रणक्षेत्र बना बनगांव, बमबाजी से दहला इलाका

कोलकाता : बनगांव नगरपालिका में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पूरा क्षेत्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। तोड़फोड़, लाठीचार्ज और बमबाजी से पूरा इलाका दहल गया। रैफ के सामने ही बमबाजी हुई। आरोप है कि पुलिस इन सबके बीच तमाशा देखती रही। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद पार्षदों को गेट पर ही​ रोक दिया गया, परंतु बाद में अन्हें भतीर जाने दिया गया। तृणमूल और भाजपा दोनों ही ओर से नगरपालिका में बोर्ड गठन का दावा किया गया।
कुछ इस तरह हुई गड़बड़ी की शुरुआत
दरअसल, बनगांव नगरपालिका में कुल 22 वार्ड हैं। इनमें से 20 पार्षद तृणमूल, एक माकपा और एक कांग्रेस के हैं। कुछ समय पहले 14 पार्षदों ने तृणमूल छाेड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। इनमें से 3 पार्षद पुनः तृणमूल में लौट गये थे। इसके बाद नये समीकरणों के तहत नगरपालिका में भाजपा के 11, तृणमूल के 9, कांग्रेस के 1 और माकपा के 1 पार्षद बचे। ऐसी स्थि​ति में नगरपालिका के चेयरमैन शंकर आड्या के खिलाफ भाजपा के पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव जमा दिया था। आरोप है कि अविश्वास प्रस्ताव जमा करने के बावजूद प्रशासन ने बोर्ड गठन को लेकर कोई तत्परता नहीं दिखायी। इसे लेकर 3 पार्षदों ने कोलकाता हाई कोर्ट में मामला किया। गत 11 जुलाई को हाई काेर्ट ने निर्देश दिया था कि 72 घण्टों के अंदर बनगांव नगरपालिका में अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। ऐसे में 16 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव लाने का दिन तय किया गया। इधर, भाजपा में शामिल 2 पार्षदों के खिलाफ गैर जमानती धारा के तहत एक मामला दायर किया गया था। इसे लेकर गत सोमवार को अग्रिम जमानत की याचिका के साथ हिमाद्री मण्डल और कार्तिक मण्डल नामक दोनों पार्षदों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इधर, मंगलवार को हाई कोर्ट की ओर से निर्देश दिया गया कि उक्त पार्षदों को एक सप्ताह तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। इस निर्देश के बाद उक्त पार्षद बनगांव नगरपालिका में वोट देने आये, लेकिन दोनों के खिलाफ मामला चलने के कारण उन्हें पुलिस ने नगरपालिका में घुसने नहीं दिया । इसे लेकर ही पुलिस और भाजपा पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की की शुरुआत हुई। पुलिस ने इस दौरान कहा कि एक घण्टे के अंदर हाई कोर्ट के निर्देश की हार्ड कॉपी लानी होगी और ह्वाट्स ऐप पर भेजे गये किसी दस्तावेज को मान्यता नहीं दी जाएगी। बाद में आदेश की हार्ड कॉपी लायी गयी तब जाकर दोनों भीतर घुस पाये। इधर, तृणमूल और भाजपा के बीच शुरू हुई झड़प ने संघर्ष का रूप ले लिया। मतदान की प्रक्रिया खत्म होने के बाद तो बमबाजी तक हुई। भीड़ को तितर – बितर करने के लिए पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया।

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