सभी पूजा पंडालों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाएः हाईकोर्ट

– राज्य सरकार की व्यवस्‍था पर भड़का हाईकोर्ट
– पूछाः 2-3 लाख लोगों को संभालने के लिए महज 30 हजार पुलिसकर्मी?

कोलकाताः दुर्गा पूजा से ठीक पहले कलकत्ता हाईकार्ट ने पूजा पंडालों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के अनुसार अब शहर के सभी पूजा पंडाल को कंटेनमेंट जोन घोषित करने के साथ ही पंडालों में दर्शनार्थियों के प्रवेश पर अंकुश लगाया जाए। इसके साथ ही हाईकार्ट ने यहां की सुरक्षा व्यवस्‍था को लेकर भी चिंता जताई है। हाईकोर्ट को इस बात का डर है कि दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में भीड़ बढ़ेगा जिससे कोरोना संक्रमण के बढ़ने की आशंका है। हाईकोर्ट ने कहा कि आजकल अखबारों में पूजा पंडालों की जो तस्वीरें निकल रही हैं वह भयावह है। पंडालों में हजारों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंच रहे हैं। जस्टिस संजीव बनर्जी ने पूजा बंद मामले में सुनवाई करते हुए सर‌कार से सवाल किया कि आखिर 2-3 लाख लोगों को महज 30 हजार पुलिसकर्मी कैसे संभालेगी?
क्या है निर्देश
प्रत्येक पूजा पंडाल में एक नियंत्रण क्षेत्र होना चाहिए।
पंडालों में दर्शनार्थियों के प्रवेश पर अंकुश लगाया जाए।
पंडाल में समिति के कुछ सदस्यों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जाए
होईकोर्ट ने राज्य सरकार के सुरक्षा व्यवस्‍था पर उठाए सवाल
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया है पुलिस बल की संख्या में वृद्धि की जाएगी
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार पर टिप्पणी की कि गृह और मुख्य सचिव को अधिक सक्रिय होना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने कहा सरकारी दिशानिर्देशों में सद्भावना है, कोई कार्यान्वयन नहीं है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि मुंबई में गणेश पूजा की अनुमति नहीं थी

बंगाल में दुर्गा पूजा पर सियासत
इससे पूर्व अदालत ने शुक्रवार (16 अक्टूबर, 2020) को दुर्गा पूजा आयोजकों को पश्चिम बंगाल सरकार से मिलने वाले 50 हजार रुपए के अनुदान में से 75 प्रतिशत राशि कोविड-19 के उपकरणों पर और शेष राशि जनता-पुलिस संबंधों को मजबूत बनाने पर खर्च करने का निर्देश दिया है। इससे पहले,पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को ममता बनर्जी सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपये दिये जाने के औचित्य पर कलकत्ता हाइकोर्ट ने जवाब मांगा था। हाइकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से जानना चाहा था कि जब कोविड-19 महामारी की वजह से राज्य में मितव्ययिता के उपाय किये जा रहे हैं, तो सामुदायिक दूर्गा पूजा के लिए 50 हजार रुपये देने का क्या औचित्य है। ममता बनर्जी सरकार की ओर से सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों को 50 हजार रुपये देने संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव बनर्जी और अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने गुरुवार को यह भी जानना चाहा था कि क्या ईद जैसे अन्य त्योहारों के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि क्या इस तरह के खर्च के लिए कोई दिशा-निर्देश दिया गया है, क्योंकि यह सार्वजनिक धन है, जिसे पूजा आयोजकों को अनुदान के रूप में दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आर्थिक मदद कोविड-19 नियंत्रण, सैनिटाइजर और मास्क की खरीद पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए है। इस पर पीठ ने कहा कि खर्च के खातों को अच्छी तरह से बनाये रखा जाना चाहिए। पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य की ओर से पेश महाधिवक्ता किशोर दत्ता, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास भट्टाचार्य ऐसे सभी मामलों पर एक बैठक करें और शुक्रवार को इसके नतीजों के बारे में अदालत को सूचित करें। इस संबंध में जब कोर्ट को सूचित किया गया, तो कोर्ट ने धनराशि खर्च करने के बारे में पूजा समितियों को उपरोक्त निर्देश दिये। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 24 सितंबर, 2020 को राज्य की प्रत्येक पूजा समिति को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। ममता बनर्जी सरकार के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत तमाम दलों ने सवाल उठाये थे। विरोधी दलों ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी हिंदुओं को रिश्वत देने की कोशिश कर रही हैं।

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