बैलेट पेपर पर बोलीं ममता : ‘ओल्ड इज आलवेज गोल्ड’

नई दिल्ली/ कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईवीएम के जरिए हो रहे मतदान के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि ईवीएम के जरिए चुनाव में गड़बड़ी हो सकती है। वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में उनका साफ कहना है कि जैसे पहले मतपत्रों के माध्यम से चुनाव होते थे, वह तरीका सही है और उसे ही अपनाना चाहिए। उन्होंने साथ ही यह टिप्पणी भी की ‘ओल्ड इज आलवेज गोल्ड’।  ईवीएम को लेकर सोमवार को 15 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। तृणमूल कांग्रेस भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थी। ममता बनर्जी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा लोकतंत्र में यदि प्रमुख राजनीतिक पार्टियां ईवीएम का विरोध करती हैं तो चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए। ममता ने कहा कि उन्होंने काफी पहले ईवीएम का विरोध किया था। 2006 में उन्होंने ईवीएम पर एक किताब भी लिखी थी जिसमें इस वोटिंग मशीन की तकनीकी गडबड़ियों के बारे में भी लिखा था। उन्होंने कहा जिस तरह माकपा चुनाव में जीती थी उसके बाद उन्हें ईवीएम पर संदेह हुआ था। उन्होंने बताया कि उस दौरान ईवीएम को लेकर उन्होंने फ्लोरिडा की एक अदालत में अपनी तरफ एक शपथ पत्र भी दाखिल किया था। यह पूछे जाने पर कि मतदान के लिए उनकी समझ से दूसरा विकल्प क्या हो सकता है, ममता ने कहा कि उन्हें शुरू से पुराने मतदान प्रणाली पर भरोसा रहा है। ओल्ड इज आलवेज गोल्ड। उन्होंने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता यदि इस प्रणाली को अपनाने के लिए कुछ ज्यादा कर्मचारी लगाने पड़ें, कुछ ज्यादा पैसा खर्च करना पड़े। लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव का भरोसा होना मायने रखता है। यदि ज्यादातर राजनीतिक दल ईवीएम पर भरोसा नहीं करते तो चुनाव आयोग को इसे हटा देना चाहिए। भाजपा के खिलाफ ‘विपक्षी महाजोट’ के बारे में ममता ने अपनी सहमति जाहिर की। उनका कहना है कि इसके लिए राजनीतिक पार्टियां सामने आकर एक साथ इस दिशा में कोशिश करती हैं तो इसमें उनका भी समर्थन रहेगा। उन्होंने कहा कि ‘राजनीति में किसी रास्ते पर आगे बढ़ने से ही आगे रास्ता दिखाई देता है। कांग्रेस और ‘आप’ जैसी पार्टियों के आपसी अंतर्विरोध से उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों के मामले में ममता ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए यह कहा कि किसी रास्ते पर चलने पर कोई अवरोध सामने आता है तो दूसरा रास्ता अपने आप खुल जाता है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव इसी वर्ष होने वाले हैं। इस मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता या विपक्ष के साझा किसी उम्मीदवार के बारे पूछे सवालों पर ममता ने जवाब देने से मना कर दिया। इसी तरह तीस्ता के मामले में उन्होंने कहा कि मैंने सुझाव दिए हैं।

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