शादियां तो होंगी पर बिना बैंड बाजा बारात के

कार्ड वालों का हाथ सर पर, बाजा वालों का बजा बैंड
सविता राय, कोलकाता : शादी यानी मेहंदी, शहनाई, शॉपिंग से लेकर बैंड बाजा बारात तक। वो ताम झाम वो रोनक। मगर कोरोना काल ने इन सभी पर पानी फेर दिया। शादियों की रोनक शादगी में बदल गयी। बैंड, बाजा, बारात की जगह सोशल डिस्टेंसिंग ने ले ली है। हालांकि पहले भी लोग शादगी के साथ शादी करने पर जोर देते थे मगर कोरोना अब ऐसा करने के लिए लोगों को बाध्य कर दिया। शादियां तो हो रही है मगर पहले वाले उत्साह के साथ नहीं। सात जनम तक एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें अब आलीशान बैंक्वेट हॉल या मैरिज गार्डन में नहीं बल्कि घर की छतों, घरों, मंदिर, चर्च तक सिमट गयी। दरअसल सरकार ने महामारी को देखते हुए शादी में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखने का निर्देश दिया है। घराती बराती मिलाकर करीब 50 लोग ही शामिल हो सकते है। यानी वर पक्ष और वधु पक्ष दोनों की तरफ से कुल 50 लोग ही शादी में शामिल हो। एक ओर जहां सरकार के इस निर्देश के बाद कई जोड़ो का मन खट्टा हुआ है, कई इसे सही भी मान रहे है। दूसरी ओर शादी सामारोह से जुड़े व्यवसाय वालों की कमर टूट रही है। कार्ड, बैंड, डेकोरेटर, हॉल बुक से लेकर कैटरर तक मंडी की दौड़ से गुजर रहे हैं। अब हर कोई आस लगाया है कि नवंबर – दिसंबर तक स्थिति सामान्य हो।
कईयों ने फिलहाल टाल दी शादी
शादी समारोह की इस शादगी काे देखते हुए कई जोड़ों ने या तो शादी टाल दी है। आईटी फार्म में काम करने वाले गोविंद की शादी मई में होनी थी। घर का बड़ा लड़का होने के कारण शादी धूमधाम से करने की इच्छा थी। महामारी कानून के नियमों को ध्यान में रखते हुए गोविंद के परिवार ने दिसंबर में अब शादी करने का फैसला लिया है। उन्हें उम्मीद है कि तब तक स्थिति सामान्य हो जाए।
कार्ड वालों का हाल बेहाल
एमजी रोड से लेकर सियालदह तक शादी के कार्ड की दुकाने हैं। लॉकडाउन में तो इन दुकानों में ताला जरा ही था, अनलॉक 1 में एकाध दुकानें ही खुली। 35 सालों से शादी का कार्ड बेचने वाले समर दत्त ने बताया कि मार्च तक ठीक ठाक ऑर्डर मिले थे। फरवरी में 15 ऑर्डर थे। अप्रैल से लेकर जून तक कोई ऑर्डर नहीं मिला है। अब लगता नहीं है कि इस साल कुछ हो पायेगा। एक अन्य दुकानदार एम.के. दास ने कहा कि जैसा कि शादी में 50 से ज्यादा लोगों को आमंत्रित नहीं किया जा सकता है। हमें लग रहा है कि अगर ऑर्डर मिलते भी हैं तो 50 कार्ड से ज्यादा का नहीं होगा। अरित्र घोष ने बताया कि अगले महीने में एक शादी के लिए ऑर्डर मिला है। मार्च के बाद यह पहला ऑर्डर है।
बैंड वालों की नहीं बज रही बैंड, डेकोरेटर्स भी चिंता में
सरकार ने शादी में शामिल होने वाले लोगाें की संख्या निर्धारित कर दी है। अगर परिवार बड़ा हो तो पूरे सदस्य भी शादी में नहीं शामिल हो सकते हैं। अब ऐसी स्थिति में बैंड वालों को कौन बुलाए। 30 सालों से बैंड बाजा के कारोबार से जुड़े मो. जाहिद ने बताया कि पिछले कई महीनों से हमें कोई बुकिंग नहीं मिली है। जो स्थिति है उसे देखकर आगे क्या होगा अभी यह कहना मुश्किल है।
हमारे अधिकांश बैंड बजाने वाले गांव चले गये। जब शादी का बजट कम हो गया है, लोग कम हो गये हैं तो सजावट को कौन पूछता है। यही कहना है डेकोरेटर के काम से जुड़े मुकेश और अन्य का।
पंडितों ने भी रखी शर्त
सालों से शादी करवाते आए एक पंडित रामानंद पाठक ने कहा कि जून, जुलाई से लेकर अाने वाले महीनों में लगन तो है मगर हमलोगों ने भी शर्ते रखी है। शादी के दौरान केवल दो पंडित, वर वधु ही होंगे। शादी की विधि के समय घरवारों को एक एक करके ही बुलाया जाएगा।

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