के मेयर और माकपा नेता अशोक भट्टाचार्य ने  कहा कि सर्वदलीय बैठक के नाम पर दलीय बैठक की गयी है। मुख्यमंत्री पर  निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ही इस आंदोलन  को जन्म देकर पहाड़ का माहौल बिगाड़ दिया है तो अब शांति वार्ता में भी  उन्हें स्वयं शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बगैर मुख्यमंत्री सर्वदलीय बैठक बेमानी है।
इधर भाजपा नेता रथीन्द्र बोस ने कहा कि यहां त्रिपक्षीय बैठक की जरूरत है। हम इसके लिए तैयार हैं। अब राज्य सरकार को इसके लिए तैयार होना चाहिए।
इधर कांग्रेस के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष शंकर मालाकार  ने कहा कि यहां के मौजूदा हालात के लिए सिर्फ और सिर्फ तृणमूल कांग्रेस  जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री लगातार मोर्चा को उकसा रही हैं। आज जब सर्वदलीय  बैठक बुलायी गयी तो वह ही उसमें शामिल नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि बैठक  सिलीगुड़ी में नहीं दार्जिलिंग में बुलायी जानी चाहिए थी।

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