दुर्गापूजा में कोलकाता था अल-कायदा के आतंकियों के निशाने पर !

 

कोलकाता : करीब 3 साल पहले भी बांग्लादेश के अलकायदा ने कोलकाता में अपना गढ़ बनाया था। उस समय कोलकाता पुलिस के एसटीएफ अधिकारियों ने अलकायदा आतंकियों सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इस बीच एक बार फिर एनआईए द्वारा मुर्शिदाबाद से अलकायदा के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। ऐसे में खुफिया अधिकारियों का सवाल है कि क्या दुर्गापूजा के दौरान आतंकी कोलकाता में हमले की साजिश रच रहे थे? इन सवालों का जवाब खोजने के लिए कोलकाता पुलिस के एसटीएफ अधिकारी रविवार को सॉल्टलेक स्थित एनआईए कार्यालय पहुंचे। इस दौरान एसटीएफ अधिकारियों ने गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ भी की।  कोलकाता पुलिस के एसटीएफ अधिकारियों के अलावा मुर्शिदाबाद के एडिशनल एसपी ने भी आतंकियों से पूछताछ की। वहीं विधाननगर पुलिस के एसीपी और सीआईडी अधिकारी भी एनआईए कार्यालय पहुंचे और अभियुक्तों से पूछताछ की। अभियुक्तों ने पूछताछ के दौरान जम्मू-कश्मीर के कई लोगों के नाम लिए हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार आतंकी देश के बड़े शहरों में हमले की फिराक में थे। ऐसे में सामने दुर्गापूजा के मद्देनजर एसटीएफ अधिकारियों को संदेह है कि कहीं आतंकियों के लिस्ट में कोलकाता भी तो नहीं था।
आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद कोलकाता पुलिस सतर्क
मुर्शिदाबाद से आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद से राज्य एवं कोलकाता पुलिस सतर्क हो गयी है। लालबाजार के एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता पुलिस किसी भी तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।  पुलिस के अनुसार वर्ष 2017 के नवंबर महीने में कोलकाता स्टेशन के पास से कोलकाता पुलिस के एसटीएफ ने अंसारूल्ला बांग्ला टीम के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया था। उक्त संगठन भारत में अलकायदा के शाखा के रूप में काम करता था। उक्त संगठन के सदस्य शमशाद मियां  और रेजाऊल इस्लाम ने कोलकाता के हथियार तस्कर मनोतोष से संपर्क किया था।
इसी दरौना पता चला था कि संगठन के सदस्यों ने कोलकाता में गढ़ बनाया है।  करीब तीन साल बाद अलकायदा आतंकियों के पास से बुलेट प्रुफ जैकेट व विस्फोटक सामग्रियों की बरामदगी की हुई है। जांच अधिकारियों का अनुमान है कि आतंकी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार आम तौर पर पूजा से पहले पुलिस सतर्क रहती है। इसलिए अभी से ही मेट्रो, शॉपिंग मॉल सहित अन्य जगहों पर पुलिस की नजर रहती है। इधर, जो आतंकी पकड़े गए हैं, वे दक्षिण भारत से कोलकाता होते हुए मुर्शिदाबाद जाते थे। ऐसे में उन्होंने कोलकाता में उनका कोई साथी है या नहीं इसका पता लगाया जा रहा है।

गिरफ्तारी से पहले अबु सुफियान ने कई लोगों को किया था फोन

एनआईए के हत्थे चढ़े अलकायदा के आतंकी अबु  सुफियान को शायद पहले ही अपनी गिरफ्तारी का आभास हो गया था। इसलिए शुक्रवार की देर रात गिरफ्तारी से पहले उसने कई फोन कॉल्स किये थे।  उस रात अबु सुफियान ने किन-किन लोगों को फोन किया, इसे लेकर एनआईए अधिकारी चिंतित हैं।  सूत्रों के अनुसार अबु सिफयान के फोन से शुक्रवार की रात किए गए फोन कॉल्स को एनआईए अधिकारी ट्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं। एनआईए सूत्रों के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए  अबु सुफियान ने दीवार  फांदकर भागने की कोशिश की थी  लेकिन उसकी यह कोशिश नाकाम रही। एनआईए अधिकारियों की मानें तो गिरफ्तारी से पहले अबु सुफियान अपने मॉड्यूल के कुछ सदस्यों और गुप्तचरों को फोन किया था। उन लोगों का पता लगने पर बड़ी सफलता मिल सकती हैं।
एक साल से आतंकी गतिविधियों में लिप्त था अबु सुफियान
एनआईए सूत्रों के अनुसार अभियुक्त अबु सुफियान ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह पहले टेलरिंग का काम करता था। एक साल पहले उसने अपनी दुकान बंद कर दी थी।  दुकान बंद करने के बाद वह घर पर ही रहता था। अभियुक्त ने बताया कि घर से वह युवाओं को अलकायदा के लिए नियुक्त करने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी मुहैया कराता था। इस बीच वाट्स ऐप सहित अन्य माध्यम से उसे दिशा-निर्देश आते थे। उसे हर महीने अज्ञात व्यक्ति घर पर आकर रुपये दे जाते थे। उसी रुपये से उसने कुछ महीने पहले सुरंग वाले कमरे को बनाया था। उक्त कमरे में वह किसी को भी जाने नहीं देता था। उसने अपने आकाओं से मिले प्रशिक्षण के अनुसार आईईडी बनाना चालू किया था।  एनआईए सूत्रों के अनुसार अभियुक्त ने पूछताछ के दौरान कई धार्मिक किताबों का उल्लेख किया है। उक्त किताबों के जरिए ही अभियुक्त युवाओं को जिहाद के प्रति आकर्षित करता था।  फिलहाल अभियुक्त से पूछताछ कर उसके अन्य साथियों का एनआईए अधिकारी पता लगा रहे हैं।

दो महीने से लैपटॉप के साथ व्यस्त था नाजमूस

डोमकल के गंगादासपुर के निवासी और इलाके के मेधावी छात्र नाजमूस शकीब के आसपास रहने वाले लोगों और उसके सहपाठियों ने बताया कि वह पिछले दो माह से काफी रिजर्व हो गया था। एक गैरसरकारी इंजीनियिंग कालेज से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे नाजमूस के परिजनों ने बताया कि वह लैपटॉप लेकर घर में अपने कमरे में बंद रहता था। किसी से बातचीत भी नहीं कर रहा था।  एनआईए के अधिकारी उसके लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य सामानों को जब्त कर अपने साथ ले गये हैं।  उसके इस तरह गिरफ्तार होने से परिवार काफी दहशत में है। बताया जाता है कि एनआईए के अधिकारी जब शनिवार सुबह उसे गिरफ्तार करने पहुंचे तब भी उसके चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी।

मुर्शिदाबाद पुलिस अलर्ट मोड पर

मुर्शिदाबाद जिले में  एनआईए के अभियान के बाद जिला पुलिस अलर्ट मोड पर है।   अलकायदा आतंकियों की गिरफ्तारी से जिला पुलिस भी सकते  में है। जिले के लालगोला, रानीतला, फरक्का, सूती, भगवानगोला सहित आसपास के  इलाकों में नजरदारी बढ़ायी गयी है। जिला पुलिस अधीक्षक के शबरी कुमार ने  बताया कि थानों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के आदेश दिये गये हैं।
एंड्रायड फोन चलाना नहीं जानता है मामून
वहीं डोमकल का अल मामून कमाल गत 15 सालों से राजमिस्त्री का काम कर रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने पर वह केरल से घर लौट आया था। परिजनों का दावा है कि वह एंड्रायड फोन का इस्तेमाल तक नहीं करना जानता था फिर वह आतंकियों के बहकावे में आकर अलकायदा में कैसे शामिल हो गया, यह लोगों की समझ से परे है। बताया जाता है कि वह जलंगी के मधुवन निवासी याकूब विश्वास, मोइनूल मंडल भी केरल में राजमिस्त्री का काम कर रहे थे। गांव के लोगों का दावा है कि मोइनूल धार्मिक प्रवृत्ति का है। वह नियमित नमाज पढ़ता था और लोगों के समक्ष हमेशा धार्मिक बातें कर उन्हें धर्म के प्रति आकर्षित करता था।
अतिउर के पिता ने कहा एनआईए से हुई कोई भूल
जलंगी के घोषपाड़ा निवासी अतिऊर रहमान और मुशर्रफ हुसैन रिश्ते में भाई हैं। अतिऊर नेताजी ओपेन यूनिवर्सिटी में बीए प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता ताजिमुद्दीन मंडल ने बताया कि बेटा पढ़ाई में ही लगा रहता था।  वह किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है, इस बात की जानकारी परिवार के किसी सदस्य को नहीं था। उन्होंने यहां तक दावा किया कि संभवतः एनआईए के अधिकारियों से कोई भूल हुयी है।
‘गुप्त सुरंग नहीं सेप्टिक टैंक की टंकी’
वहीं रानीनगर के कालीनगर निवासी अबु सुफियान जो दिखावे के लिए दर्जी का काम कर रहा था।   रविवार को उसके घर में जांच के दौरान एनआईए को एक सुरंग का पता चला और जांच के दौरान पाया गया कि उसके घर के अंदर काफी गहरा लगभग छह फीट गहरा और 4-4.5 फीट चौड़ा एक निर्माण बनाया गया था। परिजनों ने इसे सेप्टिक टैंक की टंकी करार दिया तो एनआईए के विशेषज्ञों ने इसे गुप्त सुरंग करार दिया। बताया जाता है कि सेप्टिक टैंक की बनावट पूरी तरह कंक्रीट की होती है जबकि इसकी दीवारों में ईंट लगी थी। इसकी जांच की जा रही है।

एनआईए कार्रवाई पर राजनीतिक दलों में चर्चा जोरों पर

एनआईए द्वारा बंगाल से 6 आतंकियों को गिरफ्तारी के बाद से राजनीतिक दलों में भी चर्चा का माहौल है। इसे लेकर भाजपा नेता सायंतन बसु ने कहा कि “एनआईए की टीम ने  दिल्ली से पहुंकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यदि राज्य की पुलिस को बताया जाता तो शायद आतंकी भाग निकलते। यह देखा जाना बाकी है कि क्या उन्हें राजनीतिक समर्थन मिल रहा था। जरूरत है कि एनआईए जांच के दौरान राजनीतिक पहलू का भी ध्यान रखे। संभव है कि एनआईए और जगहों पर भी तलाशी चलाएगी। दूसरी ओर, सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा, यह बहुत चिंता का विषय है। जाति या धर्म की परवाह किए बिना अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आतंकी छिपकर बैठे हुए थे, तो राज्य सरकार क्या कर रही थी।

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