राहुल, ममता ने की मोदी से इस्तीफे की मांग

 विपक्षी ‘मोर्चे’ में नहीं आये वामदल, सपा, बसपा, जदयू 

नयी दिल्ली : कांग्रेस के नेतृत्व में आठ विपक्षी दलों ने नोटबंदी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी फैसला करार देते हुए कहा है कि सरकार इसके लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही है और प्रधानमंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।

कांग्रेस के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, द्रमुक, झारखंड मुक्ति मोर्चा, जनता दल (सेकुलर), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग तथा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेताओं ने की बैठक के बाद नेताओं ने मोदी पर लगे ‘निजी भ्रष्टाचार’ के आरोपों की जांच कराने की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री पद की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस मामले की ‘स्वतंत्र एवं निष्पक्ष’ जांच कराने की जरूरत है। उन्होंने नोटबंदी को विफल करार देते हए कहा कि 50 दिन में स्थिति सामान्य नहीं होने पर प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में विपक्षी एकजुटता को आगे भी दर्शाने की पहल के तहत कांग्रेस ने यह बैठक बुलायी थी जहां ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करके बाज़ी मार ली। राहुल गांधी ने खुद तो प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं की लेकिन जब उनसे ममता बनर्जी द्वारा प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने के बारे में बार बार पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह उनका (ममता का) सुझाव है और वे सुझाव का समर्थन करते हैं।

राहुल और ममता बनर्जी ने साझा प्रेस कांफ्रेंस में इस मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता पर जोर देते हुए ‘साझा न्यूनतम एजेंडा’ पर सहमति की बात कही और वामदलों, जनता दल (यूनाइटेड)-जदयू-, समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसे दलों के नेताओं की अनुपस्थिति को कमतर करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री ने निजी स्तर पर देश की जनता को नोटबंदी का झटका दिया जिसके बारे में उनके मुख्य आर्थिक सलाहकार, मंत्रिमंडल को पता नहीं था। यह दुनिया में इतिहास का सबसे बड़ा अचानक किया गया वित्तीय प्रयोग है जिसका नुकसान गरीबों, मजदूरों, किसानों को उठाना पड़ा है। अगर प्रधानमंत्री अकेले और कोई नीति बनाते हैं तो देश को बताये कि इसका उद्देश्य क्या है। प्रधानमंत्री ने 50 दिन का समय मांगा था और कहा था कि सब कुछ ठीक हो जायेगा लेकिन 47 दिन बाद भी स्थिति ज्यों की ज्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी सभी बातों पर बोलते हैं लेकिन जिस मामले में उनकी ईमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं, उसपर वे चुप हैं।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पर प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने अच्छे दिन लाने की बात कही थी लेकिन बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो गयी है, किसान, मजदूर, गरीब परेशान हैं। छोटे उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं। गरीब लोगों से पैसे लूट कर एनपीए को लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के कैशलेस अर्थव्यवस्था को अपनाने के सुझाव पर तीखा प्रहार करते हुए बनर्जी ने कहा कि अमरीका, जर्मनी में नकदी व्यवस्था चल रही है, कैश चल रहा है लेकिन भारत में मोदी सरकार कैशलेस के नाम पर ‘फेसलेस’ हो गयी है और वह ‘बेसलेस’ भी हो गयी है।

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