फीस नहीं देने के कारण कोई बोर्ड परीक्षा से वंचित नहीं होगा : हाई कोर्ट

कोलकाता : किसी भी छात्र व छात्रा को बोर्ड की परीक्षा में बैठने से सिर्फ इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता है कि उसके अभिभावक फीस जमा नहीं कर पाए हैं। स्कूलों की फीस के मामले की सुनवायी करते हुए जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस मौसमी भट्टाचार्या के डिविजन बेंच ने यह बात कही। इस मुद्दे पर अगली सुनवायी में निश्चित आदेश दिया जाएगा। पैनडेमिक और लॉक डाउन के कारण आर्थिक संकट झेल रहे अभिभावकों की मदद के लिए विनीत रुइयां ने हाई कोर्ट में एक रिट दायर की थी। डिविजन बेंच ने उम्मीद जतायी कि बोर्ड की परीक्षा के लिए छात्र-छात्राओं की कागजी कार्यवाही पूरी करनी पड़ेगी। इसमें यह नहीं देखना पड़ेगा कि उसने फीस जमा की है या नहीं।

गुुरुवार की सुनवायी में एक फ्रेमवर्क तैयार होगा

इस मामले में पैरवी कर रही एडवोकेट प्रियंका अग्रवाल ने स्कूलों के लिए कमेटी बनाए जाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें शामिल किये जाने वाले अभिभावकों पर स्कूल का दबाव बना रहेगा। इसलिए इसे बनाने का मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। इसके बाद ही डिविजन बेंच ने विभिन्न विकल्पों की चर्चा करते हुए स्कूलों का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेटों से कहा कि वे आपसी सहमति से एक निर्णय पर पहुंचे। एडवोकेट प्रियंका अग्रवाल ने बताया कि सीएनआई के ग्यारह स्कूलों ने रियायत देने का फैसला लिया है, लेकिन जनरल वेबर के पक्ष में नहीं हैं। एसेंबली ऑफ गॉड चर्च की तरफ से पैरवी करते हुए एडवोकेट अमृता पांडे ने कहा कि उनके स्कूल में 39 छात्र-छात्राएं हैं, जिन्होंने कोई फीस जमा नहीं किया है, लेकिन उन्हें बोर्ड की परीक्षा में बैठने दिया जाएगा। सीएनआई के स्कूल एफिडेविट के रूप में अपना प्रस्ताव जमा करेंगे। गुुरुवार को होने वाली सुनवायी में एक फ्रेमवर्क तैयार कर लिया जाएगा जिसका अनुकरण सभी 145 स्कूल करेंगे।

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