श्रमिकों की कमी की मार झेल सकता है थोक व्यापार

मधु सिंह,कोलकाता : श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत होने के साथ ही प्रवासी श्रमिकों ने अपने – अपने घरों में लौटना शुरू कर दिया है। कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने हर क्षेत्र के लोगों की कमर तोड़ दी है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में तो थोक मार्केट में सप्लाई को लेकर भी दिक्कतें होने लगी थी, लेकिन अब हालात सामान्य की ओर है। भले ही सप्लाई ठीक है, लेकिन अब माना जा रहा है कि अगर श्रमिकों का अपने घरों में लौटना इसी तरह जारी रहा तो फिर थोक व्यापार श्रमिकों की मार झेल सकता है।
क्या है दालपट्टी की हालत
श्री विष्णु दाल मिल्स एसोसिएशन (श्यामबाजार दालपट्टी) के महासचिव जयकिशोर अग्रवाल ने सन्मार्ग को बताया, ‘लॉकडाउन से ठीक पहले तक ऐसे ही 50 फीसदी श्रमिक चले गये थे। किसी तरह बाकी बचे 50 फीसदी श्रमिकों को भोजन आ​दि देकर रोककर रखा गया था, लेकिन श्रमिक स्पेशल चालू होने के बाद बचे हुए 50% में से भी 25% श्रमिक अपने घर चले गये हैं। अब हालत ऐसी है कि बचे हुए इन न्यूनतम श्रमिकों के साथ किसी तरह काम चलाया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि अब बचे हुए श्रमिक जाने के मूड में नहीं हैं क्योंकि जाते ही उन्हें बॉर्डर इलाकों में पहले 14 दिनों के क्वारंटाइन में भेज दिया जा रहा है। ऐसे में श्रमिकों का कहना है कि अब यही रहेंगे, कम से कम कुछ रुपये की कमाई तो होगी। अगर श्रमिक ही नहीं रहेंगे तो भला काम कैसे होगा। दालपट्टी के केवल 2 नं. गेट में लगभग 22 दाल मिले हैं जिनमें से केवल 2 ही चल रही हैं।
दालपट्टी में श्रमिकों की संख्या
पहले कुल श्रमिक थे – लगभग 3,500। इनमें से अब केवल 25% श्रमिक ही बचे हुए हैं। यहां अधिकतर श्रमिक यूपी, बिहार और ओडिशा के हैं। दालपट्टी में कुल 250 दाल मिलें हैं।
कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अगले सप्ताह से शुरू हो सकता है श्रमिकों का आना
कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 98% श्रमिक बंगाल के ही हैं। इनमें मुख्यतः मुर्शिदाबाद, मिदनापुर, बीरभूम, बांकुड़ा जिलों के श्रमिक हैं। अगले सप्ताह यानी सोमवार से जिलों की बसें शुरू होने पर ये श्रमिक कंस्ट्रक्शन साइट्स पर वापस लौटेंगे। क्रेडाई बंगाल के अध्यक्ष और मर्लिन ग्रुप के चेयरमैन सुशील मोहता ने कहा, श्रमिकों के लिए मास्क आदि की व्यवस्था की गई है। बात करें लंबित पड़ी परियोजनाओं की तो लगभग 1 करोड़ स्क्वायर फीट के फ्लैट्स अभी अंडर कंस्ट्रक्शन हैं। सुशील मोहता ने कहा, श्रमिकों के लिए मास्क आदि की व्यवस्था की गई है। बात करें लंबित पड़ी परियोजनाओं की तो लगभग 1 करोड़ स्क्वायर फीट के फ्लैट्स अभी अंडर कंस्ट्रक्शन हैं।
पोस्ता में अगले सप्ताह से हो सकती है समस्या
पोस्ता बाजार मर्चेंट्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष चंदन चक्रवर्ती ने आशंका जतायी कि अगले सप्ताह से अधिकतर दुकानदार दुकानें खोलने की योजना में हैं। ऐसे में हो सकता है कि अगले सप्ताह से पोस्ता बाजार में श्रमिकों की कमी की मार झेलनी पड़े। उन्होंने कहा, ‘पोस्ता में वर्तमान में मौजूद श्रमिकों को मेरे कार्यालय से ही रोज भोजन दिया जाता है। इसके अलावा श्रमिकों से शिफ्ट के तौर पर काम करवाया जा रहा है क्योंकि कई दुकानें अभी नहीं खुली हैं। फिलहाल प्रत्येक सामग्रियों की 4-5 दुकानें ही खोली जा रही हैं। अभी शनिवार की रात तक सोमवार का ऑर्डर मिल जा रहा है। ऐसे में सुबह 5 बजे से ही गाड़ियों का आना शुरू हो जा रहा है और 8-9 बजे तक 50-60 गाड़ियां लोड होकर निकल जा रही हैं। हालांकि अम्फान के कारण तेल टैंकों और दाल की बोरियों में पानी घुस जाने से व्यवसायियों को लाखाें का नुकसान हुआ है। अब व्यवसायी सोमवार से अपनी दुकानें खोलना चाह रहे हैं। ऐसे में सोमवार से अधिक दुकानें खुलेंगी और अगर ऐसा होता है तो श्रमिकों का संकट तो बढ़ेगा ही।’पोस्ता में श्रमिकों की संख्या हजार से आयी सैकड़ों मेंn लॉकडाउन से पहले पोस्ता में श्रमिकों की संख्या – 8500n वर्तमान में श्रमिकों की संख्या – 290n पोस्ता में अधिकतर श्रमिक यूपी, बिहार, ओडिशा और कुछ राज्य के ही मिदनापुर व बर्दवान जिलों के हैं। मौजूदा श्रमिकों को दुगुने रुपये देकर काम करवाया जा रहा है। अगर और श्रमिक अपने घर लौटे तो काफी अधिक समस्या यहां होगी। अभी राजाकटरा, नगीनाकटरा, पीतलपट्टी जैसी दुकानें तो खुली ही नहीं हैं। अगर ये सब भी खुलते हैं तो समस्या बढ़ेगी।

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