पंचायत चुनाव में अधिकारियों की अग्निपरीक्षा

कोलकाता : लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, कड़े सुरक्षा के बीच सोमवार को पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव होगा। यह चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक ओर अदालती आदेश के बाद हिंसा की घटनाओं को रोकना व पंचायत चुनाव में मतदाताओं की अधिक से अधिक भागीदारी बढ़ाना राज्य चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती होगी। विशेषकर अधिकारियों के लिए यह एक अग्निपरीक्षा है। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में एक तरह से यह आखिरी बड़ा चुनाव होगा। राजनीतिक दल 2019 के आम चुनावों से पहले इसे अपनी साख को मजबूत करने की ओर भी देख रहे हैं। वहीं बंगाल के इंतिहास में शायद यह पाहली बार है जब केवल 66% सीटों पर ही मतदान हो रहा है। हम यहां बताते चलें कि जिन 34% सीटों पर जहां निर्विरोध उम्मीदवार जीते थे, उन सीटों की अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।मतदान सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे समाप्त होगा। वहीं मतगणना 17 मई को होगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो राज्य चुनाव आयोग 15 मई को रिपोल करवा सकता है। वहीं मतगणना 17 को होगी।
वहीं राज्य चुनाव आयोग मतदान के ठीक पहले मालदह के रतुआ व दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ सहित कई अन्य जिलों में हिंसा से जुड़ी खबरों को लेकर काफी चिंतित है। बड़े पैमाने पर बिना प्रतिद्वंद्विता के ही तृणमूल ने कई सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में आयोग सूत्रों का कहना है कि जिला परिषद की 203 सीट, ग्राम पंचायत की 16814 सीट व पंचायत समिति की 3059 सीटों पर मतदान नहीं होगा।

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