कोलकाता और आसपास होगा दूध का भारी संकट

दूध की खपत न होने और चारा न मिलने से कसाइयों को बेच दिए पशु
हरिराम पाण्डेय,कोलकाता : लॉकडाउन खत्म होने के बाद महानगर और आसपास दूध की भारी कमी हो सकती है। यह संकट बच्चों और रोगियों के लिए तो होगा ही, बंगाल की “मिष्टी मुख” संस्कृति के लिए भी होगा। पिछले 2 महीनों से लॉकडाउन की मार से कराहता दूध उद्योग अपनी ताकत खो बैठा है और इसका असर आने वाले दिनों में स्पष्ट दिखाई देगा। कोलकाता दूध बाजार के सबसे बड़े व्यापारी राजेश सिन्हा ने सन्मार्ग को बताया कि अच्छे दिनों में रोजाना शहर और आसपास के जिलों में तीन लाख लीटर दूध की खपत थी। सबसे बड़े खरीदार मिठाई वाले हैं, उसके बाद चाय वाले, डेरी वाले और अंत में घरेलू उपभोक्ता। लॉकडाउन के दौरान मिठाई और चाय की दुकानें बंद हो गईं और दूध का बिकना भी आधा हो गया। इसके बाद डेरी वालों ने सस्ते में दूध खरीदना शुरू किया। लेकिन डेयरी उद्योग में भंडारण क्षमता का अभाव है। यही नहीं, दूध का भंडारण भी एक नियत समय से ज्यादा नहीं किया जा सकता। इससे उन्होंने भी दूध खरीदना बंद कर दिया। अब बेचारे दूध उत्पादक क्या करें? उत्पादक दूध निकालकर जमीन पर बहाने लगे। लेकिन मवेशियों को खिलाने का खर्च कहां से आएगा? अगर खर्च आ भी गया, चारा कहां से आएगा? लॉकडाउन से परिवहन बंंद और चारा नहीं पहुंच पा रहा। यहां मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से चारा आता है। नतीजा यह हुआ कि चारा आना बंद हो गया। किसी के पास चारे का बहुत ज्यादा स्टॉक भी नहीं रखा था। दूध की बिक्री बंंद हुई तो दूध उत्पादकों ने अपने मवेशियों को सस्ते दामों में कसाइयों को बेच दिया। दूध व्यापार से जुड़े सांवर अली, आफताब और शमीम ने रुआंसा होकर बताया कि डेरी वालों ने भी दूध खरीदना बंद कर दिया और उनके पास कोई चारा नहीं रह गया दूध को फेंकने और मवेशियों को बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहा। सांवर ने बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार सहित उत्तर भारत में लगन के लिए दूध पहले से उनके स्टाॅक में था और थोड़ी बहुत जगह बची थी, उसे खरीद कर उन्होंने पूरा कर लिया। अब कहां रखते, इसलिए दूध खरीदना ही बंद कर दिया।राजेश सिन्हा बताते हैं कि बंगाल में दूध देने वाले जितने जानवर से उनमें से आधे बिक गए। अब प्रतिदिन 3 लाख लीटर नहीं, एक लाख लीटर ही दूध बिक पाता है। जब लॉकडाउन खत्म होगा तो दूध नहीं मिलेगा। क्योंकि यहां संकट तीन तरफ से है। पहला की दूध देने वाले मवेशी नहीं रहे और दूसरा अभी जो चारा हुआ है वह बाजार में जून के अंत तक पहुंचेगा और तीसरा दूध देने वाले नए पशु भी नहीं है क्योंकि पशु भादो में बच्चा देते हैं और तभी बिकने के लिए बाजार में आते हैं। भादो यानी जुलाई का आखिर और इसमें अभी लगभग 2 महीने का वक्त है।

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