यह गणतंत्र के लिए बड़ा ही खतरनाक है – हाई कोर्ट

बनगांव अविश्वास प्रस्ताव प्रकरण पर जज ने जमकर लताड़ा
कहा – कुर्सी से इतना मोह क्याें ? शर्म नहीं आती आपको ?
फिर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराएं, जो किया है उसे भुगतना पड़ेगा
सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बनगांव नगरपालिका में अविश्वास प्रस्ताव प्रकरण पर शुक्रवार को कोलकाता हाई कोर्ट की जस्टिस समाप्ति चटर्जी ने राज्य सरकार और बनगांव नगरपालिका के चेयरमैन को जमकर लताड़ा। एक के बाद एक कड़े शब्दों के माध्यम से राज्य सरकार और चेयरमैन शंकर आट्ट की जज ने काफी भर्त्सना की। बनगांव नगरपालिका के चेयरमैन से जस्टिस समाप्ति चटर्जी ने कहा, ‘आपके साथ पार्षद नहीं हैं, बहुमत आपके पास नहीं है, फिर भी आप कुर्सी का मोह नहीं छोड़ रहे हैं। आप इतने निर्लज्ज क्यों हैं ?’ प्राथमिक तौर पर पुनः अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने की बात भी जज ने कही।
गत 16 ​जुलाई को बनगांव नगरपालिका में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना था, लेकिन आरोप है कि इस दिन भाजपा के पार्षदों को मतदान में शामिल ही नहीं होने दिया गया। इसके बाद तृणमूल और भाजपा दोनाें ने ही दावा किया कि नगरपालिका का बोर्ड उनके साथ है। इसे लेकर ही भाजपा ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। शुक्रवार को उस मामले की सुनवायी करते हुए जस्टिस समाप्ति चटर्जी ने राज्य सरकार और बनगांव नगरपालिका के चेयरमैन की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा, ‘आ​खिर आप चेयर पकड़ कर क्यों बैठे हुए हैं ? जब बहुमत आपके साथ नहीं है तो आपको इसका फल भुगतना पड़ेगा। क्यों पद पकड़कर बैठे हैं, क्या यही गणतंत्र का हाल है ? आप क्या इतने निर्लज्ज हैं ?’ जज ने कहा, ‘बनगांव नगरपालिका के चेयरमैन बहुत ज्यादा प्रभावशाली हैं। उन्होंने पार्षदों को पालिका के अंदर जाने से रोक दिया। बनगांव में जो कुछ हुआ, वह गणतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।’ जज ने कहा, ‘प्राथमिक तौर पर ऐसा लग रहा है कि फिर अविश्वास प्रस्ताव पर वोट की आवश्यकता है।’ न्यायाधीश ने जिले के एसपी, डीएम अथवा एसडीओ की मौजूदगी में मतदान कराने की बात भी कही। जज समाप्ति चटर्जी ने कहा कि इसके बावजूद अगर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान कोई गड़बड़ी हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी डीएम, एसडीओ व एसपी की होगी। अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार पर अदालत इतनी खफा थी कि उन्होंने अपनी बातों से ही सब कुछ समझा दिया। यहां तक कि राज्य सरकार के एडवोकेटों द्वारा ए​​ग्जिक्यूटिव ऑफिसर के हस्ताक्षर किये गए अविश्वास प्रस्ताव के दस्तावेज दिखाने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। जज ने सवाल किया कि एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के दस्तावेज क्या गीता है ? उनसे जबरन हस्ताक्षर नहीं कराया गया है, इसका क्या सबूत है ? भाजपा जज की इन बातों को अपनी नैतिक जीत मान रही है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पिटिशनरों की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘आपकाे मौका दिया था, लेकिन सरकार गलती करती है तो कोर्ट को ही उसमें संशोधन करना पड़ेगा। ऐसा नहीं होने पर गणतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह बिखर जाएगी।’

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