मेरे कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की को​शिश न करें – धनखड़

कोलकाता : राज्यपाल जगदीप धनखड़ और तृणमूल सरकार के बीच संबंधों में मंगलवार को और खटास आ गयी जब उन्होंने ‘कछुए की गति से काम करने’ तथा लंबित विधेयकों पर उनके प्रश्नों का समय से उत्तर नहीं देने के आरोप को लेकर आमने – सामने आ गये। राज्यपाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा ‘मैं देश के संविधान के अनुसार काम करूंगा। यदि सरकार मेरे प्रश्नों का उत्तर देने में कछुए की गति से बढ़ती है, बैलगाड़ी की तरह काम करती है तो यह मेरी गलती नहीं है। मगरमच्छ की आंसू बहाने वाले के गेम को सफल नहीं होने दूंगा। डर्टी पॉलिटिक्स के लिए मेरे कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कोशिश होगी तो यह गेम सफल नहीं होने दूंगा। यहां उल्टा चोर कोतवाल काे डांटे।
विधेयकों की मंजूरी के संबंध पर उन्होंने कहा कि 25 से 29 नवंबर तक क्यों नहीं उनके कान में जूं रेंगी? अब मुझे दोषी ठहराकर सरकार अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती। मुझे पॉलिटिक्स में न घसीटा जाए।’ जगदीप धनखड़ ने कहा कि अगर मैं एक्सेसिबल हूं तो इसका मतलब यह नहीं है कि अाप मुझे कमजोर सम​झें। कहीं आपने देखा है कि राज्यपाल के लिए विधानसभा का गेट बंद हो मगर बंगाल में ऐसा हुआ और इतिहास कलंकित हो गया। मेरा दिल यह सब देखकर रोता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के सभी सदस्यों को जानकारी होनी चाहिए कि वास्तव स्थिति क्या है। उन्होंने कहा कि मैं विधेयक के कार्य को बहुत प्राथमिकता देता हूं। राज्यपाल के पद के साथ इतना घिनौना खिलवाड़ किया जा रहा है। राज्यपाल 16 घंटे जनता के लिए काम कर रहा है। जरूरत पड़े तो 18 घंटे करूंगा पर राज्यपाल के पद को बदनाम नहीं होने दूंगा। राज्यपाल ने एक सेकेंड भी विधेयक नहीं रोका है। मैंने ऐसा कभी नहीं किया। विधानसभा में इस पर चर्चा होगी। सदस्य देखेंगे कि राज्यपाल ने जो बात कही है उस पर चिंतन होगा, मनन होगा और रास्ता निकलेगा। मैं जनता से भी कहना चाहूंगा कि मैं एसटी, एससी के पक्ष में अग्रिम सिपाही हूं। राज्यपाल ने सरकार के सामने कई सवाल खड़े किये। पहला सवाल 25 से 29 नवंबर तक आपने क्यों कदम नहीं उठाया? सरकार कठघरे में है बताइये। यदि आपको विधेयक कार्य की जल्दी थी तो मेरा प्रश्न है कि क्यों आप फाइल लेकर 25 से 29 तक बैठे रहे? क्योंकि आपको पता था कि राज्यपाल एक दिन व्यस्त हैं। वो 30 का दिन था। मैं काम करने लिए कहीं से भी वापस आ सकता हूं। जैसे ही मुझे पता लगा 2 तारीख को तो मेरे कार्यालय ने पूरी प्रकिया शुरू कर दी। मेरा अगला सवाल फाइल के साथ ब्रिफिंग क्यों नहीं भेजी गयी? यदि जल्द है तो क्यों ऐसा किया गया?

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