पंकज उधास की गजलों ने खूब झुमाया

कोलकाता : सत्यनारायण पार्क एसी मार्केट ने फागुन के स्वागत में साइंस सिटी सभागार में ‘एक शाम पंकज उधास के नाम’ का आयोजन किया जिसमें गजलों की रूमानियत और रूहानियत का पुरअसर अंदाज देखने को मिला। वर्षों से लोगों की जुबान पर छाए गजलों का वह गुलदस्ता जब एक-एक कर स्वरलहरी के उत्तम-मध्यम तान की शक्ल में उभरा तो गजलप्रेमियों के दिलो-दिमाग पर नशा तारी हो गया। गजलगोई के उस्ताद की संगत में पूरा सभागार राग-रंग-रस से सराबोर हो उठा। अपने जमाने के सुपरहिट गजलों की प्रस्तुतीकरण के दरम्यान पंकज उधास ने लोगों की रूचि के अनुरूप वो तमाम गजलें गाईं जिनके लिए उनकी ख्याति रही है। आप जिनके करीब होते हैं, वो बड़ें खुशनसीब होते हैं, सबको मालूम है मैं शराबी नहीं, फिर भी कोई पिलाये तो मैं क्या करू, जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके, दुख-सुख था सबका एक सा अपना हो या बेगाना, एक वो भी था जमाना, एक ये भी है जमाना, चिट्ठी आई है, चांदी जैसा ऱग है तेरा, सोने जैसे बाल, से लेकर और भी बहुत सी गजलें और नज्में जिनका जिक्र होते ही उनका ख्याल हो आता है। इस मौके सत्यनारायण पार्क एसी मार्केट में पूजा ओर दीवाली के दौरान ग्राहकों के लिए किये गये लाटरी के विजेता को पुरस्कृत भी किया गया। मार्केट के संचालक पवन काजरिया ने कहा 350 दुकानदारों का आशियाना निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढे उनका लक्ष्य उसी का बेहतर इंतजाम करना है। इस आयोजन को सफल बनाने में महेश कंदोई, अजय.मिमानी, तिलोक मूंधड़ा, राजेश आर्या, प्रतीक टांटिया, प्रकाश काबरा, अशोक अग्रवाल आदि सक्रिय रहे।

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