बंगाल में कोरोना की टेस्टिंग हुई धीमी, संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार

कोलकाता : कोलकाता समेत राज्य भर में कोरोना के मामलों की संख्या पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ती जा रही है। पूरे राज्य में 25 हजार का आंकड़ा कोरोना के मामले ने पार कर लिया है। वहीं कोरोना के टेस्टिंग की बात करें तो उसकी रफ्तार का ग्राफ पिछले 1 सप्ताह से लगातार गिरता नजर आ रहा है। जब की स्थिति इसके उलट होनी चाहिए थी, यानी कोरोना की टेस्टिंग और तेजी से होनी चाहिए ताकि इसकी चैन को तोड़ने में मुश्किल ना हो।
दो तरीकों से किया जा रहा कोरोना का टेस्ट
जानकारी के अनुसार, राज्य भर में दो तरीके से कोरोना का टेस्ट किया जा रहा है। पहला तरीका आरटीपीसीआर हैं जो के राज्य स्तर पर हो रहा है। जिले में इस टेस्टिंग की मदद ली जा रही है। दूसरा तरीका रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट हैं जो ज्यादातर कोलकाता में हो रहा है। कोलकाता नगर निगम की तरफ से यह टेस्ट शुरू किया है मगर इन दोनों ही टेस्टिंग की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ी हुई है।
एंटीजन टेस्ट प्रक्रिया का अभी भी इंतजार
कोरोना के टेस्ट में एंटीजन टेस्ट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोरोना के टेस्टिंग की स्पीड बढ़ती है। इसे हाल ही में दिल्ली में भी चालू किया गया है। कोलकाता की बात करें तो यहां इसके शुरुआत की बात हो रही है मगर अब तक किन्ही कारणों की वजह से इसे चालू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों की माने तो एंटीजेंस टेस्ट शुरू किया जाता है तो कोरोना के ज्यादा से ज्यादा मरीजों को समय रहते पकड़ा जा सकता है। विशेषज्ञ ने बताया कि आरटी पीसीआर टेस्ट में रिपोर्ट आने में 24 घंटे से अधिक का वक्त लगता है जबकि एंटीजन टेस्ट में रिपोर्ट कुछ मिनटों में ही आ जाती है ऐसी स्थिति में कोरोना का संदिग्ध मरीज करीब 1 दिन तक अस्पताल नहीं पहुंचता है, जिसके कारण संक्रमण फैलने की आशंका अधिक होती है।
कोरोना के संक्रमण ने कोलकाता को चारों तरफ से घेरा
सरकारी आंकड़ों को देखें तो कोरोना ने कोलकाता को चारों तरफ से घेरा है। यानी कोरोना के अधिक मामले कोलकाता (8368) के बाद उत्तर 24 परगना (4617), दक्षिण 24 परगना (1814) और हावड़ा (3565) में पाए जा रहे हैं। यह तीनों ही जिले कोलकाता से सटे हुए हैं। जिनसे होकर लोगों का आना जाना होता है। इन तीनों जिलों में टेस्टिंग अगर कम होती है तो कोरोना की चेन कमजोर करने के लिए लगा यह लॉकडाउन भी कारगर नहीं होगा।
टेस्टिंग में तेजी नहीं लाई गई तो बुरा होगा परिणाम
कोरोना की टेस्टिंग को लेकर बाकी राज्यों में जिस तरह से तेजी दिखाई जा रही है, नए-नए उपाय किए जा रहे हैं। वैसा अगर पश्चिम बंगाल में नहीं किया गया तो शायद स्थिति बद से बदतर हो सकती है। अभी बढ़ते मामलों को देखते हुए कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन लगाया गया है। हालांकि कंटेनमेंट जोन की संख्या अति सीमित है। बावजूद इसके अगर नॉन कंटेनमेंट जोन में भी टेस्टिंग को लेकर लापरवाही बरती गई तो परिणाम बुरा हो सकता है। इसके लिए प्रशासन को अपने काम में तेजी लाने के साथ ही साथ आम जनता को भी आगे बढ़कर कोरोना की इस जंग में शामिल होना होगा। सरकारी नियमों को मानना होगा और कोरोना का अगर उनमें लक्षण है तो टेस्टिंग के लिए खुद आगे बढ़ना होगा। अन्यथा ऊपर दिए गए आंकड़े साफ दिखा रहे हैं कि जिस कोरोना का ग्राफ गिरना चाहिए वह बढ़ रहा है, जो एक खतरे की घंटी है।

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