कोलकाता मेट्रो पर पड़ सकता है सीमा विवाद का असर

कोलकाता : चीन सीमा से सटे लद्दाख के गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ हुए झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद देश में आक्रोश है। देश में लगभग हर स्तर पर चीन के बहिष्कार की मुहीम चल रही है। एक तरफ केंद्र सरकार ने भारतीय रेल व बीएसएनएल के करोड़ों के चीनी ठेके को रद्द कर दिया है। तो दूसरी ओर कई अन्य राज्य सरकारों ने चीन के बहिष्कार की रणनीति बनाई है। चीन के खिलाफ देश में फैले इस गुस्से का असर कोलकाता मेट्रो पर भी पड़ सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मेट्रो के पूर्ण आधुनिकीकरण के लिए चीन की कंपनी डालयान को 14 अत्याधुनिक मेट्रो रैक बनाने का ठेका मिला है। इन रैकों के आने के बाद कोलकाता मेट्रो से नॉन एसी रैकों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
रुक जाएगा आधुनिकिकरण
चीन से अभी तक मात्र एक अत्याधुनिक रैक कोलकाता पहुंचा है, ​जिसका ट्रायल रन जारी है। 13 अन्य रैकों का आना अभी बाकी है। परंतु वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए इस पर अनिश्चितता के बादल घिरे दिख रहे हैं। इस बारे में मेट्रो की मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी इंद्राणी बनर्जी ने कहा कि चीन के डालियान से 14 रैकों का ऑर्डर है लेकिन अब तक 1 रैक ही कोलकाता आया है। चीन की डालियान कंपनी से पहला मेट्रो रैक गत 2019 के मार्च महीने में जहाज के माध्यम से कोलकाता पहुंचा था। ऐसे में अगर यह करार भी प्रभावित होता है तो भविष्य में कोलकाता मेट्रो के आधुनिकीकरण पर सवालिया निशान लग जाएगा।
कोलकाता मेट्रो के रैक
कोलकाता मेट्रो में फिलहाल 27 रैक चलते हैं। इसमें से 13 नॉन एसी रैक हैं। चीन से अगर सारे रैक आ जाते हैं तो महानहगर में मेट्रो परिसेवा का प्रारूप बदल सकता है। मेट्रो रेलवे ने योजना के तहत 40 एसी रैको का विभिन्न संस्थाओं को ऑर्डर दिया है। इनमें 16 आईसीएफ को, 14 सीएनआर डालियान लोकोमोटिव एंड रोलिंग स्टॉक कंपनी को मिला है।

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