दबाव व वेतन कटौती के बाद भी एंपायर में कार्यस्थगन से मजदूरों में भारी रोष

कहा-मनमाने तरीके से मिल बंद कर प्रबंधन कर रहा है शोषण
स्थितियों को देखते हुए मिल प्रबंधन के साथ बैठक की गयी है – मलय घटक, श्रम मंत्री
पहले मिल खोले, उसके बाद बाकी समस्याओं पर बात होगी – संजय राय, तृणमूल जूट एंड टेक्साटाइल वर्कर्स फेडरेशन के सचिव
टीटागढ़ : टीटागढ़ की एंपायर जूट​ मिल में सोमवार की सुबह अचानक कार्यस्थगन की नोटिस लगा देने से मिल में काम करने वाले हजारों मजदूरों के सामने रोजीरोटी का संकट आ गया है। लॉकडाउन की भारी आर्थिक तंगी के दौर से गुजरे श्रमिकों में इस तरह से कार्यस्थगन को लेकर उबाल है। उनका कहना है कि प्रबंधन ने बिना कोई बातचीत के ही मिल गेट पर नोटिस लगा दी और अब बैठक कर मिल खोलने की बात को भी टाल रहा है। श्रमिकों व यूनियन नेताओं का आरोप है कि मिल प्रबंधन मिल को चलाना ही नहीं चाहता। मिल के श्रमिकों का कहना है कि यहां चाहे स्थायी हो या अस्थायी श्रमिक सभी प्रबंधन के शोषण का शिकार हैं। उनकी बातों को सुननेवाला कोई नहीं है। ना ही प्रबंधन के अधिकारी यहां के यूनियन नेताओं को ही महत्व देते हैं। यहां तक कि कोई श्रमिक अगर आवाज उठाता है तो उसे गेट बाहर किये जाने की धमकी मिलती है। इन समस्याओं को लेकर श्रमिक यूनियन नेताओं ने बात श्रम मंत्री मलय घटक तक पहुंचायी है जिसके बाद मंगलवार की शाम ही मामले को लेकर बैठक बुलायी गयी।
क्या कहना है कि श्रमिकों का
मिल के स्थायी कर्मी ब्रजकिशोर सिंह ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने प्रोडक्शन कम होने का हवाला देकर मिल में कार्यस्थगन किया है मगर इसके पीछे के असल कारणों को देखने की कोशिश नहीं की है। असल में यहां के आधे से अधिक श्रमिक अस्थायी हैं और कॉन्ट्रैक्टर के जरिये काम कर रहे हैं। ऐसे में स्थायी श्रमिकों व अस्थायी श्रमिकों से समान काम लेना प्रबंधन की भूल है। इससे प्रबंधन ही मिल के श्रमिकों में असंतोष पैदा करता है। उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए जरूरी है श्रमिकों को उस हिसाब के पैसे भी दिये जायें। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि मिल के स्थायी श्रमिकों को सरकारी नियमानुसार ईएसआई की सुविधा मिलनी चाहिए मगर यहां के ज्यादातर स्थायी श्रमिकों को इससे भी वंचित रखा गया है। वहीं चाइना मशीन चलाने वाले धमेंद्र राम ने कहा कि प्रबंधन स्थायी व अस्थायी श्रमिकों में काफी पक्षपात करता है, जहां स्थायी श्रमिक को एक दिन का 500 रुपये वेतन मिलता है तो वहीं कॉन्ट्रैक्टर से ​जरिये यहां काम करने वाले श्रमिकों को 250 रुपये दिये जाते हैं मगर काम उनसे उतना ही लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग के अनुरूप प्रोडक्शन नहीं दे पाने वाले श्रमिक का वेतन भी काट लिया जाता है फिर भी वे मिल में काम कर रहे हैं ताकि उनका घर चल सके। इसके बाद भी प्रबंधन ने मनमानापन दिखाकर मिल को बंद कर दिया है। अन्य श्रमिकों ने आरोप लगाया कि घटिया क्वालिटी के कच्चे माल से प्रोडक्शन का बढ़ना संभव नहीं है। यह जानते हुए भी उन पर प्रोडक्शन बढ़ाने का दबाव दिया जा रहा है और मिल को इस तरह से बंद कर दिया गया है ताकि श्रमिकों को पैसे न देने पड़े।
श्रममंत्री ने की बैठक, पहले मिल खोलने पर दिया गया जोर
टीटागढ़ एंपायर जूट में कार्यस्थगन को लेकर श्रममंत्री तक बात पहुंचायी गयी और इस बात को प्रशासन ने पूरी गंभीरता से लिया है। श्रम मंत्री मलय घटक ने इस बाबत प्रबंधन व ज्वाइंट लेबर कमिश्नर के साथ मंगलवार की शाम बैठक भी की। श्रममंत्री ने कहा कि मिल को खोलने को लेकर बैठक की गयी है। वहीं तृणमूल जूट एंड टेक्सटाइल्स वकर्स फेडरेशन के सचिव संजय राय ने कहा कि मिल को खोलने के लिए प्रशासन ने बैठक में जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले मिल खोलने की बात कही गयी है। बाकि समस्याओं को लेकर बाद में बात होगी। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन किसी भी हाल में जूट मिल को बंद रखने के पक्ष में नहीं है।
लगातार संपर्क करने के बाद भी प्रबंधन पक्ष का नहीं मिला जवाब
मिल में कार्यस्थन को लेकर प्रबंधन अधिकारियों से लेकर मिल के मालिक से लगातार संपर्क करने की कोशिश की गयी मगर उनका जवाब नहीं मिल पाया। उनका फोन लगातार बंद पाया गया है, ना ही उनकी ओर से किसी मैसेज का ही जवाब दिया गया।

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