मिसाल : रविवार को हुई सुनवाई, पैरा टीचरों को धरना को मिली अनुमति

सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ सरकार ने की थी डिविजन बेंच में अपील
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस कौशिक चंद के डिविजन बेंच ने पैरा टीचरों की धरना को अनुमति दे दी। सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से की गई अपील पर डिविजन बेंच ने रविवार को इसकी सुनवायी की। डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को बहाल रखा और पैराटीचर 11 नवंबर से विधाननगर में विकास भवन के सामने धरना देंगे।
डिविजन बेंच ने कुछ शर्तें लगा दी हैं। मसलन उनका धरना विकास भवन के एक सौ मीटर की दूरी पर होगा और उसमें तीन सौ से अधिक पैराटीचर शामिल नहीं होंगे। इस दौरान सड़क पर अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही शांती व्यवस्था बनाये रखनी पड़ेगी। धरना में शामिल होने वाले बाकी पैराटीचर डॉ. विधान चंद्र राय की मूर्ति के पास इकट्ठा होंगे और अपनी रैली निकालेंगे। इस पूरे कार्यक्रम की वीडियो रिकार्डिंग आंदोलनकारी और पुलिस वाले दोनों ही करेंगे। इसके साथ ही डिविजन बेंच ने पुलिस को आदेश दिया कि वह आंदोलनकारियों को उकसाने की कोशिश नहीं करेगी और उनके प्रति आक्रामक रुख नहीं अपनाएगी। अगली सुनवायी बुधवार को होगी। उनकी तरफ से एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या ने पैरवी करते हुए कहा कि यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। जस्टिस संजीव बनर्जी ने भी एडवोकेट जनरल किशोर दत्त से सवाल किया कि सक्षम अधिकारियों के समक्ष उन्हें अपनी बात कहने का अधिकार है। अब अधिकारी को उनकी मांग के बाबत फैसला लेना है। एजी ने अनुमति नहीं दी जाने के बाबत पिछले इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पैरा टीचर शांती बना कर नहीं रखते हैं। एडवोकेट भट्टाचार्या ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसी के बुनियादी अधिकार को नहीं छीन सकती है। यहां गौरतलब है कि पैराटीचरों की 11 नवंबर की प्रस्तावित धरना को हाई कोर्ट के जस्टिस देवांशु बसाक ने शुक्रवार को अनुमति दे दी। सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से चीफ जस्टिस टी बी राधाकृष्णन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी के डिविजन बेंच में अपील की गई। चीफ जस्टिस ने सिंगल बेंच के आदेश पर स्टे तो नहीं लगाया, अलबत्ता अपील पर रविवार को सुनवायी के लिए जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस कौशिक चंद के एक स्पेशल बेंच का गठन कर दिया। डिविजन बेंच ने रविवार को दोपहर ग्यारह बजे इसकी सुनवायी की। पैरा टीचरों का दावा है कि उनकी संख्या 38 हजार के करीब है और उन्हें बहुत मामूली वेतन मिलता है, जबकि वे रेगुलर टीचरों की तरह काम करते हैं।

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