फूल तरस रहे हैं अपने ग्राहकों के लिए, केवल 5% हो रही बिक्री

फूल किसानों के अरमान मुरझाये
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : फूल जिनकी खुशबू से पूरा माहौल खुशनुमा हो जाता है। फूल जो कभी मंदिर में भगवान की मूर्ति पर चढ़ाये जाते हैं तो कभी दरगाह और कभी शादी – ब्याह में जिनसे सजावट की जाती है, ये फूल अब अपने ग्राहकों के लिए भी तरस रहे हैं। फूल किसानों के अरमान अब मुरझा गए हैं। लगातार दूसरे वर्ष कोरोना और लॉक डाउन के कारण पश्चिम बंगाल में फूल की खेती करने वाले लाखों किसानों को बड़ा घाटा हुआ है। लॉकडाउन के चलते मंदिर, दरगाह और शादी बारात में सीमित लोगों की एंट्री ने फूलों की मांग न के बराबर कर दी है। कहीं फूल खेतों में ही सूख रहे हैं तो कहीं बाजार तक आ रहे हैं, लेकिन बिक्री काफी कम होने के कारण बचे फूलों को बाजार में ही फेंककर जाने को किसान मजबूर हो गये हैं। फूल मार्केट की स्थिति जानने के लिए सन्मार्ग की टीम मल्लिक घाट फूल बाजार पहुंची।
क्या कहा दुकानदारों और किसानों ने
मल्लिक घाट में फूल बेच रहे दुकानदार राम बाबू ने कहा, ‘हालत ठीक नहीं है, बिक्री काफी कम है। किसानों को फूल फेंककर जाना पड़ रहा है।’ मल्लिक घाट में ही रहने वाले एक दुकानदार रंजीत कुमार साव ने कहा, ‘बहुत खराब बाजार है। दिन भर बैठे रहते हैं, लेकिन बिक्री नहीं है।’ केएलसी थाना इलाके से फूल बाजार में काम करने आने वाले एक श्रमिक शैलेन ने कहा, ‘फूलों की बिक्री बिल्कुल ठीक नहीं है। बिक्री हो रही है, लेकिन काफी कम।’ वहीं ग्राहकों की राह देख रहे एक दुकानदार ने कहा, ‘रात में फूलों की बिक्री कुछ हो रही है, लेकिन दिन में नहीं। पहले जैसी बिक्री नहीं हो रही है।’ दुकानदारों से बदतर हालत किसानों की है। ट्रेनों के बंद रहने के कारण कई किसान एक साथ छोटा हाथी में फूलों को लेकर फूल बाजार तक आ रहे हैं, लेकिन बिक्री काफी कम होने के कारण बचे फूलों को फेंक कर जाना पड़ रहा है। वहीं सड़क से आने के कारण उनका समय भी अधिक लग रहा है और खर्च भी।
अलग – अलग जिलों से आते हैं फूल
मल्लिक घाट फूल बाजार परिचालन समिति के उपाध्यक्ष स्वपन बर्मन ने सन्मार्ग को बताया, ‘फूलों की बिक्री केवल सुबह के समय में 5% ही हो रही है। लॉकडाउन के कारण विभिन्न जिलों से खुदरा दुकानदार यहां नहीं आ पा रहे हैं जिस कारण बिक्री काफी कम है।’ उन्होंने कहा, ‘इस फूल बाजार से कोलकाता के अलावा हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना व आस-पास के जिलों में फूल जाते हैं। वहीं पूर्व मिदनापुर, हावड़ा के ग्रामीण इलाके, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, नदिया, भांगर आदि स्थानों से किसान यहां फूल लेकर आते हैं। शादी-ब्याह का मौसम होने के कारण कुछ फूल वहां लग जा रहे हैं और कुछ आस-पास के मंदिरों में। हालांकि इसके अलावा और फूलों की ​बिक्री नहीं हो रही है।’

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