ग्राहकों से गुलजार रहने वाले बड़ाबाजार में छाई मायूसी

कोरोना का ग्रहण ऐसा लगा, जिसकी सुबह नहीं,प्रत्येक हॉकर को रोजाना हो रहा 500- 2000 रुपये का नुकसान
हॉकरों का एक ही सवाल : कैसे पटरी पर लौटेगी जिंदगी
कोलकाता : सिटी ऑफ जॉय का बड़ाबाजार ऐसा इलाका जो मिनी इंडिया की तर्ज पर जाना जाता है। हर तरह का व्यवसाय इसे बिजनेस हब की पहचान पहले ही दे चुका है। हॉकरों के मामले में भी बड़ाबाजार किसी से कम नहीं है। यहां के फुटपाथ पर सजने वाली दुकानों में ग्राहकों की भीड़ 12 महीने एक समान होती है। होली, दीवाली, दुर्गा पूजा या कोई अन्य त्यौहार के वक्त यहां पैर तक रखने की जगह नहीं होती। शादी के मौसम में यहां के हॉकरों की तो मानो चांदी हो मगर इस साल यह सब एक सपना भर रह गया। न शादियां हुई, न त्योहार मने न ही चल-पहल रही। ग्राहकों से गुलजार रहने वाला बड़ाबाजार मायूसी से मुंह गिराए बैठा है। कुछ है यहां तो सिर्फ सन्नाटा। इस सन्नाटे को आवाज कब मिलेगी यह किसी को नहीं पता। कोरोना का ग्रहण यहां के हॉकरों को इस कदर लगा है जिसकी सुबह होने का इंतजार सभी हॉकर्स पिछले 47 दिनों से कर रहे हैं।
क्या कहना है हॉकर्स यूनियन का
हॉकर्स संग्राम समिति के प्रेसिडेंट शक्तिमान घोष ने बताया कि सिर्फ बड़ा बाजार नहीं बल्कि जहां भी ये हॉकर्स अपनी दुकानदारी चलाते हैं, वहां एक ही हाल है। मंदी का माहौल है। हम सरकार से उनकी मदद की गुहार लगा रहे हैं, क्योंकि उनकी आय का जरिया एकमात्र हॉकरी ही है, जो लोग डाउन के कारण बंद है।
दोबारा जिंदगी में रफ्तार का इंतजार कर रहे हॉकर्स
यहां काम करने वाले ज्यादा तर हॉकर सालों से फुटपाथ पर अपनी दुकान चला रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जिनकी पुश्तैनी दुकानें हैं, यह एकमात्र आमदनी का जरिया है इनका। हॉकरों का कहना है कि लॉक डाउन ने उनकी जिंदगी की रफ्तार पर मानो ब्रेक लगा दिया है। दोबारा अपनी जिंदगी चलने का इंतजार हम 47 दिनों से कर रहे हैं।
लॉकडाउन के बाद होगी बड़ी चुनौती
यहां के हॉकरों का कहना है कि लॉक डाउन खत्म होना बड़ी बात नहीं है। मार्केट कैसे चलेगा यह हमारे लिए चुनौती होगी, क्योंकि लॉक डाउन खत्म हो जाए मगर कोरोना का असर इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाला है । सब समान्य होने के बाद भी,जिस तरह अर्थव्यवस्था गिरी है उसमें लोग सबसे पहले आकर शॉपिंग करेंगे यह तो संभव नहीं है। लोगों की प्राथमिकता खर्चे कम करना होगा जो एक तरह से हमारी रोटी पर लाले पड़ने जैसा दिख रहा हैं। इधर शक्तिमान घोष ने कहा कि निश्चित तौर पर इसकी भी कुछ न कुछ रुपरेखा तैयार की जाएगी।

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