बंगाल से 6 खूंखार आतंकी गिरफ्तार

कोलकाता/ नयी दिल्ली : बंगाल में बैठकर दिल्ली को दहलाने की साजिश रच रहे अलकायदा के 9 आतंकियों को एनआईए ने गिरफ्तार किया है। शनिवार की सुबह एनआईए अधिकारियों ने बंगाल के मुर्शिदाबाद से 6 और केरल के एर्नाकुलम से 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। एनआईए अधिकारियों ने शुक्रवार की देर रात मुर्शिदाबाद के डोमकल, जालंगी एवं जंगीपुर सहित 11 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। एनआईए सूत्रों के अनुसार शनिवार की शाम तक शमशेरगंज और मालदह इलाके में छापामारी की गयी। मुर्शिदाबाद से पकड़े गए अभियुक्तों के नाम नाजमुस शकीब, अबु सुफियान, मोइनुल मंडल, लिउ इयान अहमद, अल मामून कमल एवं अतिउर रहमान बताये गए हैं। इनमें से 4 आतंकियों का घर डोमकल और दो जालंगी के रहनेवाले हैं। वहीं केरल के एर्नाकुलम से पकड़े गए अभियुक्तों के नाम मुर्शीद हसन, याकूब विश्वास और मुशर्रफ हुसैन हैं। अभियुक्तों के पास से जिहादी किताबें, विस्फोटक, धारदार हथियार, आईईडी, बॉडी आर्मर यानी ढाल के हिसाब से उपयोग होने वाले यंत्र बरामद किए गए हैं। एनआईए अधिकारियों के अनुसार केरल से पकड़े गए तीन आतंकियों में से दो मुर्शिदाबाद के रहनेवाले हैं।

सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने बनाया था कट्टरपंथी

एनआईए ने कहा है कि इन गिरफ्तार व्यक्तियों को सोशल मीडिया पर पाकिस्तान स्थित अलकायदा आतंकवादियों द्वारा कट्टरपंथी बनाया गया था । आतंकियों को दिल्ली सहित कई शहरों पर हमले करने के लिए प्रेरित किया गया था। एनआईए ने कहा है कि इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एनआईए अधिकारियों के अनुसार अलकायदा का यह भारतीय शाखा ‘कायदातुल जिहाद’ उर्फ ‘अलकायदा इन सब कंटीनेंट’ के नाम से जाना जाता है। इस शाखा का बीते कई सालों से पाकिस्तान में बैठे अलकायदा आतंकियों की मदद से विस्तार किया जा रहा है। पाकिस्तान में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए लोगों की नियुक्ति के साथ उन्हें ट्रेनिंग देने का काम चलाया जाता है। अलकायदा के इस मॉड्यूल का काम दिल्ली सहित कई महत्वपूर्ण शहरों में हमला कर मासूम लोगों की हत्या करना था।

हथियार के लिए दिल्ली जाने वाले थे

यह गिरोह सक्रिय रूप से धन उगाहने में लगा था और गिरोह के कुछ सदस्य हथियारों और गोला-बारूद की खरीद के लिए दिल्ली की यात्रा करने की योजना बना रहे थे। संभव है कि इस गिरफ्तारी से देश के विभिन्न हिस्सों में संभावित आतंकवादी हमले रोके जा सकते हैं। यहां उल्लेखनीय है कि बुधवार को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री ने संसद को बताया था कि कर्नाटक सहित देश के 9 राज्यों में आईएस ने आतंकी संगठन तैयार किया है। इन राज्यों में बंगाल का नाम भी शामिल था।

‘लोन वुल्फ’ मॉड्यूल का हिस्सा हैं बंगाल के अलकायदा आतंकी

बंगाल से गिरफ्तार आतंकवादी लगातार पाकिस्तान और इराक के संपर्क में थे। पाकिस्तानी अलकायदा के सरगना भारत में मुर्शिदाबाद को बेस की तरह उपयोग कर  यहां के युवाओं को धन और अन्य प्रलोभन देकर संगठन में शामिल कराये थे।  इन्हें विश्वास में लेते हुए अलकायदा इनके जरिये देश में आतंकी गतिविधियों  के साथ-साथ संगठन के विस्तार की रणनीति पर भी काम कर रहा था। मुर्शिदाबाद  में अबू सुफियान और लियू इयान अहमद यहां बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ने  की कोशिश में लगे थे। मुर्शिदाबाद के 11 जगहों पर की गयी छापामारी के दौरान एनआईए के हाथों गिरफ्तार 9 आतंकी  अलकायदा कोर ग्रूप से जुड़े आतंकी हैं। सूत्रों ने बताया कि पिछले कई दिनों से करीब तीन टीमें केरल और बंगाल के मुर्शिदाबाद में इनकी गतिविधियों पर पैनी निगाह रखी हुई थी। एनआईए के अधिकारी लगातार उनके मोबाइल और अन्य माध्यमों को ट्रैक भी कर रहे थे। बताया जाता है कि सोशल मीडिया के साथ-साथ ये आतंकी फोन पर भी पाकिस्तान में अलकायदा से संपर्क करने में लगे थे और यही उनकी बड़ी भूल साबित हुई। एनआईए के विशेषज्ञ इनकी हर गतिविधियों को ट्रैक करते रहे और इनके लोकेशनों पर निगरानी बढ़ा दी।
बांग्लादेश सीमांत और हवाला के जरिये आते थे फंड
सूत्रों ने बताया कि मुर्शिदाबाद से सटे भारत बांग्लादेश सीमांत और हवाला के जरिये इन्हें फंड मुहैया कराया जाता था। कभी-कभी बांग्लादेश सीमांत के जरिये इन्हें हथियार और विस्फोटक भी पहुंचाये जाते थे। यहां आने वाले हथियारों और विस्फोटकों को संगठन के सदस्य देश के कई क्षेत्रों में तुरंत भेज देते थे। कायदा तुल जिहाद उर्फ अलकायदा इन सब कंटीनेंट के जरिये ये भारत में संगठन का विस्तार कर रहे थे।
आगामी कुछ दिनों में कुछ बड़े खुलासे की उम्मीद
इनकी गिरफ्तारी के बाद एनआईए को आगामी कुछ ही दिनों में कुछ बड़े खुलासे की उम्मीद है। एनआईए इनके संपर्क और आपूर्ति के रूट को ट्रैक करने के साथ-साथ देश में इनके अन्य संपर्क सूत्रों और स्लीपर सेल की जानकारी भी लेने की कोशिश में है।

डार्क वेब के जरिए ‘लोन वुल्फ’ की हुई थी नियुक्ति

एनआईए  के अभियान में अलकायदा के नेटवर्क का पर्दाफाश होते ही पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया।  प्राथमिक जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आतंकी  डार्क वेब  के जरिए एक दूसरे से संपर्क करते थे। अभियुक्त सीधे तौर पर पाकिस्तान में बैठे आकाओं से बातचीत करते थे। पता चला है कि आतंकी हमले की साजिश, रुपये की लेनदेन, लॉजिस्टिक सहित सभी कार्य डार्क वेब के माध्यम से होते थे। डार्क वेब के जरिए ही आतंकियों की नियुक्ति की जाती थी। सोशल मीडिया के जरिए आतंकियों के वीडियो शेयर कर युवकों को प्रभावित किया जाता था।  एक बार जिहाद की तरफ प्रभावित होने वाले युवकों को सीधे संगठन में नियुक्त किया जाता था।  जाचं में पता चला है कि बंगाल से  गिरफ्तार सभी अलकायदा आतंकी लोन वुल्फ हैं। एक बार किसी को लोन वुल्फ बनाने के बाद उन्हें शीर्ष आतंकी निर्देश भेजना शुरू कर देते हैं। आईईडी से लेकर विभिन्न तरह के विस्फोटक बनाने की सामग्री कहां मिलेगी, कहां से खरीदें एवं उसे कहां भेजेंगे, सभी निर्देश डार्क वेब के जरिए भेजे जाते थे।
डार्क वेब के इस्तेमाल ने बढ़ायी जांच एजेंसियों की चिंता
डार्क वेब इस्तेमाल करने का फायदा यह है कि यह एक एनक्रिप्टेड प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए आने वाले निर्देश को  आईडेंटिफाई अथवा ट्रेस नहीं किया जा सकता है।  सोर्स कोड के माध्यम से ऑडियो क्लिप भेजकर एसाइनमेंट दिया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो  एक चिंता का विषय है क्योंकि किसी को भी पता नहीं चलेगा कि उसके पड़ोस में रहनेवाला युवक आतंकी है।

जेएमबी कर रहा है भारत में अलकायदा के विस्तार में मदद
अलकायदा ने जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए प्रवासी श्रमिकों को लेकर मॉड्यूल तैयार किया था। पकड़े गए 9 में से 8 आतंकी बंगाल के निवासी हैं।  एनआईए सूत्रों के अनुसार  राज्य में सक्रिय जेएमबी का सलाउद्दीन संगठन  बीते कई सालों से  राज्य में अलकायदा के विस्तार में मदद कर रहा है। एनआईए अधिकारियों  को संदेह है कि इस मॉड्यूल के साथ सीधे तौर पर जेएमबी का संबंध है।  प्राथमिक तौर पर  एनआईए अधिकारियों का कहना है कि अलकायदा का यह मॉड्यूल एक ‘लोन वुल्फ’ मॉड्यूल था यानी ऑनलाइन माध्यम से अलकायदा नेताओं के संपर्क में आकर संगठन से किसी भी तरह की मदद लिए बगैर अपने तरीके से तैयार किया गया मॉड्यूल है। एनआईए सूत्रों के अनुसार हाल ही में जेएमबी के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद संगठन के कमजोर पड़ने पर जेएमबी के नेता लगातार अलकायदा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अलकायदा नेताओं के कहने पर कई जगह जेएमबी के सदस्य ऑनलाइन माध्यम से लोगों को जिहाद की तरफ आकर्षित कर रहे हैं। यही नहीं केरल में पकड़े गए प्रवासी श्रमिकों के क्षेत्र में भी कुछ यही हुआ है।
क्या है लोन वुल्फ अटैक
लोन वुल्फ अटैक आतंकी संगठनों के जरिए आतंक फैलाने का नया जरिया बन गया  है। ये तरीका उनके लिए ज्यादा आसान है क्योंकि इसके लिए दहशतगर्दों को  किसी बड़ी योजना या साधनों की जरूरत नहीं पड़ती। हाल  के दिनों में  दुनियाभर में लोन वुल्फ अटैक में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। कई  मामलों में हमलावरों ने या तो खुद को खत्म कर लिया या फिर पुलिस से मुठभेड़  में वे मारे गए।
पश्चिमी यूपी से जुड़ा है मुर्शिदाबाद के आतंकियों का  तार
मुर्शिदाबाद व केरल में अलकायदा के संदिग्ध युवकों की  गिरफ्तारी के बाद मुरादाबाद मंडल के अमरोहा व बिजनोर  जनपद निशाने पर हैं। सूत्रों के मुताबिक  एनआईए की दो टीमें मुरादाबाद मंडल में अलकायदा  का नेटवर्क खंगाल रही है।  एनआईए से  जुड़े सूत्र बताते हैं कि पकड़े गए संदिग्धों में तीन का सम्बंध मुरादाबाद  मंडल से है। पूछताछ के आधार पर एनआईए की दो टीम मुरादाबाद मंडल में  दस्तक दे दी है। यहां से खुफिया एजेंसी पूर्व के मामलों की जानकारी जुटा  रही है। साथ ही नए मॉड्यूल का भी पता लगाया जा रहा है। अमरोहा व बिजनोर  जनपद एजेंसी के निशाने पर हैं। सूत्रों के मुताबिक सोशल मीडिया के माध्यम  से ये संदिग्ध नेटवर्क का संचालन कर रहे थे, साथ ही गोला-बारूद खरीदने के लिए  फंडिंग भी की जा रही थी।

‘अलकायदा आतंकियों ने आईईडी बनाने के लिए जमा किये थे पटाखे’

एनआईए द्वारा गिरफ्तार किये गये आतंकवादियों ने आईईडी बनाने के लिए पटाखे जमा किये थे। एनआईए सूत्रों का कहना है कि पोटैशियम से बने पटाखों को आईईडी बनाने के लिए रखा गया था और आईईडी से ही हमले की योजना भी बनायी जा रही थी। सूत्रों के अनुसार, हथियारों की डिलिवरी के लिए आतंकियों ने कश्मीर जाने की योजना भी बनायी थी। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘छापेमारी के दौरान एजेंसी को काफी पटाखे मिले। पटाखों से पोटैशियम लेने के लिए ये पटाखे खरीदे गये थे ताकि आईईडी बनाये जा सके।’ अधिकारी ने बताया कि पटाखों में पोटैशियम रहता है जिसे निकालकर उससे आईईडी बम बनाया जाता है। अधिकारी के अनुसार, छापेमारी में उन्होंने अर्धनिर्मित आईईडी के साथ स्वीच, बैटरी आदि भी बरामद की है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि टेरर मोड्यूल में हसन मुख्य था। गत 11 ​सितम्बर को अलकायदा ग्रुप के बारे में कुछ अहम सूचनाएं मिलने के बाद एनआईए ने मामला दर्ज किया था। छापेमारी के दौरान डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, जिहादी साहित्य, हथियार, घर में बम बनाने से संबंधित कई तरह की पुस्तकें आदि बरामद की गयीं।
जब्त विस्फोटक उच्चतम तीव्रता से युक्त
एनआईए सूत्रों ने बताया  कि जब्त  विस्फोटकों की मात्रा अधिक नहीं है, लेकिन यह उच्च गुणवत्ता और मारक  क्षमता  से युक्त है। हथियार भी सभी देसी लेकिन अच्छे कंडीशन में पाये  गये।  एनआईए को आशंका है कि सभी  आतंकी यहां धार्मिककार्यों की आड़ में अलकायदा के लिए जमीन मजबूत कर  रहे थे।
बम बनाने में माहिर थे सभी
सूत्रों ने बताया कि ये सभी बम बनाने में  माहिर थे। आईईडी की मदद से भी ये  बमों को बनाते थे। वहीं टाइम बम बनाने में  भी ये सभी माहिर बताये जा रहे  हैं।

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