छठव्रतियों ने साफ किया रवींद्र सरोवर, पौधारोपण को भी तैयार

कोलकाता : आस्था से जुड़े लोकपर्व महाछठ को कुछ श्रद्धालुओं ने रवींद्र सरोवर में भक्ति-भाव से मनाया गया। इस बात का ध्यान रखते हुए कि रवींद्र सरोवर कोलकाता की धड़कन हैं, यह महज झील नहीं बल्कि देश की बड़ी 10 झीलों में से एक हैं ​जिससे पर्यावरण संरक्षित हो रहा है। यहां आये छठव्रतियों ने जितने उत्साह से यहां पूजा की उतने ही हर्षोल्लास से सरोवर के कोने-कोने की सफाई भी की। करीब 100 युवकों के दल ने सरोवर की सफाई में हिस्सा लिया। किसी ने पानी से फूल या अन्य सामग्री निकाल कर झील साफ की तो किसी ने झाड़ू लगाकर कूड़ा-करकट साफ किया। एक दल तो ऐसा था जिसने सरोवर परिसर में गिरे सामानों को बकायद बिनबैग में डाल कर गंदगीमुक्त किया। छठव्रतियों की तरफ से सरोवर प्रबंधन से वहां पौधा लगाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। वहां सफाई करने पहुंचे युवकों ने कहा कि हमने बड़ी ही श्रद्धाभाव से परिवार समेत छठ पूजा संपन्न की है। लोगों की भीड़ होने के कारण अगर यहां हरियाली प्रभावित हो रही है तो हमें आपत्ति नहीं होगी कि हम यहां पौधारोपण करें। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि देश के इस धरोहर का हम सभी मिलकर संरक्षण करें।
छठ पूजा से पहले ही युवाओं ने कहा था हम करेंगे सफाई
हर साल यहां करीब 30,000 छठव्रती पूजा के लिए आते थे मगर इस बार इनकी संख्या काफी कम थी। जो लोग ​किसी कारणवश कहीं ओर नहीं जा पाए उन लोगों ने यहां छठ पूजा की। चूंकि यह पर्व आस्था से जुड़ा है और कई लोग मानते है कि छठ घाट को बार-बार बदला नहीं जाना चाहिए, इसलिए उनकी तरफ से रवींद्र सरोवर में ही छठ पूजा की गयी। यहां पूजा करने आए लोगों ने पहले ही कह दिया था कि यह हमारी आस्था की पूजा है इसका मतलब यह नहीं है कि हम सरोवर को गंदा करेंगे। इसकी सफाई हमारी प्राथमिकता होगी जिसे उसी शिद्दत से निभाया भी गया।
ये देखकर भी क्यों नजर बंद किए है मीडिया का एक वर्ग
रवींद्र सरोवर में आये छठव्रतियों ने जिस तरह प्राथमिकता दिखाते हुए सरोवर के अंदर या बाहर सफाई की यह उनकी समझदारी को दर्शाता है। इसके विपरीत मीडिया का एक ऐसा वर्ग भी है जो ये सब देखकर भी आंखे मूंदे हुए है। ऐसा लगता है मानों चंद मिनटों की पूजा से (जिसमें ऐसी किसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं होता जो रसायन हो उससे) सरोवर दूषित हो रहा है और यहां छठ रोकने का ठेका इन्हीं कुछ मीडिया ने लिया है। यहां यह जानना जरूरी है कि आस्था का लोकपर्व महाछठ ऐसा त्योहार है जिसकी ख्याति दिनों-दिन न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी बढ़ती जा रही है। कोलकाता की बात की जाए तो यह पर्व सिर्फ उत्तर भारतीय मूल के नहीं बल्कि बंगाली भी बढ़-चढ़ कर करते है।
पीसीबी करेगा जांच क्या वाकई प्रदूषित हुआ है सरोवर
रवींद्र सरोवर को लेकर मचे बवाल के बीच ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सरोवर का पानी नमूने के तौर पर संग्रहीत किया गया है। पीसीबी ने इसे जांच के लिए भेज दिया है। इसकी रिपोर्ट आने पर ही पता चल पाएगा कि वाकई क्या छठ की वजह से सरोवर का पानी प्रदूषित हुआ है या पर्यावरण बचाओं का ठेका लेकर घूमने वाले बेवजह ही हल्ला मचा रहे है।

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