पोस्ता के कायापलट से वर्ल्ड मैप पर आएगा यह इलाका

कई कठिन दौर से गुजरना होगा योजनाओं को जामा पहनाने में

‍ट्रांसपोर्ट व पार्किंग के अलावा पुराने मकान होंगे बड़ी चुनौती

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : आग की घटना हो या मकान ढहने की वजह से मौत का सामना या फ्लाईओवर के नीचे दबकर बेमौत मरने की घटना, महानगर का सबसे पुराना पोस्ता बाजार न जाने कितने ही ऐसी विनाशकारी घटनाओं का गवाह बन चुका है। भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न घटे उसके लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पोस्ता को विश्वस्तरीय बाजार में तब्दील करने की अपील की है। अपनी अपील के साथ मुख्यमंत्री ने पोस्ता बाजार मर्चेंट्स एसोसिएशन को प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री के इस प्रयास को सभी ने सराहा भी है मगर इस योजना को जामा पहनाने में कई कठिनाइयों से होकर गुजरना होगा इस बात का इल्म भी सभी को है।

कोलकाता के गेट-वे के नाम से विख्यात पोस्ता बाजार एशिया की सबसे बड़ी मंडी है जहां लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। पोस्ता मंडी से असम, बिहार, गुवाहाटी समेत पूर्वी हिस्से की अलग-अलग जगहों पर दालों व मसालों का आयात-निर्यात होता है। अब ऐसे में इस बाजार को विश्व स्तर में तब्दील करना न सिर्फ प्रशासन बल्कि यहां के व्यवसाइयों के माथे पर भी सिकन लाने का कार्य कर रहा है। हालांकि कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी ने सन्मार्ग से कहा कि मुख्यमंत्री की योजना प्रशंसनीय है। आगे 3 महीनों का वक्त है देखते हैं इसे विश्वस्तरीय बाजार बनाने के लिए क्या-क्या उपाय करना होगा।

कैसी है पोस्ता की मौजूदा स्थिति

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मानती हैं कि पोस्ता अति व्यस्त इलाका है। यहां की मंडियों में आने वाले लोगों को आवाजाही में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर ट्रकों की आवाजाही और वाहनों की पार्किंग बड़ी चुनौती है। यहां के अलावा अन्य राज्यों से भी ट्रक आकर यहां खड़े रहते हैं जिसकी वजह से जाम की समस्या बनती है। विपदजनक मकान यहां की दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण समस्या या है। चूंकि पोस्ता बाजार बहुत बड़ी मंडी है इसलिए यहां के मजदूरों का डेरा भी यहीं पर है जो रात के वक्त यहां के फुटपाथों पर अपनी रात गुजारते हैं।

कहां करनी होगी मशक्कत

द पोस्ता बाजार मर्चेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन श्यामसुन्दर अग्रवाल ने सन्मार्ग को बताया कि पोस्ता की कायापलट के लिए यहां के आलू, प्याज, मसाला, राजा कटरा व अन्य छोटे-छोटे एसोसिएशन को एकजुट होना होगा ताकि वह अपनी सहूलियत को देखते हुए इससे संबंधित विचार पेश करें। इसके अलावा लेबर यूनियन व ट्रांसपोर्टरों को भी साथ में लेते हुए काम करना होगा। इन सभी को एक करके देखें तो जाम, पार्किंग जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं जिसकी तालिका जगद्धात्री पूजा खत्म होते ही तैयार की जाएगी। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सीतानाथ घोष ने कहा कि सरकार अगर साथ देती है तो यह काम उतना मुश्किल नहीं है। हम सभी जल्द एक साथ बैठकर सभी समस्याओं को देखेंगे फिर प्राथमिकता के आधार पर उन समस्याओं की तालिका तैयार कर सरकार के पास पेश करेंगे। वर्किंग प्रेसिडेंट चंदन चक्रवर्ती ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर आगामी 1 महीने के भीतर 10 लोगों की कमेटी तैयार की जाएगी। रूपरेखा तैयार करने में सबसे बड़ी चुनौती मजदूरों की थी जो मौजूदा समयय में काफी हद तक सुलझ गयी। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यहां के गोदाम हैं जो कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के अंतर्गत आते हैं। कई जगह पर गोदाम हैं जो समय की मांग के अनुसार छोटे पड़ते जा रहे हैं। रही बात विपदजनक मकानों की तो इस पर फिलहाल कोई रजामंदी नहीं बन पा रही है।

पुराने मकानों की समस्या को सुलझाना नहीं होगा आसान

बड़ाबाजार के ज्यादातर इलाकों में अभी भी किरायेदार विपदजनक मकान में रहते हैं। अमूमन उनमें धारणा बनी हुई है कि जगह छोड़ने के बाद मकान मालिक उन्हें दोबारा जगह नहीं देगा, जबकि कोलकाता नगर निगम की तरफ से प्रस्ताव भी लाया गया है कि किरायेदारों की सुविधा के लिए मकान में अतिरिक्त 2 तल्ले का मकान बनाने की इजाजत दी जाती है।

एक नजर पोस्ता बाजार के इतिहास पर

जानकारों की मानें तो पोस्ता बाजार करीब 100 साल पुराना है। चावल व गेहूं को छोड़कर दालों की समस्त किस्म व मसालों के लिए देश का उत्तरी-पूर्वी इलाका इसी बाजार पर निर्भर माना जाता रहा है। बात करें राज्य की तो यहां के गांव-गांव में यहीं से दाल, मसाला, आलू और प्याज जाता है। इंग्लैण्ड से आये नमक पोस्ता बाजार से कुछ दूरी पर स्थित चांदपाल घाट पर रुकते थे जिसे नाव के जरिये यहां लाया जाता था। शुरुआती दौर में यहां चक्र रेल और नदी के माध्यम से आयात-निर्यात किया जाता था। राज्य के गांवों में जाने क लिए पक्षी नाव की व्यवस्था होती थी जो खालों में भी चलने में समक्ष होती थी। बदलते समय के साथ यहां आयात-निर्यात का जरिया भी अब ट्रकों पर निर्भर हो गया है।

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