नहीं था मधुमेह फिर भी अस्पताल में होता रहा इलाज

कोलकाता : साल्टलेक के निवासी बसंत कुमार दमानी ने दीशन हॉस्पिटल के खिलाफ हेल्थ कमीशन में शिकायत की थी। उनका आरोप था कि उन्हें किसी प्रकार का मधुमेह नहीं था। हालांकि जब वह अस्वस्थ होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए तो मधुमेह का इलाज किया गया। साथ ही उन्होंने बिलिंग संबंधी भी शिकायत की थी। इस मामले में वेस्ट बंगाल क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन के चेयरमैन जस्टिस असीम कुमार बनर्जी ने अस्पताल को मरीज को 50 हजार रुपये डिस्काउंट देने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने इस मामले में डॉ. शुभंकर चौधरी की एक्सपर्ट राय भी ली थी। इसमें पाया गया कि कई बार मरीज का शुगर लेवल बढ़ जाता है। हालांकि बाद में वह स्थिर हो जाता है। दूसरी तरफ सुप्रतिम पुरकायस्थ नामक मरीज ने बिलिंग संबंधित शिकायत ऑहियो हॉस्पिटल के खिलाफ की थी। इस मामले में हेल्थ कमीशन की ओर से मरीज को 17854 रुपये वापस दिए जाने का निर्देश दिया गया।

टेस्ट में टाइपिंग एरर लैब को टेस्ट के पैसे वापस देने का निर्देश

बारासात के लाल पैथ लैब में मरीज सूरजीत घोष ने एंडोस्कोपी करवाई थी।आरोप है कि यहां टेस्ट में टाइपिंग एरर के कारण एक गलती हो गई थी। बाद में मरीज ने अस्पताल में टेस्ट करवाया था, जहां की सब कुछ सामान्य निकला था। इस मामले में हेल्थ कमीशन की ओर से टेस्ट के शुल्क वापस दिए जाने का निर्देश दिया गया।

15 हजार डिस्काउंट का निर्देश

आरती नर्सिंग होम को मरीज मानस घोष को 15 हजार रुपये डिस्काउंट दिए जाने का निर्देश कमीशन की ओर से दिया गया।

 

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