नये-पुराने का मेल बढ़ा रहा तृणमूल में आपसी बैर !

घर वापसी करने वालों का अब खुलकर किया जा रहा विरोध
सन्मार्ग संवाददाता
काेलकाता : विधानसभा चुनाव में तृणमूल की तीसरी जीत की राह इतनी आसान नहीं थी जितना माना जा रहा था। कारण भाजपा जो पूरी शक्ति के साथ चुनावी दंगल में उतरी थी तथा अपना दमखम दिखाने के लिए भाजपा ने साम-दाम-दंड-भेद की नीति तक अपनायी। भाजपा की इन्हीं नीतियों में से एक खास नीति तृणमूल को तोड़ना था जिसके तहत कई तृणमूल के नेताओं को भाजपा में शामिल करवाया गया। अब जब राज्य में ममता सरकार बन चुकी है और घर के गये सदस्यों के हाथ कुछ नहीं आया तो लाजमी है वे निराश होकर घर वापसी की ही राह पकड़ेंगे। इस कड़ी में कुछ नेताओं ने घर वापसी भी की तो कुछ अभी भी कतार में इंतजार कर रहे हैं। कुर्सी की चाहत ने पार्टी बदलने पर तो विवश कर दिया लेकिन हार की शिकस्त ने घर वापसी करवाने के बाद नये-पुराने का मेल तृणमूल में ही आपसी बैर बढ़ा रहा है। इसकी कुछ झलकियां हाल में देखने भी मिली हैं।
हावड़ा में राजीव बनर्जी को लेकर बिफरे सांसद
राजीव बन​र्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली मुख्यालय में जाकर भाजपा का दामन थामा था। पार्टी ने टिकट भी दिया लेकिन जनता ने साथ देने से मना कर दिया। राजीव हार गये और तैयारी में जुट गये कि कैसे घर वापसी हो। लंबी जद्दोजहद के बाद राजीव का नंबर आया और त्रिपुरा में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बंद्योपाध्याय की अगुवाई में राजीव बनर्जी ने पुरानी पार्टी में वापसी की मगर पार्टी के नेताओं को यह रास नहीं आ रहा है। राजीव की वापसी के कुछ दिन बाद ही हावड़ा में तृणमूल सांसद प्रसून बनर्जी न सिर्फ मुखर हुए बल्कि सरेआम धमकी तक दे डाली कि राजीव बनर्जी हावड़ा में पैर रखने की गलती न करें वरना अंजाम बुरा होगा। इसके पहले श्रीरामपुर के सांसद कल्याण बनर्जी भी राजीव को लेकर लगातार अपनी नाराजगी जाहिर करते आये हैं।
हुगली में प्रबीर को लेकर आपसी द्वन्द्व
इधर तृणमूल के विधायक रह चुके प्रबीर घोषाल भी रुठ कर भाजपा के खेमे में गये तो थे लेकिन वहां अपनी ही सीट पार्टी बदलने के बाद बचा न पाएं। अब उनका मन भाजपा से ऊब चुका है। अपनी नाराजगी उन्होंने तृणमूल के मुखपत्र तक में जग-जाहिर कर दी और भाजपा की तमाम गलतियों को गिना दिया। प्रबीर ने कहा कि मन से वे भाजपा के नहीं हैं। वे तृणमूल में आना चाहते हैं लेकिन औपचारिक रूप से उनकी वापसी के आसार फिलहाल दिख नहीं रहे हैं। हालांकि घर वापसी से पहले ही उनके क्षेत्र उत्तरपाड़ा में तृणमूल के कुछ नेता उनकी वापसी नहीं चाहते हैं क्योंकि वे उन्हें गद्दार मानते हैं। उत्तरपाड़ा कोतरंग नगरपालिका के प्रशासक दिलीप यादव ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया तथा कहा कि प्रबीर को लेकर जो फैसला होगा वह पार्टी नेतृत्व ही लेगा।

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