जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए इंतजार करना पड़ सकता है पश्चिम बंगाल को

 

नई दिल्ली : 5 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक है | कोरोना संकट के बीच जीएसटी मुआवजे के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कर्ज योजना का विकल्प नहीं चुनने वाले राज्यों को क्षतिपूर्ति भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है | पश्चिम बंगाल समेत दिल्ली, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना ने केंद्र सरकार के कर्ज योजना विकल्प के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है | इन 10 राज्यों को कर्ज योजना का विकल्प नहीं चुनने के कारण भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है | अब ये देखना है कि 5 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इन 10 राज्यों का रुख क्या रहता है |

21 राज्यों ने चुना कर्ज योजना का विकल्प

केंद्र सरकार की कर्ज योजना का विकल्प 21 राज्यों ने चुना है, जिसमें एक राज्य पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार है | आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर केंद्र की ओर से दिए जाने वाले जीएसटी मुआवजे की कमी को पूरा करने के लिए 21 राज्यों ने जीएसटी काउंसिल की ओर से प्रस्तावित ‘उधार’ विकल्प को चुना है |  मणिपुर ने पहले पहले ना करने के बाद प्रस्ताव पर सहमति दे दी, मणिपुर ने पहले ऑप्शन-2 का विकल्प चुना था, लेकिन बाद में ऑप्शन-1 में तब्दील कर केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर हामी भर दी |

जून 2022 तक करना होगा इंतजार

सूत्रों के अनुसार अंदाजा लगाया जा रहा है कि एक-दो दिन में कुछ दूसरे राज्य भी अपना ‘उधार’ विकल्प देने पर सहमति जता देंगे | वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की उपस्थिति है | जीएसटी एक्ट के अनुसार, किसी भी मुद्दे पर मतदान के लिए केवल 20 राज्यों को ही कोई प्रस्ताव पारित करना होगा | अगर अन्य राज्य 5 अक्टूबर 2020 को जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले अपने विकल्प नहीं बताते हैं, तो उन्हें जून 2022 तक इंतजार करना होगा |

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