ममता ने कहा : राज्यपाल भाजपा के हैं

कहा : उनके बयानों पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझती,
अयोध्या पर की शांति की अपील
जेईई में बाकी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ भेदभाव का लगाया आरोप
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्यपाल भाजपा के हैं, उनके किसी बयान पर प्रतिक्रिया देना मैं जरूरी नहीं समझती हूं। यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को तृणमूल भवन में संवाददाताओं के सवाल पर व्यक्त की। कभी कानून व्यवस्था को लेकर, तो कभी उपाचार्यों की कार्यशैली पर, तो कभी केंद्रीय योजनाओं को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच टकराव देखा गया है। अब तक तृणमूल की ओर से राज्यपाल को भाजपा का मुखपत्र कहा जाता रहा है मगर पहली बार मुख्यमंत्री ने राज्यपाल पर प्रतिक्रिया दी।
अयोध्या मामले को लेकर संयम बरतें
इधर अयोध्या मामले को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने राज्यवासियों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सुनवाई में क्या होगा किसी काे नहीं पता, मगर पीएम नरेंद्र मोदी तक सभी से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। इसलिए मैंने भी जनता से यह अपील की है कि वे सुनवाई पर उग्र न हों, इस विषय में जो भी कहना है सिर्फ मैं कहूंगी, पार्टी का कोई नेता इसमें अपनी प्रतिक्रिया नहीं देगा।
जेईई में सिर्फ गुजराती ही क्यों, बाकी भाषा क्यों नहीं ?
जेईई में हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा गुजराती में प्रश्नपत्र की सुविधा पर सीएम ने बाकी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। ऐसा करने से पहले उन्हें सभी राज्यों से राय लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जहां अलग-अलग भाषा, जाति, धर्म के लोग रहते हैं, मगर उनमें एकता है। जेईई मेंस में अगर गुजराती भाषा को मौका दिया गया है तो बाकी भाषाओं जैसे बांग्ला, असमिया, भोजपुरी, तमिल व अन्य में भी प्रश्नपत्र जारी करना चाहिए। लोकल भाषा में छात्रों को सहूलियत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा भेजी गयी चिट्ठी में गुजराती के साथ महाराष्ट्र का भी जिक्र किया गया था, मगर सिर्फ गुजराती को ही मौका मिला। इस फैसले पर सीएम ने दोबारा गौर करने के लिए कहा तथा यह भी कहा कि तृणमूल इसके प्रतिवाद में 11 नवंबर को राज्यभर में रैली निकालेगी।

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