जेएमबी अब बदले नामों के साथ बंगाल सहित देशभर में सक्रिय

 


कोलकाताः
भारत या कहें इस पूर्वी क्षेत्र से लेकर नेपाल की सीमा और दूर केरल तक केवल आईएस या अल कायदा ही सक्रिय नहीं है बल्कि बदले हुए नामों के साथ जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश के कई स्लीपर सेल काम कर रहे हैं। जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश ने अपना नाम बदल कर जमात उल मुजाहिदीन, बंगाल कर लिया है और इसका उद्देश्य है बंगाल सहित आसपास के क्षेत्रों को बांग्लादेश में मिलाकर ढाका की वर्तमान सरकार को उलट देना और वहां एक ऐसी सरकार की स्थापना करना, जो उनके माफिक हो। सन् 2005 में बांग्लादेश में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद कुख्यात आतंकी हिदायतुल्लाह वहां से बचकर निकल भागा और पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में एक मकान में किराएदार के रूप में रहने लगा। हिदायतुल्ला ने अपने नये मकान के पते पर वह सारे कागजात बनवा लिए, जो उसे भारत का नागरिक साबित करते हों, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि। यहां तक कि उसने अपने मकान मालिक की बेटी से शादी भी कर ली ताकि पुख्ता सबूत हो कि वह भारतीय है।

यह तो इस वर्ष पता चला कि उसे बंगाल को और पूर्वोत्तर भारत को भारत से अलग करने के लिए आंदोलन को हवा देने का काम सौंपा गया था और उसने देशभर में कई स्लीपर सेल्स बना लिए और धीरे-धीरे हथियार इकट्ठे करने लगा। वह लोगों को विशेषकर सुरक्षा एजेंसियों को अंधेरे में रखने के लिए एक मस्जिद में इमामियत करने लगा। बांग्लादेश में उसका कार्य क्षेत्र भारत का सीमावर्ती इलाका तो था ही साथ ही वह इलाके भी थे जहां कट्टरपंथी इस्लामिक कैडरों ने अपना डेरा जमा रखा था। नतीजा यह हुआ कि कट्टरपंथियों से अपने पुराने परिचय का लाभ उठाकर वह वहां से लोगों को बुलाने लगा। खबर है कि विभिन्न कट्टरपंथी विजा लेकर आते थे और देशभर में घूम-घूम कर स्लीपर सेल्स गठित करते थे। इन स्लीपर सेल्स में छोटे दर्जे के मजदूर और कुछ ऐसे ही लोग शामिल थे, जो काम करने के नाम पर लोगों के घरों में जाते थे और उनका विवरण एकत्र करते थे। उन विवरणों के माध्यम से उनकी साइबर खुफियागीरी होती थी। जून के महीने से चीन ने इनकी मदद शुरू की और धीरे-धीरे इनका ज्यादा प्रसार हो गया। खुफिया सूत्रों के अनुसार हिदायतुल्ला के बारे में हवा लग गयी और उसके खिलाफ गोपनीय निगरानी शुरू हो गयी। उससे मिलने जो बांग्लादेशी आते थे और विजा- पासपोर्ट इत्यादि दिखाकर यह विश्वास दिलाते थे कि उनका आना वैध है, वही लोग देश के विभिन्न भागों में जाकर अहले हदीस का प्रचार करते थे। जिन लोगों को अहले हदीस की दावत में शामिल किया जाता था, वह इनके द्वारा चुने हुए ऐसे लोग थे, जिनसे काम ले सकें। इन्हें मस्जिदों के भीतर या मदरसों में हथियार जोड़ने एवं विस्फोटक तैयार करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। बाद में उन्हें स्लीपर सेल्स में या तो शामिल कर लिया जाता था या उनके साथ कुछ और लोगों को लेकर नया स्लीपर सेल गठित कर दिया जाता था। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को जब मुकम्मल यकीन हो गया तो वहां छापे डाले गए और हिदायतुल्ला और उसके साथियों को अगस्त के पहले हफ्ते में गिरफ्तार कर लिया गया। उसके नाम पर उत्तर 24 परगना के बादुरिया थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी है। हिदायतुल्ला का यह मामला बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन को भेजा गया है क्योंकि सीरियल बम ब्लास्ट में इन लोगों की तलाश थी।

बांग्लादेशी खुफिया सूत्रों के अनुसार हिदायतुल्ला निहायत चालाक और खतरनाक व्यक्ति है और बहुत संभावना है कि  वहां की सरकार हिदायतुल्ला के प्रत्यर्पण के लिए भी भारत सरकार से कह सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिदायतुल्ला अब धीरे-धीरे स्लीपर सेल्स को एक्टिवेट कर रहा था और 15-20 दिनों के बाद उनकी कारगुजारियां शुरू हो जातीं। फिलहाल उससे गहन पूछताछ चल रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि बंगाल सहित देश के विभिन्न भागों में कहां कहां स्लीपर सेल्स छिपे हैं और उनकी शिनाख्त कैसे होगी साथ ही हथियारों के भंडार कहां छिपा रखे हैं। यही नहीं, इन लोगों ने एक और नाम से काम करने की योजना बनाई थी, वह था- जेएमआई यानी जमात उल मुजाहिदीन, इंडिया। यह दूसरा चरण शुरू होता लेकिन खुफिया सूत्रों ने उसको पहले ही चरण के पूर्व उठा लिया। देखना है कि आगे क्या क्या होता है।

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