ममता का मोदी को पत्र… यहां पढ़िए एक-एक शब्द

केंद्र सरकार द्वारा बंगाल में भेजी गई टीमों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सख्त एतराज जताते हुए 3 पेज का पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में क्या-क्या लिखा है, एक-एक शब्द पढ़िए यहां। अंग्रेजी में लिखे गए पत्र की छवि भी यहां दी जा रही है और संक्षेप में उसकी हिन्दी भी…

सम्मानित प्रधानमंत्री

मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहती हूं कि आज केंद्रीय गृह मंत्री ने अपराह्न 1 बजे केंद्रीय अंतर मंत्रालयी टीम के राज्य दौरे के बारे में फोन पर बात की। दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से टीम कोलकाता एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की विशेष कार्गो विमान से सुबह 10.10 बजे ही पहुंच गई, अर्थात हमारी फोन पर बातचीत से बहुत पहले। 19 अप्रैल 2020 को केंद्रीय गृह मंत्रालय से जारी आदेश पत्र भी मुख्य सचिव को टीम के पहुंचे से मात्र 30 मिनट पहले मिला। मैं पश्चिम बंगाल में टीम भेजने की केंद्र सरकार की इस त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा करती हूं, लेकिन यह काम बिना अग्रिम सूचना के किया गया है, अतः यह तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

तीन पेज का है पत्र… पहले पेज पर ये लिखा…

उपरोक्त आदेश के अनुरूप जहां राज्य सरकार को टीम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करनी थी, टीम ने राज्य सरकार को पूरी तरह से अंधेरे में रखा और तमाम आवश्यकताओं के लिए सीधे बीएसएफ व एसएसबी जैसे केंद्रीय बलों से संपर्क किया और बिना राज्य सरकार से सलाह लिए दौरे पर निकल गयी। तय प्रक्रिया के अनुरूप उम्मीद की जाती है कि इलाकों में जाने से पहले केंद्रीय टीम राज्य सरकार के अधिकारियों से मंत्रणा कर लेती।

तीन पेज का है पत्र… दूसरे पेज पर ये लिखा…

उपरोक्त आदेश में कहा गया है कि यहां लॉकडाउन उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं और कुछ जिलों में स्थिति अति गंभीर है। ये आकलन तथ्यहीन हैं और दावों की पुष्टि नहीं करते। उदाहरण के तौर पर दौरे के लिए जिन जिलों का चयन किया गया है उसमें से कलिम्पोंग में संक्रमण का आखिरी मामला 2 अप्रैल को सामने आया था। इसी तरह जलपाईगुड़ी में संक्रमण का आखिरी मामला 4 अप्रैल तो दार्जिलिंग में आखिरी मामला 16 अप्रैल को सामने आया है। यह दिखाता है कि जिलों का चयन और आकलन एकतरफा, मनगढ़ंत और दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लॉकडाउन सुनिश्चित करने में राज्य सरकार सक्रिय है साथ ही संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के लगातार संपर्क में है।

मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन की घोषणा से पहले राज्य सरकार ने अति सक्रियता के साथ लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी और 14 अप्रैल को लॉकडाउन को बढ़ाने की घोषणा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 30 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया था।

तीन पेज का है पत्र… तीसरे पेज पर ये लिखा…

मुझे पूरा विश्वास है कि आप भी इस बात से सहमत होंगे कि केंद्र सरकार से ऐसी एकतरफा कार्रवाई की बिल्कुल उम्मीद नहीं है, खासकर तब, जब राज्य व केंद्र सरकार लगातार कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए दिन रात साथ मिल कर काम कर रही है।

सस्नेह,

सादर

ममता बनर्जी

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