कोरोना महामारी : अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं पुस्तक प्रकाशक व विक्रेता

करीब 4 लाख लोग जुड़े हैं इस उद्योग से, कोरोना की मार से उबरने में लगेगा लंबा वक्त
सन्मार्ग संवाददाता,  कोलकाता : कोरोना महामारी ने पूरे विश्व में आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करने के साथ ही अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचाई है। पश्चिम बंगाल के पुस्तक प्रकाशक और विक्रेताओं का कहना है इस महामारी ने उनके व्यवसाय पर कुठाराघात किया है। पुस्तक प्रकाशक और विक्रेता अपनी अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। पब्लिशर्स एंड बुक सेलर्स गिल्ड के अध्यक्ष त्रिदिव कुमार चट्टोपाध्याय का कहना है कि इस व्यवसाय से वे करीब 40 वर्षों से जुड़े हुए हैं लेकिन इस प्रकार की परिस्थिति से पहले कभी सामना नहीं हुआ। कोरोना के चलते पुस्तक प्रकाशकों और विक्रेताओं को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। कोरोना का कहर झेल रहे बोईपाड़ा कॉलेज स्ट्रीट पर अम्फान महाचक्रवात की भी मार पड़ी। इससे भरपाई में लंबा वक्त ललेगा।
उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने इसे उद्योग का दर्जा नहीं दिया है लेकिन पुस्तकों के प्रकाशन और इनकी बिक्री से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्य़क्ष तौर पर करीब 4 लाख लोग जुड़े हैं। इसमें प्रबंधन से लेकर सामान्य कर्मचारी तक शामिल हैं और कोरोना से सबकी माली हालत खस्ता हुई है।

1 जून से खुल रही हैं 50-60 फीसदी दुकानें

उन्होंने कहा कि 1 जून से कॉलेज स्ट्रीट में लगभग 50-60 फीसदी दुकानें खुल रही हैं। छोटी-छोटी कई दुकानें अभी बंद हैं। कई एसे प्रकाशक, दुकानदार और कर्मचारी हैं जो दूदराज के जिलों के रहने वाले हैं। लॉकडाउन के चलते वे अपने घरों को चले गये हैं। अब जब तक ट्रेन सेवा सामान्य नहीं होगी, उनका लौटना मुश्किल है।चट्टोपाध्याय का कहना है कि पुस्तकों की दुकानें तो खुल रही हैं लेकिन खरीदारों की संख्या काफी कम है। एक तरफ कोरोना का डर तो दूसरी ओर परिवहन के पर्याप्त साधन अभी उपलब्ध नहीं हैं। जिलों से भारी संख्या में पुस्तकों की खरीदारी के लिए लोग आते हैं, लेकिन लोकल ट्रेन की सेवा बंद है। बसों की संख्या भी काफी कम है। इसलिए वे आ नहीं पा रहे हैं। कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पुस्तकों की डेलिवरी हो रही है लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं। पुस्तकों की ऑनलाइन बिक्री दुकानों में जाकर पारंपरिक तरीके से खरीदारी का पूर्ण रूप से विकल्प फिलहाल नहीं बन पाई है। पुराने खरीदार और ग्रामीण इलाकों के लिए यह प्लेटफॉर्म आसान नहीं है। वैसे भी पुस्तक को हाथ में लेकर उलट-पलट कर देखने, सूची पढ़ने के बाद खरीदी करने वालों की संख्या काफी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान फिलहाल बंद हैं। परीक्षाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। अन्य वर्षों में तो इस समय पुस्तकों की दुकानों में भारी भीड़ देखी जाती थी लेकिन इस साल अभी विरानी छायी है।

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