लॉकडाउन ने कर्मचारी को बनाया मजदूर

सन्मार्ग संवाददाता,कोलकाता : लॉकडाउन से लेकर अब अनलॉक 1 के बीच देश भर में बेरोजगारी सीधे तौर पर बढ़ी है, लेकिन उसे घुमा कर देखा जाए तो यह पता चलता है कि पहले जो कर्मचारी थे, अब वे श्रमिकों के रूप में काम ढूंढ रहे हैं। लॉकडाउन के कारण देश भर में लगभग 30% छंटनी हुई। लॉकडाउन ने इन्हें बेरोजगार बनाया। यूं तो यह बड़ा आंकड़ा है, लेकिन यह कर्मचारी ही अब मजदूर बन गये हैं और मजदूरी की तलाश में दौड़ रहे हैं। आंकड़ों को जितना घुमाया जाए, लेकिन ये बिल्कुल सही है कि बेरोजगारी बढ़ी है। 100 दिन रोजगार योजना में भी धक्का-मुक्की होगी। लाखों की संख्या में जो लोग बाहर से आये हैं, उन्हें भी रोजगार चाहिए। हालांकि सवाल यह भी है कि अगर पश्चिम बंगाल में रोजगार होता तो ये लोग भला बाहर क्यों जाते ?
मई महीने में 2 करोड़ रोजगार
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया कि लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी दर काफी अधिक हुई है, मई महीने तक देश में बेरोजगारी दर 23.5% हो गयी है। हालांकि इस दौरान श्रम बाजार की स्थिति में सुधार आया है। श्रम भागीदारी दर और रोजगार दर में भी बढ़ोतरी हुई है। मई महीने में देश में कुल 2 करोड़ 10 लाख लोगों को रोजगार मिला।
बेरोजगारी दर समान, बढ़ी श्रम भागीदारी दर
अप्रैल की तरह मई महीने में भी बेरोजगारी दर 23.5% रही, लेकिन श्रम भागीदारी दर 35.6% से बढ़कर 38.2% पर पहुंच गयी है। इसके साथ ही रोजगार दर भी 27.2% से बढ़कर 29.2% पर पहुंच गया है। अप्रैल की तुलना में भले ही मई महीने में श्रम बाजार की स्थिति में काफी सुधार आया है, लेकिन अगर लॉकडाउन के पहले वाली स्थि​ति से तुलना की जाए तो अब भी श्रम बाजार की स्थिति काफी कमजोर है।
10 करोड़ लाेग अब भी हैं बेरोजगार
सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 में औसतन नौकरी में नियुक्त 40 करोड़ 40 लाख लाेगों की तुलना में मई 2020 में 30 करोड़ 30 लाख लोगों को रोजगार मिला। यानी 2019 -20 की तुलना में अब भी 10 करोड़ 10 लाख लोग बेरोजगार हैं। हालांकि गत अप्रैल महीने की तुलना में मई में स्थिति सुधरी है। उस समय रोजगार 28 करोड़ 20 लाख लोगों पर पहुंच गया था यानी 2019-20 की तुलना में 12.2 करोड़ लाेगों ने रोजगार खोया था।
लेबर फोर्स एक्टिव होने से बढ़ी रोजगार दर
अप्रैल में एक्टिव लेबर मार्केट छोड़ने वाले मई महीने में वापस आये। बड़े पैमाने पर रोजगार जाने के भय से जिन लोगों ने अप्रैल में लेबर मार्केट छोड़ दिया था, उन्होंने खुद को बेरोजगार की कैटेगरी में डाल लिया। ऐसे लोगों ने खुद को बेरोजगार और काम करने के इच्छुक बताया लेकिन ये लोग सक्रिय तौर पर नौकरी नहीं ढूंढ रहे हैं। वहीं मई महीने में इनमें से कई वापस आये और सक्रिय होकर काम ढूंढने लगे। इसी के कारण मई महीने में रोजगार कुछ बढ़ा।
छोटे व्यवसायियों और श्रमिकों का रोजगार बढ़ा
मई महीने में जिन 2 करोड़ 10 लाख लाेगों को रोजगार मिला, उनमें से 1 करोड़ 44 लाख लोग छोटे व्यवसायी और दिहाड़ी मजदूर हैं। लॉकडाउन की चपेट में यह वर्ग सबसे अधिक आया है। कुल रोजगार वाली जनसंख्या का एक तिहाई केवल यह वर्ग है। अप्रैल में इस वर्ग के 71% लोगों का रोजगार छिन गया था। हालांकि अब अर्थव्यवस्था पटरी पर आने के साथ – साथ ये वर्ग भी काम पर लौट रहा है। छोटे व्यवसायियों और दिहाड़ी मजदूरों के रोजगार में 39% की वृद्धि हुई है। वहीं व्यवसायिक व्यक्तियों का काम 9.3% बढ़ा है। अप्रैल में रोजगार छिनने वाले 1 करोड़ 82 लाख लोगों में से 55 लाख लोग अपने काम में वापस आ गये हैं। वहीं फार्म सेक्टर में रोजगार 1.2% बढ़ा है।
वेतनभोगी कर्मचारियों के रोजगार में नहीं हुई वृद्धि
मई महीने में वेतनभोगी कर्मचारियों के रोजगार में वृद्धि नहीं हुई । वेतनभोगियों के रोजगार में अप्रैल की तुलना में मई महीने में कमी आयी है। अप्रैल में 6.84 करोड़ रोजगार था जो मई में कम हाेकर 6.83 करोड़ पर पहुंच गया। सर्वे में कहा गया कि वेतनभोगी नौकरी पाना काफी मुश्किल हो गया है और लॉकडाउन के बाद भी जिनकी नौकरियां गयी हैं, उन्हें फिर रिकवर करना भी अत्यंत मुश्किल होगा।

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