बेलूड़ का ऐतिहासिक बड़ा तालाब बन गया है समाज विरो​धियों का अड्डा

हावड़ा : बेलूड़ का ऐतिहासिक बड़ा तालाब जिसका नाम ठाकुरपुकुर तालाब भी है लेकिन यह इलाका बड़ातालाब के नाम से जाना जाता है। करीब 30 कट्ठे की जमीन में फैले इस तालाब की अपनी एक प्रतिभा थी। क्योंकि यहां पर राज्य स्तरीय स्वीमिंग प्रतियोगिता का आयोजन होता था। परंतु वक्त साथ तालाब का महत्व कम होता चला गया। तालाब को लेकर विवाद भी हुए और इसे लेकर हाईकोर्ट में मामला भी दायर किया गया। इसके कारण यह तालाब सरकार के हाथ से निकल कर निजी संपति बनकर रह गयी है। तालाब की सफाई न के बराबर है। पहले यहां पर साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता था, मगर धीरे-धीरे तालाब में जलकुंभियों की परतें जमने लगी और तालाब का महत्व भी खत्म होता चला गया। अब यहां केवल समाजविरोधियों का अड्डा जमता है तो दूसरी ओर तालाब में फैली गंदगी महामारी को दावत देती नजर आ रही है।
शाम होते ही शुरू हो जाती है अड्डेबाजी
बड़ातालाब के आसपास करीब 2 हजार लोग बसते हैं और इसी तालाब के किनारे शाम होते ही यहां दम मारों दम की स्थिति हो जाती है। आरोप है कि शराबी, गंजेड़ी, जुआड़ी अपना जमावड़ा लगा लेते हैं। किनारों पर बैठके ये लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, कई तरह की आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इलाके के पूर्व पार्षदाें का आरोप है कि बोर्ड के दौरान यहां अड्डेबाजी बिल्कुल खत्म हो चुकी थी लेकिन कुछ सालों में अड्डेबाजी ने फिर से अपना घर बना लिया है।
राज्य स्तर पर होती रही स्वीमिंग प्रतियोगिता व बोटिंग
बड़ातालाब जहां पर पिछले 50 सालों से स्वीमिंग की प्रतियोगिता का आयोजन होता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका अस्तित्व खत्म होता दिखाई दे रहा है क्योंकि गत दो सालों में इस तरह की राज्य स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन बंद ही हो गया है। यहां पर बर्तवान, बीरभूम, उत्तर बंगाल, हावड़ा, हुगली व कोलकाता से लोग प्रतियोगिता में भाग लेने आते थे मगर साल 2018 के बाद से ही यहां पर ऐसा आयोजन होना ही बंद हो गया है। इसके पहले यहां बोटिंग की शुरूआत की गयी थी। 4 से 5 बोट के जरिये मामलू किराये पर तालाब का पूर्ण भ्रमण करवाया जाता था। इससे इलाके के लोग ही यहां घूमने के बहाने से बोटिंग करने आते थे।
मंडरा रहा है महामारी का खतरा
अब इस तालाब में जलकुंभी व कचरा भर गया है। इलाके के रहनेवाले मनोज राय ने कहा कि यहां सफाई हुए दो साल से उपर हो गये हैं। यह तालाब जलकुंभियों से भर गया और इसी में सड़ भी गया है। इसके कारण यहां गंदी गैस भी निकलती है। इसके साथ ही तालाब के चारों ओर कचरों का अंबार लगा रहता है। इसे लोगों ने ही डं​पिंग ग्राउंड बना दिया है। इधर बीना कुमारी ने कहा कि इस तरह से फैले कचरों से महामारी का डर लगा रहता है।
इस बार चुनाव में भुगतना होगा परिणाम
इस तरह से तालाब के चारों ओर हो रही अड्डेबाजी व गदंगी से वहां रहनेवाले करीब 2 हजार लोग परेशान हो गये हैं। उन लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इलाके के नेताओं से इस तालाब के बाहर व अंदर की सफाई के लिए गुहार भी लगायी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका खामियाजा इन नेताओं को आनेवाले चुनाव में भुगतना होगा।
क्या कहना है निगम के प्रशासक का
तालाब के मालिकों का कहना है कि उस तालाब के कागजात निगम को सौंप दिये गये हैं। इस बारे में हावड़ा नगर निगम के प्रशासक धवल जैन ने कहा कि अगर यह कहना है तो उन्हें पहले अपने कागजात दिखाने होंगे। निगम ने 159 एक्ट के तहत तालाब के मालिकों को एक पत्र दिया गया है कि आप तालाब की सफाई करवाये नहीं तो निगम करेगा तो आपके प्रोपर्टी टैक्स से वह रुपये काटे जायेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तालाब बहुत बड़ा है। इसलिए एक बार में साफ नहीं हो सकता है इसके लिए 40 दिन लगेंगे। इसलिए तालाब के एक हिस्से का काम शुरू कर दिया गया है।

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