जनजीवन को पटरी पर लाने में जुटी सेना व एनडीआरएफ की टीम

सन्मार्ग संवाददाता,कोलकाता : चक्रवात के कारण कोलकाता सहित बंगाल के आठ जिले बुरी तरह से प्रभावित है। सैकड़ों पेड़ गिर गये है। पानी बिजली का महासंकट है। जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए आखिरकार शनिवार को सेना रास्ते पर उतरी और गिरे पेड़ो को काटने व हटाने का काम शुरू कर दिया। इस कार्य में एनडीआरएनफ के दल कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हुए है। सेना और एनडीआरएफ के दलों ने रविवार को वन विभाग और नगर निकायों की चक्रवात से तबाह जनजीवन को फिर से पटरी पर लाने में मदद की। ये दल पेड़ों के उखड़ने से बाधित हुई सड़कों और मुख्य मार्गों को साफ करने के लिए सुबह सॉल्टलेक, बेहला और गोलपार्क सहित कई इलाकों में पहुंचे। एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि सड़क और पेड़ों को साफ करने वाले उपकरणों से लैस सेना के जवानों ने बेहला में रॉय बहादुर रोड और पर्णश्री, दक्षिण कोलकाता में बालीगंज और सॉल्टलेक इलाके में काम करना शुरू किया। कोलकाता और उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना जिलों के विभिन्न हिस्सों में सेना की पांच टुकड़ियों को तैनात किया गया।
38 एनडीआरएफ की टीमें राज्य के 19 हिस्सों में तैनात
एनडीआरएफ के एक कमांडेंट निशिथ उपाध्याय ने कहा कि कुल 38 एनडीआरएफ की टीमों को राज्य के 19 हिस्सों में तैनात किया गया है। कोलकाता में 19 टीम काम कर रही है। उन्होंने बताया कि जिलों में भी टीम निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उन्हें सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित कर दिया है और आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
6 जिलों में अग्रिम तैनाती से जानमाल का न्यूनतम नुकसान
कमांडेंट ने यह भी कहा कि राज्य के 6 जिलों में कर्मियों की अग्रिम तैनाती से जानमाल का न्यूनतम नुकसान सुनिश्चित करने में मदद मिली। हमलोग सही समय पर निकासी संचालन अभियान चलाये। साथ ही चक्रवात आने से पहले ग्रामीण इलाकों में स्थानीय भाषाओं में जागरूकता कार्यक्रम किये। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने के लिए कहा। उपाध्याय ने दावा किया कि कोलकाता और उसके आसपास के जिलों की लगभग सभी प्रमुख सड़कों को साफ कर दिया गया है। संलग्न इलाकों से भी पेड़ों को हटा दिया गया है।
पटना से आयी कई टीमें, लाइफ डिटेक्टर इंस्ट्रमेंट का किया जा रहा इस्तेमाल
एनडीआरएफ फर्स्ट बटालियन के कमांडेंट विजय सिन्हा ने कहा कि पटना से पांच टीमें आयी है। हर टीम में 20 – 30 कर्मचारी हैं जो वॉर फुट पर अत्याधुनिक उपकरणों के साथ काम में डटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस संदेह पर कि कहीं कोई मलबे के नीचे दबा तो नहीं, इसकी जांच के लिए लाइफ डिटेक्टर इंस्ट्रमेंट का उपयोग करते हैं। यह उपकरण किसी व्यक्ति के दिल की धड़कन का पता लगा सकता है। पता लगाने के बाद, ढेर में एक दो या तीन इंच का छेद बनाया जाता है और मलबे के नीचे पड़े व्यक्ति का पता लगाने और बचाव के लिए वीएलसी डाला जाता है। 2015 में नेपाल और बिहार में बड़े पैमाने पर भूकंप के बाद बचाव अभियान में इन साधनों से काफी मदद ली गयी थी।

शेयर करें

मुख्य समाचार

पेट दर्द में कब आती है अस्पताल जाने की नौबत ? बड़ी खतरनाक ये 8 बीमारियां

कोलकाता : पेट दर्द तेज होने पर डॉक्टर के पास जाएं या न जाएं, कई बार ये तय करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। इमरजेंसी आगे पढ़ें »

8 को वाममोर्चा कर सकता है उम्मीदवारों की घोषणा

वाम-कांग्रेस-आईएसएफ के बीच जटिलता लगभग समाप्त कोलकाता : काफी जटिलता के बाद वाम-कांग्रेस-आईएसएफ के बीच चुनावी समझौता अब अपने अंतिम दौर में है। कांग्रेस और आईएसएफ आगे पढ़ें »

ऊपर