मवेशी तस्करी के मामले में सीबीआई का अब तक का सबसे बड़ा छापा

कोलकाता : मवेशी तस्करी के मामले में सीबीआई ने सनसनीखेज खुलासे किये हैं।  सबसे बड़ी बात यह सामने आयी है कि तस्करों, बीएसएफ और कस्टम्स के एक-दो अधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत से गायों की तस्करी होती थी। सबकी हिस्सेदारी भी फिक्स थी। इनके तार राजनीतिक नेताओं से भी जुड़े हैं तथा बहुत जल्द इनकी गर्दन तक सीबीआई का शिकंजा कसा होगा। बताया तो यहां तक जा रहा है कि इन मवेशी तस्करों के साथ आतंकियों की भी सांठगांठ थी तथा तस्करी का पैसा जेएमबी के हाथ होते हुए अलकायदा तक पहुंचता था। बदले में उस पार से आता था सोना और देश की अर्थ व्यवस्था को तबाह करने के लिए नकली नोट।
बुधवार को बंगाल सहित 5 राज्यों के 15 स्थानों पर छापे मारे गये।  इस दौरान बंगाल के कोलकाता, साल्टलेक, राजारहाट तपसिया, सिलीगुड़ी, मालदह, मुर्शिदाबाद, बरहमपुर व लालगोला में सीबीआई, कोलकाता की एंटी करप्शन टीम ने तलाशी अभियान चलाया है। वहीं अन्य स्थानों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, पंजाब के अमृतसर और  छत्तीसगढ़ के रायपुर में छापामारी हुई है। दिल्ली, सिलीगुड़ी व अमृतसर में पूर्व कमांडेंट के आवास हैं। कमांडेंट का नाम है सतीश कुमार तथा वे 2015 से 2017 के बीच मालदह में तैनात थे तथा इस दौरान उन्होंने करोड़ों रुपए कमाये। उनका सिलीगुड़ी में बंगला तथा साल्टलेक व नयी दिल्ली में फ्लैट तथा अमृतसर में मकान है।
यह थी मॉडसआपरेंडी
सीबीआई की टीम ने गत 21 सिंतबर को इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोप है कि 19 दिसंबर 2015 से लेकर 22 अप्रैल 2017  के बीच में कमांडेंट सतीश कुमार की मदद से इन तस्करी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। मुर्शिदाबाद में बीएसएफ की 4 कंपनियां व मालदह में 2 कंपनियां तैनात थीं। आरोप है कि सतीश कुमार के कार्यकाल में 20,000 मवेशियों को जब्त किया गया था। इस गिरोह के काम करने का तरीका भी काफी शातिर था। बताया गया कि मवेशियों की जब्ती के 24 घंटे के भीतर इनका ऑक्शन होता था। कस्टम्स अधिकारियों व सतीश कुमार की मदद से एनामुल हक व उसका सहयोगी अनारुल शेख तथा मो. गुलाम मुस्तफा ने ऑक्शन ले लेते थे।  इस सिंडिकेट में जंगीपुर कस्टम्स तथा मुर्शिदाबाद कस्टम्स की भी मदद रहने का आरोप है। ऑक्शन में मवेशियों की कीमत काफी कम लगायी गयी थी।
प्रति मवेशी बीएसएफ को 2000 रुपये व कस्टम्स को 500 रु. मिलते थे
सीबीआई की जांच में पता चला है कि एनामुल  हक प्रति मवेशी बीएसएफ अधिकारी को 2000 तथा कस्टम्स अधिकारी को 500  रुपये देता था। वहीं ऑक्शन के दौरान इन्हें मवेशियों को देने के लिए व्यवस्था अलग थी।  कस्टम्स के अधिकारी आक्शन वैल्यू का 10 फीसदी उनसे घूस भी लेते थे। यहां तक कि मवेशियों को  खिलाये गये चारे की कीमत भी 50 रुपये करके इन मवेशी तस्करों से वसूली जाती  थी। यह भी आरोप लगा है कि बीएसएफ द्वारा पकड़े गये तस्करी के मवेशियों को  सिर्फ इन्हें ही बेचा जाता था और किसी की हिम्मत नहीं थी कि इसमें भाग भी  ले। मवेशियों को खरीदने के  बाद इसे फिर से तस्करी कर बांग्लादेश भेज दिया जाता था।
2 साल पहले सीबीआई को लगी थी भनक
सीबीआई की टीम ने 6 अप्रैल 2018 में एक प्रिलिमिनरी इंक्वायरी की थी। यह छानबीन सतीश कुमार के खिलाफ की गयी थी। उन पर एनामुल हक के साथ तस्करी में सहयोग का आरोप लगा था। उस दौरान पता चला था कि सतीश कुमार के बेटे भुवन भास्कर को इनामुल की कंपनी में बड़े पोस्ट पर रखा गया था। साथ ही यह पता चला था कि तस्करी के माध्यम से भारत से बांग्लादेश बड़ी संख्या में मवेशियों की तस्करी होती है और इसमें बीएसएफ व कस्टम्स के अधिकारी भी इसमें लिप्त हैं। इससे पूर्व इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की टीम ने भी मवेशी तस्करी के मामले में इनामुल के खिलाफ कार्रवाई की है।
सतीश कुमार के बेटे को मिलती थी 30 हजार से 40 हजार तक की तनख्वाह
आरोप है कि सतीश कुमार के बेटे भुवन भास्कर को हक इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड में मवेशी तस्कर ने नौकरी भी दी थी। उसे 30 से 40 हजार तक की सैलरी मिली है। मई 2017 की शुरुआत में 30 हजार तथा दिसंबर तक 40 हजार की सैलरी दी गयी है। इससे साफ पता चलता है कि बड़े ही प्रगाढ़ रिश्ते दोनों के बीच थे।
इन-इन धाराओं में हुए हैं मामले
कौग्निजेबल ऑफेंस आईपीसी की धारा 120 बी, प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 के सेक्शन 7, 11 तथा 12 के तहत इन पर व कस्टम्स के अज्ञात अधिकारियों पर लगाए गये हैं।
क्या कहना है बीएसएफ अधिकारी का
वे मालदह में 14 दिसंबर 2015 से 24 मई 2016 तक पदस्थ थे। वहीं 36वीं बटालियन में वर्ष 24 मई 2016 से 7 मई 2017 तक पदस्थ थे। सीबीआई इसकी छानबीन कर रही है।

तस्करों के साथ बीएसएफ और कस्टम्स के एक-दो अधिकारियों की सांठगांठ

– कुछ नेताओं पर कस सकता है शिकंजा
– बंगाल सहित 5 राज्यों के 15 स्थानों पर सीबीआई के छापे
– बीएसएफ कमांडेंट व अन्य 4 के खिलाफ मामला दर्ज
– मवेशी तस्करी का पैसा जाता था आतंकियों को? होगी जांच

इनके खिलाफ हुई है कार्रवाई
आरोप है कि बीएसएफ के मालदह स्थित 20वीं बटालियन तथा  36वीं बटालियन के तत्कालीन  कमांडेंट सतीश कुमार तथा 4 अन्य अभियुक्त मो. एनामुल हक, अनारुल शेख और  मोहम्मद गुलाम मुस्तफा व अन्य की इसमें मुख्य भूमिका  रही है। सीबीआई  अधिकारी के मुताबिक सतीश कुमार इस समय रायपुर में हैं।  एनामुल हक मुर्शिदाबाद का ही नहीं  बल्कि देश का सबसे बड़ा मवेशी तस्कर है।

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