महानगर में हजारों एम्बुलेंस फिर भी संकट क्यों ?

कोरोना काल में निगम के पास 30 से अधिक एम्बुलेंस
सिंकी सिंह, कोलकाता : महानगर में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना चुनौती बन गयी है। कोलकाता नगर निगम व सरकार की मानें तो एम्बुलेंस हजारों की संख्या में मौजूद हैं, लेकिन, जरूरत पड़ने पर जब लोग एम्बुलेंस की तलाश करते हैं तो लोगों को एम्बुलेंस के लिये दोगुना पैसा देना पड़ रहा है।
यह समस्या सिर्फ कोविड मरीजों के लिये नहीं है बल्कि जो कोविड मरीज नहीं हैं, उनके लिये भी परेशानी है। गौरतलब है कि महानगर में सरकारी व निजी अस्पतालों के साथ ही गैर सरकारी संगठन व कई सेवा शिविरों के पास हजारों एम्बुलेंस हैं, लेकिन कोरोना महामारी के बीच एम्बुलेंस पाने के लिये लोगों को जमीन-आसमान एक करना पड़ रहा है।
ऐसे में अगर सरकार दावा कर रही है कि महानगर में हजारों की संख्या में एम्बुलेंस हैं तो फिर ये संकट क्यों ?
कोरोना काल में निगम के पास 30 से अधिक एम्बुलेंस
कोलकाता नगर निगम ने कोरोना काल में कोविड मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाने के साथ ही शवों के अंतिम संस्कार के लिये लगभग 30 से अधिक एम्बुलेंसों की व्यवस्था रखी है, लेकिन इसके बावजूद महानगर में कई घटनाएं ऐसी हुईं जिनमें यह देखा गया कि कई -कई घंटों तक शव घरों में पड़े रहे। ना ही स्थानीय पार्षद को इसकी जानकारी थी और ना ही स्थानीय थाना को। जब इतनी अधिक संख्या में एम्बुलेंस की व्यवस्था है, लोगों के सामने इतनी बड़ी परेशानी क्यों हो रही है।
सरकारी अस्पताल में लगभग 1000 से अधिक एंबुलेंस
सरकारी अस्पतालों में लगभग 1000 से अधिक एम्बुलेंस हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को जरूरत के समय एम्बुलेंस नहीं मिल पा रहे हैं। कोरोना काल में जिस तरह से मौतों के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, एम्बुलेंस ना मिलने से लोगों की परेशानी भी बढ़ रही हैं। फिर भी सरकार कह रही है कि एम्बुलेंस बहुत है। फिर लोगों तक यह परिसेवा क्यों नहीं पहुंच पा
रही है ?
अगर वार्ड कोऑर्डिनेटर नहीं हुए अलर्ट तो होगी कार्रवाई
कोलकाता नगर निगम के प्रशासक फिरहाद हकीम ने निर्देश दिया है कि अगर किसी भी इलाके में लोगों के घरों में शव पड़ा पाया गया या लोगों को अस्पताल तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा तो ऐसी हालत में उस वार्ड कोऑर्डिनेटर से जवाबदेही की जाएगी और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे में सब अलर्ट रहकर लोगों की मदद करने का प्रयास करें।
दूसरी ओर कोविड-19 के नोडल ऑफिसर अलापन बंद्योपाध्याय ने स्थानीय थाना व वार्ड कोऑर्डिनेटर को आपस में समन्वय रखने की बात कही है। चाहे अस्पताल ले जाना हो या फिर एम्बुलेंस की व्यवस्था करनी हो।
आरोप: आज फोन किया जाता है तो कल आती है एम्बुलेंस
कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत आने वाले कई वार्डों के कोऑर्डिनेटर का कहना है कि एम्बुलेंस परिसेवा लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। आज फोन किया जाता है तो दूसरे दिन एम्बुलेंस उनके घर आती है। वार्ड 99 में ऐसी ही घटना हुई जहां मरीज के परिजन एम्बुलेंस के लिए फोन करते रहे लेकिन एम्बुलेंस उनके घर नहीं पहुंची। आखिरकार मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए प्राइवेट गाड़ी बुक कर दोगुना रुपया देकर अस्पताल पहुंचाया गया। गौरतलब है कि निगम सूत्रों की मानें तो जहां पहले निगम में एम्बुलेंस की संख्या 15 से बढ़ाकर 30 से अधिक कर दी गयी है, फिर भी लोगों तक परिसेवा क्यों नहीं पहुंच पा रही है, इसकी जांच की जा रही है।

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