धनखड़ के खिलाफ विधान सभा से संसद तक मोर्चाबंदी

कोलकाता : ऐसा पहली बार हुआ है जब विधानसभा में सत्ता पक्ष ने धरना दिया। कारण थे राज्यपाल जगदीप धनखड़, जिन पर विधेयकों को मंजूरी नहीं देने के लिए खूब नारे लगाए गये। विरोध की गूंज दिल्ली तक पहुंच गयी, ​जिसमें सुर मिलाते हुए तृणमूल सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। राज्यसभा में तृणमूल सांसदों ने राज्यपाल की भूमिका पर अपनी बात रखने की अपील की जिसे स्वीकार नहीं करने के कारण सांसदों ने वॉकआउट कर राज्यपाल को वापस बुलाओ का नारा लगाया। सड़क से संसद तक तृणमूल नेताओं ने राज्यपाल हटाओ के नारे लगाए तथा कहा कि एससी-एसटी विधेयक को राज्यपाल मंजूरी नहीं दे रहे हैं जिसकी वजह से विधानसभा को स्थगित किया गया।
‘मेरे सवालों का जवाब नहीं मिला’ इधर राजभवन के सूत्रों ने कहा कि जिस विधेयक को लेकर सड़क से संसद तक तृणमूल ने हो-हल्ला मचाया उसे लेकर राज्यपाल ने कुछ सवाल उठाया था जिससे संबंधित चिट्ठी उन्होंने विधानसभा के अध्यक्ष विमान बनर्जी को भेजी थी मगर उनकी ओर से उसका कोई जवाब राज्यपाल को नहीं मिला। यह बात खुद राज्यपाल ने संवाददाता सम्मेलन करके बतायी तथा कहा कि अगर सरकार बैलगाड़ी की रफ्तार से चल रही है तो मैं क्या करूं। मेरे पास एक फाइल भेज दी गयी, उसके बारे में मुझे अगर किसी से कोई जानकारी लेनी है तो मैं किससे पूछूं। 25 नवंबर से 29 नवंबर तक उनके कान पर जू तक नहीं रेंगी और उसके बाद सभी मिलकर शोर मचाने लगे। मैं संविधान के दायरे में रहकर अपना काम कर रहा हूं। चिट्ठी में राज्यपाल ने सरकार से विधेयक को लेकर पूछा है कि इसमें नया क्या है क्योंकि केंद्र सरकार के एससी-एसटी विधेयक में वह सभी बाते हैं जिसका उल्लेख इस विधेयक में किया गया है। इसके अलावा विधेयक में ​अमुक समुदाय की मदद करने का उल्लेख किया गया है, मगर वह मदद किस तरह की होगी। इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

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