दाल रोटी ही है कोरोना का समाधान

कोरोना इफेक्ट : आटा ने अपना भाव बढ़ाया नहीं, दाल ने किया कम
सन्मार्ग संवाददाता,कोलकाता : कोरोना काल में अब दाल – रोटी ही लोगों को बचाने वाला है। आटा ने अपना भाव नहीं बढ़ाया है तो वहीं दाल ने भाव कम कर लिया है। गत 23 मार्च से लॉकडाउन के बाद कुछ समय के लिए दाल और आटा के दामों में तेजी आयी थी, लेकिन अब दोनों के दाम पटरी पर आ गये हैं। हालांकि दाम में तेजी आने का कारण कहीं ना कहीं लोग खुद हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद लोगों ने जमकर दाल, आटा समेत जरूरी सामानों की खरीदारी कर ली थी। परिवार में भले ही 2 लोग हों, मगर लोगों ने खरीदारी 7 सदस्यों के परिवार की तरह की थी। ऐसे में दाम बढ़ना तो स्वाभाविक ही था। हालांकि वर्तमान समय की बात करें तो अब दाल और आटा की कीमतें सामान्य हैं। इसके अलावा सप्लाई चेन में भी कहीं काेई गड़बड़ी नहीं है।
पहले हुई थी जमाखोरी
जो दाल जहाज से लाये जाते हैं, उन्हें इम्पोर्टर्स होलसेलर्स को बेचते हैं। सूत्रों के अनुसार, लॉकडाउन के बाद कुछ इम्पोर्टर्स दाल कम बेच रहे थे और दाम अधिक बढ़ने की उम्मीद में जमाखोरी कर रहे थे। इस कारण लॉकडाउन के बाद दाल की कीमतों में उछाल आ गयी थी। हालांकि ईबी द्वारा लगातार अभियान चलाये जाने के बाद अब स्थितियां काबू में आयी हैं।
क्या कहा अध्यक्ष ने
दालपट्टी एसोसिएशन के महासचिव जय किशोर अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल दाल को लेकर कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। सप्लाई चेन भी पूरी तरह ठीक है। स्वाभाविक तौर पर कभी -कभी दाल के दाम तो बढ़ते ही हैं मगर फिलहाल सब
ठीक है।
एक नजर दाल के रेट पर
-दाल रु./किलो
-मसूर 70-80
– पीला मूंग 100-130
-मूंग गोटा 90-110
-अरहर 90-100
-चना गोटा 50-55
-मटर दाल 60-65

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