ममता ने मानी मांगें, डॉक्टर ने की हड़ताल खत्म करने की घोषणा

कोलकाता : प्रदेश में 7 दिनों से चली आ रही डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई है। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  से सुरक्षा दिए जाने का आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल खत्म करने की घोषणा की है।

अस्पताल में पुलिस अफसर की तैनाती होगी

डॉक्टरों हड़ताल के कारण राज्य में स्वास्‍थ्य व्यवस्‍था चरमरा गई। मरीजों और उनके तीमारदारों को इस दौरान खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन डॉक्टरों के काम पर लौटने से वे राहत की सांस ले सकेंगे। सीएम से हुई मुलाकात में डॉक्टरों ने उनसे कहा कि हमें काम करते समय डर लगता है। वहीं ममता ने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन देते हुए कहा कि हर अस्पताल में पुलिस अफसर की तैनाती की जाएगी।

डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज नहीं कराया

डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि नील रतन सरकार(एनआरएस) अस्पताल में जिन लोगों ने उनके साथियों के साथ मारपीट की उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनकी इस बात के जवाब में ममता ने कहा कि हमले में शामिल 5 लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने किसी भी डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज नहीं कराया है।

क्षेत्रीय चैनलों के सामने हुई बातचीत

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की शिकायत को दूर करने के लिए अब हर सरकारी अस्पताल में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। इससे पहले ममता से मिलने से इंकार करते हुए डॉक्टरों ने कहा था कि बंद कमरे में वे कोई बातचीत नहीं करेंगे। साथ ही डॉक्टरों ने मीडिया के सामने बातचीत करने की मांग रखी थी। ममता ने उनकी मांग को मानते हुए हर मेडिकल कॉलेज से 2 डॉक्टरों को मिलने के लिए बुलाया और दो क्षेत्रीय चैनलों ने इस बातचीत को कवर किया।

देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर

पश्चिम बंगाल में हड़ताल कर रहे डॉक्टरों के समर्थन में देश भर के डॉक्टर 24 घंटे की हड़ताल पर हैं। भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने आपात चिकित्सा सेवाओं को हड़ताल से अलग रखने का आह्वान किया है। हड़ताल के दौरान बाह्य मरीज विभाग (ओपीडी) सहित गैर-जरूरी सेवाएं सोमवार सुबह 6 बजे से लेकर मंगलवार सुबह 6 बजे तक स्‍थगित रहेंगी। मालूम हो कि बंगाल में हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत करने का फैसला किया था। वहीं, बंगाल डॉक्टर्स फोरम (बीडीएफ) अध्यक्ष अर्जुन सेनगुप्ता ने उम्मीद जताई थी कि गतिरोध खत्म हो और राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं जल्द से जल्द बहाल हो।

हड़ताल में शामिल नहीं होगा एम्स

देश भर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर आईएमए के आह्वान पर बुलाई गई हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) का कहना है कि उन्होंने यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की जरूरतों को देखते हुए लिया गया है। हालांकि वे मार्च निकालकर घटना पर अपना विरोध दर्ज कराऐंगे जबकि दिल्ली चिकित्सा संघ (डीएमए) और फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने भी हड़ताल को अपना समर्थन दिया है।

हिंसा रोकने को उठाए जाएं कदम

आईएमए ने डॉक्टरों साथ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए केंद्र से कानून बनाए जाने की मांग दोहराई है। उसने कहा है कि उनकी यह मांग सालों से चली आ रही है लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। आईएम का यह भी कहना है कि हमारी एक दिवसीय हड़ताल उसी मांग को लेकर है। वहीं युनाइटेड रेजिडेंट एंड डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक कि इसका समाधान नहीं निकलता है।

 

बता दें कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में गत दिनों एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने दो डॉक्टरों पर कथित तौर पर हमला कर दिया था। इस घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गये, जिसके बाद 11 जून से जूनियर डॉक्टर हड़ताल चले गए थे।

गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में देशभर के डॉक्टरों ने काम ना करने का फैसला किया है।

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Jagdip Dhankhar

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