बच्चों को भविष्य चुनने का मौका देगा 5+3+3+4

कोलकाता : भविष्य में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की तरफ से नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी गयी है। इस नयी नीति की खास और महत्वपूर्ण बात 10+2 की जगह परीक्षा के लिए 5+3+3+4 पैटर्न तैयार किया गया है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि बच्चों में रटकर परीक्षा पास करने की प्रवृत्ति खत्म होगी और उनका रुझान प्रैक्टिल की तरफ ज्यादा होगा। लक्ष्य ​शिक्षा का अधिकार है ताकि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रह सके। शिक्षा की यह नयी प्रणाली बच्चों को अपना भविष्य खुद चुनने का मौका देगी वह भी समय से पहले। यानी किसी बच्चे को अगर साइंस में रुचि है तो उसे इतिहास या भूगोल पढ़ने की जरूरत नहीं है जाे क्लास 8 में ही बच्चा तय कर सकता है। इससे अपने तय स्ट्रीम में 2 साल पहले ही और अच्छे से फोकस करने का अवसर ​मिलेगा।
समय की मांग है एक्सपीरियंस लर्निंग
नयी शिक्षा नीति में एक्सपीरियंस लर्निंग समय की मांग है। जानेमाने शिक्षाविद् पवित्र सरकार का कहना है कि निजी स्कूल हों या सरकारी स्कूल हर जगह वह फैसिलिटी होनी चाहिए कि बच्चे किताबी ज्ञान रटने के साथ उसका प्रैक्टिकल भी करें। इससे पढ़ने की उनकी रुचि और बढ़ती है जो इस नीति में ध्यान रखा गया है। वहीं द हेरिदेज की प्रिंसिपल सीमा सप्रु का मानना है कि ऑडियो-विजुअल पढ़ाई होने से बच्चे उबते नहीं हैं। यह अगर शुरू से अंत तक शिक्षा में जारी रहे तो निश्चत तौर पर उसका रिजल्ट और बेहतर होगा।
विजन डॉक्यूमेंट को लागू करना चुनौती होगी
सीमा सप्रु का मानना है कि केंद्र की तरफ से यह नीति विजन डॉक्यूमेंट को ध्यान में रखकर लायी गयी है, जिसमें साल 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100 प्रतिशत जीईआर के साथ माध्यमिक स्तर तक एजुकेशन फॉर ऑल का लक्ष्य रखा गया है। अब देखना है कि कब तक इसे पूरी तरह लागू किया जा सकेगा। पवित्र सरकार ने कहा कि 5+3+3+4 के पैटर्न में बच्चों को किताबों के साथ प्रैक्टिकल करने का मौका भी मिलेगा। यह बच्चों के स्कील को उभारने में अच्छी पहल साबित हो सकता है मगर बात स्कूलों की करें तो वह कब तक इसके लिए खुद को तैयार करेंगे यह सबसे बड़ा सवाल है। यहां सिर्फ सरकारी स्कूलों की बात करें तो उनका इंफ्रास्ट्रक्चर इस नयी शिक्षा नीति के साथ दूर-दूर तक मेल नहीं खाता है।

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