मुश्किल में जूट मिल मालिक, जान बचाएं या जहान

हावड़ा में कुल 14 जूट मिलों में हजारों श्रमिक कार्यरत, 2 पहले से ही थे बंद
सन्मार्ग संवाददाता, हावड़ा : कोरोना ने आम लोगों के साथ राज्य के उद्योग धंधों को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। हावड़ा में कुल 14 जूट मिलें हैं। रेड जोन होने के कारण लगभग सभी में उत्पादन ठप है। ऐसे में राज्य के जूट उद्योग पर बुरा असर पड़ा है। रबी सीजन सिर पर है। ऐसे में अन्य राज्यों से लगातारक जूट के बोरों की मांग आ रही है, लेकिन जूट िमलें उनकी मांग पूरी नहीं कर पा रही है। जूट मिल मालिकों को रोजाना करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। नो वर्क नो पे के तहत श्रमिकों को वेतन नहीं मिल रहा है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो लॉकडाउन के कारण सबकी हालत पतली होनी तय है। बोरे की कमी को लेकर कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखा है तो कुछ ने फोन कर कोई राह निकालने की अपील की लेकिन हावड़ा को रेड जोन घोषित करते हुए उनकी अपील को रद्द कर दिया गया।

गोदाम में पड़े खराब हो रहे हैं कच्चे माल

बाली के महादेव जूट मिल के कैशियर सोनू दूबे ने बताया कि मिल के गोदाम में 50 टन कच्चा माल प्रोसेसिंग में है लेकिन वह पड़े हुए खराब हो रहा है। इसका कारण लगातार हो रही बारिश भी है। बारिश के कारण गोदाम में पड़ा माल खराब हो रहा है। वहीं दूसरी ओर कई माल तैयार होकर अधूरे पड़े हुए लेकिन चक्का जाम होने के कारण मालों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। इसके कारण रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

सभी चाहते जल्द खुले मिल

केन्द्र से लेकर प्रदेश सरकार, यहां तक कि मिल मालिक भी चाहते हैं कि मिलों को जल्द खोला जाए, पर सबसे बड़ी बाधा कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने को लेकर है। महादेव जूट मिल व जगदल जूट मिल के मालिक संजय बगड़िया ने कहा कि हमने राज्य सरकार को अपील की थी कि वे जूट मिलों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ खोलें ताकि कुछ काम आगे बढ़ सके। मालिक चाहते हैं कि पूरी सुरक्षा के तहत ही मिल खोली जाए। इलाके को सील करके खोलना बेहतर विकल्प है, क्योंकि घनी आबादी वाली मजदूर बस्ती में कोरोना के फैलने की आशंका ज्यादा है। मिलों को खोलने के बारे में राज्य सरकार ही कोई फैसला ले सकती है।

दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है हालत

वहीं महादेव जूट मिल के श्रमिकों ने बताया कि हम बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण हमारी मिल भी बंद है। परिवार को चलाने में असमर्थ हैं। मिल बंद होने से हमारे लिए आय का कोई साधन नहीं है। नो वर्क नो पे के तहत हमें वेतन नहीं मिल रहा है। हमारी स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। पैसे लगभग खत्म हो गए हैं। हमें किसी से राहत सामग्री भी नहीं मिल रही है। अगर मिल प्रबंधन हमें अग्रिम दे तो हम अपने परिवार का पेट भर सकते हैं। वहीं श्रमिकों ने बताया कि उन्हें मिल की ओर से भी खाद्य सामग्रियां व भोजन प्रदान किये जा रहे हैं।

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