प्लेन क्रैश ने झकझोर दिया है बंगाल के एविएशन से जुड़े लोगों को

कोलकाता : केरल प्लेन क्रैश ने पूरी दुनिया की नजरें भारत की ओर कर दी है। आखिर क्या कारण रहा जो कि यह हादसा हुआ। बिना छानबीन के कुछ भी कारण बता देना ठीक नहीं। यह कहना है कोलकाता के एविएशन जगत से जुड़े विशेषज्ञों का। इनमें एटीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ब्लैक बाक्स तो मिल चुका है। अब उसके अंदर के कॉकपिट व्यॉस रिकॉर्डर (सीवीआर) व फ्लाइट डाटा रिकाॅर्डर (एफडीआर) से पता चलेगा कि आखिर में हुआ क्या था। वहीं एटीसी अधिकारी से बातचीत के अंश में भी पता चलेगा कि कब लैंडिंग का समय दिया गया था और कब पायलट ने लैंडिंग की कोशिश की। एयर इंडिया की एक्सप्रेस फ्लाइट आईएक्स 1344 के एक्सीडेंट की खबर जब शुक्रवार रात को कोझिकोड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बाहर आयी तो राज्य के पायलटों की भी नजर इसी खबर पर रही। शनिवार को पूरा दिन वे इसके कारणों पर ही चर्चा करते रहे। कोलकाता के रहने वाले वरिष्ठ पायलट कैप्टन सर्वेश गुप्ता ने कहा कि फिलहाल सबकुछ हवा में की गयी बातें हैं। कई छोटे-छोटे कारणों से भी कोई बड़ा हादसा होता है। इस हादसे की असली वजह क्या है वह छानबीन में पता चलेगी। यहां पर हुए हादसे की एक वजह टेबलटॉप रनवे हो सकता है। वहीं अन्य पायलटों का कहना है कि इस एक्सीडेंट की वजह भारी बारिश के कारण गलत टचडाउन जोन चुनना हो सकता है।
क्या कहना है एटीसी अधिकारियों का
आईएक्स 1344 साउथ ईस्ट डायरेक्शन से लैंडिंग के लिए आ रहा था लेकिन मौसम इतना ज्यादा खराब था कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम भी मदद नहीं कर पाया। इसलिए पायलट ने तय किया होगा कि वह एक बार आसमान में चक्कर लगाकर दोबारा लैंडिंग की कोशिश करेंगे। वहीं कुछ का कहना है कि प्लेन का ब्रेक अंत में काम नहीं किया हो सकता है या टचडाउन पॉइंट क्रॉस कर दिया हो और जब टचडाउन किया, तो वह रनवे के बीच में पहुंच चुका था। प्लेन का ओवरशूट करना यानी रनवे पार कर जाना व रनवे के बीच में टचडाउन होने के बाद पायलट का स्पीड कम नहीं कर पाना भी एक कारण हो सकता है। सही जगह पर टचडाउन नहीं होने की भी दो वजहें हैं। पहली टेल विंड यानी पीछे की ओर से फ्लाइट के डायरेक्शन में बहती हवा। दूसरी हाईड्रोप्लेनिंग यानी रनवे पर पानी जमा होने से भ्रम होना।
कमेटी ने बताया था खतरनाक एयरपोर्ट
वर्ष 2010 की मैंगलोर विमान दुर्घटना की जांच कर रही कमेटी ने कोझिकोड एयरपोर्ट को खतरनाक बताया था। उल्लेखनीय है कि मंगलोर विमान हादसे में तकरीबन 160 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं केरल के इस क्रैश में आग लगती तो हादसा और भयावह हो सकता था।
भारत के खतरनाक टेबलटॉप रनवे
टेबलटॉप रनवे आमतौर पर पहाड़ के ऊपर होता है। इसमें ज्यादातर एयरपोर्ट के अगल-बगल खाई होती है। यहां विमानों की लैंडिंग करना बेहद कठिन होता है। लैंडिंग और उड़ान दोनों के दौरान पायलट को खासतौर पर सावधानी बरतनी होती है। देश में तीन ऐसे एयरपोर्ट हैं, जो बेहद ऊंचाई पर स्थित हैं और इन्हें टेबलटॉप रनवे कहा जाता है। इनमें एक केरल के मलाप्पुरम में स्थित कोझिकोड इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यहीं पर शुक्रवार को हादसा हुआ। दूसरा एयरपोर्ट कर्नाटक के मंगलोर में है जहां 2010 में हादसा हुआ था। तीसरा एयरपोर्ट मिजोरम में है।
अंतिम समय में भी पायलट ने निभायी जिम्मेदारी
एयर इंडिया के पायलट दीपक साठे की प्लेन हादसे में जान चली गई। लेकिन, उन्होंने अपने अनुभव और सूझबूझ से सैकड़ों पैसेंजर्स को बचा लिया। प्लेन में आग लग जाती तो बहुत से लोग मारे जाते। दीपक के कजिन और दोस्त नीलेश साठे ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि दीपक ने किस तरह प्लेन को आग लगने से बचाया। ‘प्लेन के लैंडिंग गियर्स ने काम करना बंद कर दिया था। दीपक ने एयरपोर्ट के तीन चक्कर लगाए, ताकि फ्यूल खत्म हो जाए। तीन राउंड के बाद प्लेन लैंड करवा दिया। उसका राइट विंग टूट गया था। प्लेन क्रैश होने से ठीक पहले इंजन बंद कर दिया। इसलिए एयरक्राफ्ट में आग नहीं लगी।
हुगली के रहने वाले केबिन क्रू अभिक ने बचायी कई यात्रियों की जान
कोझिकोड एयरपोर्ट के निकट घटे भयावह विमान हादसे में हुगली के कोन्नगर के रहने वाले युवक व केबिन क्रू अभिक विश्वास ने कई यात्रियों की जान बचायी। अभिक के पिता अजय विश्वास ने बताया कि दुर्घटना की रात तकरीबन साढ़े 9 बजे अभिक ने फोन करके उन्हें बताया कि फिलहाल वह सुरक्षित है। उसे हल्की-फुल्की चोटें लगी हैं। केबिन क्रू होने के नाते उसने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कई लोगों की जान बचाई। उसके पिता ने बताया कि तकरीबन 3 वर्ष पहले उसे केबिन क्रू की नौकरी मिली थी और वह पिछले दिनों दुबई से भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे वंदे भारत मिशन के तहत एयर इंडिया के फ्लाइट द्वारा दुबई से केरल स्थित कोझिकोड एयरपोर्ट पहुंचा था। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटे ने फोन पर बताया कि प्राथमिक चिकित्सा के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा उसे घर वापस भेजने की भी व्यवस्था की जा रही है। उसकी मां आरती विश्वास ने बताया कि टेलीविजन में इस हादसे की खबर सुनकर उनका कलेजा मुंह को आ गया था, लेकिन जैसे ही फोन द्वारा उनके बेटे की सलामती की खबर आई तो उनकी जान में जान आई। मां ने बताया कि उनका बेटा बचपन से ही आकाश की बुलंदियों और ऊंचाइयों को छूने की तमन्ना रखता था और इसी सपने को साकार करने के लिए उसने केबिन क्रू की नौकरी ज्वाइन की।

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