राज्य सरकार अपने ही लोगों को बुलाने में नहीं ले रही है दिलचस्पी : सीतारमण

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कोलकाता : अपने ही लोगों को अपने राज्य में वापस बुलाने में तृणमूल सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं है। रविवार को भाजपा की वर्चुअल सभा के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर तृणमूल सरकार को घेरते हुए कहा कि 27 जून तक केवल 282 ट्रेनें ही बंगाल के लिए चलाई गई हैं। सभी राज्य सरकारों ने प्रवासी श्रमिकों को बुलाने के लिए रेलवे के साथ लगातार संपर्क रखा। यूपी और अन्य राज्यों ने जहां 50-100 ट्रेनें मंगाई तो वहीं बंगाल ने 1 से 7 तो कभी 10 ट्रेनें ही मंगाई। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को कोरोना एक्सप्रेस कहना काफी अपमानजनक है। ये लोग रोजगार के लिए बाहरी राज्यों में गए थे जो अब अपने घर लौटना चाहते हैं लेकिन ममता दीदी कहती हैं कि सभी कोरोना मरीज ट्रेनों में आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण ने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों के लिए क्वारंटाइन की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
ममता दीदी वन नेशन वन राशन का किया विरोध
प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी केंद्र सरकार की गरीब कल्याण रोजगार योजना का लाभ बंगाल के श्रमिकों को नहीं मिल रहा है। इस पर सीतारमण ने कहा कि बंगाल की ओर से प्रवासी श्रमिकों का कोई आंकड़ा ही केंद्र को नहीं भेजा गया जिस कारण 50 हजार करोड़ रुपए की इस योजना का लाभ बंगाल के एक भी श्रमिक को नहीं मिल पा रहा है। वहीं राशन दुर्नीति पर भी सीतारमण ने तृणमूल सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि मार्च महीने से ही केंद्र सरकार राशन कार्ड धारकों को 5 किलो चावल और 1 किलो चना दाल 3 महीने के लिए मुफ्त में दिया मगर बंगाल में इस पर भी गड़बड़ी हुई। जिन लोगों के पास राशन कार्ड हो या ना हो, लेकिन तृणमूल के नाम का कूपन था, उन्हें ही राशन दिया गया। शायद इसलिए ममता दीदी वन नेशन वन राशन का भी विरोध कर रही हैं क्योंकि इसमें उनका कूपन सिस्टम नहीं चलेगा।
केंद्र के भेजे रुपए का क्या हुआ
कोरोना वायरस पर सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 10,106 करोड़ रुपए बंगाल को कोरोना से लड़ने के लिए भेजे मगर वहां के मेडिकल प्रोफेशनल्स कहते हैं कि उनके पास पर्याप्त पी पी ई किट भी नहीं है। ऐसे में केंद्र के भेजे रुपए का क्या हुआ। कोविड अस्पताल भी राज्य में पर्याप्त नहीं है जबकि सीएम बार-बार 42 सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का दावा करती हैं। इसके अलावा केंद्र ने जब कोरोना वॉरियर्स के लिए 50 लाख रुपए की बीमा योजना की घोषणा की तो बंगाल ने इसमें भी भाग नहीं लिया। इसके अलावा कोरोना की स्थिति देखने आयी केंद्रीय टीम का भी विरोध किया गया जबकि वह टीम राज्य के लिए ही आई थी।
महाचक्रवात से चेतावनी के बावजूद तैयार नहीं था बंगाल
महाचक्रवात अम्फान का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 11 दिन पहले सचेत किए जाने के बावजूद तूफान के लिए बंगाल तैयार नहीं था। तूफान के 36 घंटे के अंदर पीएम ने 1000 करोड़ रुपए भिजवाए मगर वह कहां और कैसे बांटा गया इसका भी पता नहीं चल पाया। कोलकाता निगम, इलेक्ट्रिसिटी कंपनी और डिजास्टर मैनेजमेंट में कोई तालमेल नहीं रहने के कारण लगभग 6 दिनों तक कोलकाता के कई हिस्सों में बिजली और पानी नहीं थी। दक्षिण कोलकाता की हालात तो और खराब थी। इसके अलावा कई लोग बिजली लगने से मर गए जबकि पहले से एहतियातन कदम उठाए जाते तो उनका जीवन बचाया जा सकता था।
कानून व्यवस्था ठीक होने पर ही निवेशक बंगाल आएंगे
बंगाल में उद्योग को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगर हिंसा का माहौल इसी तरह कायम रहेगा तो कोई यहां निवेश करने नहीं आएगा। कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक हुई तो निवेशक जरूर बंगाल में आएंगे। हालांकि फिलहाल जिस तरह आतंक का माहौल है, उससे निवेशक डरे हुए हैं। निर्मला सीतारमण ने कहा कि ममता दीदी हर बात में केंद्र का केवल विरोध करती अाई हैं। इसके लिए उन्होंने कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 का ममता दीदी ने विरोध किया जबकि यह जम्मू के महिलाओं के हक को छीन रहा था। हमने अपने संकल्प निभाया और इसे हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा किया।

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