बजट में 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की बुनियाद : वित्तमंत्री

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट में 2024-25 तक देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की आधारशिला रखी गई है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में खपत बढ़ाए जाने के उपाय किए गए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए निवेश करे। इससे आखिरकार देश की अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर का बनाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हमने खपत बढ़ाने और पूंजीगत निवेश को सुनिश्चित करने की नींव डाली है। सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने पर खर्च करेगी। इसका लघु एवं दीर्घ अवधि में व्यापक असर देखने को मिलेगा।
बजट में उद्यमियों और व्यवसायियों के लिए बहुत कुछ
उन्होंने कहा कि यह संदेश स्पष्ट दिख रहा है कि सरकार उद्यमियों और व्यवसायियों से निरंतर संवाद बनाये रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि वे यहां देश के अंदर और बाहर की दुनिया की घटनाओं के कारण नहीं आयी हैं। उनका कहना था के वे उद्योग व्यापार जगत से संवाद के लिए यहां आयी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट में कर मामलों में अपील करने और कर भुगतान की प्रक्रिया में अधिकारियों और करदाताओं के एक-दूसरे के सामने उपस्थित होने की अनिवार्यता समाप्त करने जैसे कदमों को शामिल किया है।
उद्योगों और कारोबारों के साथ लगातार जुड़े रहना चाहती है सरकार
सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार उद्योगों और कारोबारों के साथ लगातार जुड़े रहना चाहती है और करों के भुगतान को सहज बना कर उनकी सहायता करेगी। सीतारमण यहां व्यापार एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रही थीं।
तीन महीने के बजाय साल में केवल एक बार संशोधन की वकालत
वित्त मंत्री ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में दरों के स्थायित्व की आवश्यकता पर भी बल दिया। दरों में हर तीन महीने के बजाय साल में केवल एक बार संशोधन किये जाने की वकालत की।
जीएसटी की दरें कम करने की जिम्मेदारी केंद्र की नहीं
सीतारमण ने कहा कि यह सिर्फ नई प्रौद्योगिकी से संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कई साल तो हमें बेकार कानूनों को हटाने में लग गए। यह सरकार को बजट में किये गये वादों को पूरा करने में मदद करेगा। वित्त मंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े मुद्दों को लेकर कहा कि कर की दरें कम करने की पहल शुरू करने की जिम्मेदारी केंद्र की नहीं है। राज्यों के मंत्रियों को भी यह मामला उठाना चाहिए।
पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पाद पहले से ही जीएसटी के तहत हैं। अब राज्यों को यह तय करना होगा कि वे कब से पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पादों पर जीएसटी के तहत कर लगाना चाहते हैं। जब भी राज्य जीएसटी के तहत पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाने को तैयार होंगे, एक और संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी।
पश्चिम बंगाल और असम के चाय उत्पादक क्षेत्रों में एटीएम की कमी का मामला उठाने पर उन्होंने कहा कि बिना नकदी के मेहनताने का भुगतान समस्या बन रहा है। मैं जानती हूं कि चाय उत्पादक क्षेत्रों में एटीएम कम हैं। सरकार इन इलाकों में एटीएम लगाने को तैयार है।
वित्त सचिव राजीव कुमार ने कहा कि व्यावसायिक ऋण वितरण में तेजी लाने की जरूरत है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने कारोबार की वास्तविक असफलता और फर्जीवाड़ा के बीच फर्क करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

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