पहले बेरोजगारी ने और अब कोरोना ने मारा

चाहते है हर महीने का 5 हजार रु. पर देगा कौन और कैसे
सन्मार्ग संवाददाता,कोलकाता : लॉकडाउन में ताे हर वर्ग पर ही आर्थिक मंडी की मार पड़ रही है मगर सबसे ज्यादा परेशानी रोज कमाने खाने वाले मजदूरों, कामगारों और हॉकरों को हो रही है। इनके पास न रोजगार है और ना ही कोई विकल्प। अब तक खाने पर भी नौबत आ गयी है। परिवार का अब पेट का सवाल बनता जा रहा है। घर में राशन खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। कईयों के घरों में खत्म हो भी चुके है। ये हॉकर भाई घरों में बैठकर क्या खाएं और कैसे बीवी-बच्चों का पेट कैसे पालें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। घर में फकाकसी की नौबत है। ऐसे में हॉकर्स केंद्र और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। महीने का कम से कम 5 हजार रु. देने की मांग कर रहे हैं। नेशनल हॉकर्स फेडरेशन और पश्चिम बंगाल हॉकर्स संग्राम कमेटी के जनरल सेक्रेटरी शक्तिमान घोष ने बताया कि हॉकर्स भाई बहनों की हालत बेहद ही दयनीय है। अब दो वक्त का पेट पालना भी मुश्किल हो रहा है। हमलोगों ने पीएम, अर्बन मंत्रालय और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगायी है। कम से कम 5 हजार रु. प्रति माह हॉकरों के खाते में मिले ताकि ऐसे लोगों का कुछ भला हो।
अन्य राज्यों का दे रहे हैं उद्हारण
शक्तिमान घोष ने बताया कि राजस्थान, आडिशा, हरियाणा, तमिलनाडू कई राज्यों में हॉकरों के लिए कई कुछ आर्थिक मदद की जा रही है। इसी तरह से बंगाल में भी हॉकरों के लिए लॉकडाउन के बीच आर्थिक मदद मिले। सीएम ममता बनर्जी को हमलोगों ने पत्र भेजा है।
रोजगार पर ताला, पेट पर लगने की नौबत
देशभर में हॉकरों की संख्या करीब 4 करोड़ के आसपास है। बंगाल में इसकी संख्या 16 और कोलकाता में करीब पौने 3 लाख हॉकर्स हैं। इनमें 30 % हॉकर्स ऐसे है जो सब्जी, मछली, फल, ग्रोसरी के सामान इत्यादि बेचते हैं। कोलकाता में 5 से 7 % स्थानीय हाॅकर्स है जबकि बाकी दूर दराज से आते हैं। अभी लॉकडाउन में उपनगरों से हॉकरों का आना बंद है। ऐसे में अब इन लोगों की खाने पर भी परेशानी आने लगी है।
राज्य सरकार दे चावल तो कईयों के भरेंगे पेट
शक्तिमान घोष ने बताया कि 16 मई से अगले एक महीने तक करीब 50 हजार कम्युनिटी किचेन तैयार करने का हमारा लक्ष्य है। इसमें राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है। अगर सरकार चावल देती है तो कईयाें के घरों में चूल्हे जलेंगे। कई लोगों के पेट भरेंगे।
क्या कहना है एमएमआईसी का
एमएमआईसी अमरूद्दीन बॉबी ने कहा कि हॉकरों के राशन पानी की व्यवस्था की जा रही है। हर पार्षद को कहा गया है कि कहीं भी कोई केवल हॉकर नहीं किसी को भी खाने की समस्या है तो उसके लिए भोजन की व्यवस्था करें।
यहां उल्लेखनीय है​ कि कई सेक्टरों में कामकाज में छूट मिली है मगर रास्ते पर बैठने वाले हॉकरों के लिए अभी तक हरी झंडी नहीं दिखाई गयी है। लॉकडाउन के एहतियात के तौर पर उन्हें मना किया गया है।

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